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Kushinagar News: साइबर गैंग का पर्दाफाश, पांच बदमाश गिरफ्तार
Sat, 15 Feb 2025 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 15 Feb 2025 12:00 AM IST
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- सीएसपी संचालक से की थी जालसाजी, महराजगंज का बताया था पता
- पुलिस के रडार पर गैंग के कई गुर्गे, लाखों की संपत्ति जब्त
पडरौना। साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह का एसपी ने शुक्रवार को पर्दाफाश किया। सीएसपी संचालक से एक लाख की ठगी के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया। इनमें एक बाल अपचारी भी शामिल है। साइबर अपराध से अर्जित कार व अन्य सामान पुलिस ने जब्त कर लिया है।
पडरौना कोतवाली क्षेत्र के उपाध्याय छपरा निवासी विजय कुमार उपाध्याय मेहदीगंज में सीएसपी चलाते हैं। इनकी दुकान पर आठ सितंबर की दोपहर में दो युवक बाइक से पहुंचे। एक युवक ने अपना नाम सिंटू यादव जिला महराजगंज बताया और वोटर आईडी कार्ड दिखाते हुए कहा कि बहन के घर आया था। अचानक एक लाख रुपये की जरूरत पड़ गई है। उसके मोबाइल नंबर पर कॉल और वोटर आईडी देखने के बाद सीएसपी संचालक को विश्वास हो गया।
जालसाज ने सीएसपी संचालक के मोबाइल पर दो बैंकों में चार बार में 25-25 हजार रुपये ऑनलाइन भेज दिया। इसके बाद सीएसपी संचालक ने उसे एक लाख रुपये नकद दे दिए। अपने मित्र के साथ बैंक में सीएसपी संचालक गया तो उसके खाते से लेन-देन पर रोक लगाने की बात बैंककर्मियों ने बताई। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की तो पता चला कि युवक और किशोर साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। यह गैंग आसपास के जिलों व बिहार में सक्रिय है।
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पुलिस ने रामकोला क्षेत्र के परोहरा डंमर छपरा गांव निवासी संदीप गुप्ता, सन्नी गुप्ता, रामकोला नगर के उर्दहा नंबर दो निवासी मयंक कुशवाहा और विकास कुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। वहीं एक बाल अपचारी को पुलिस ने बाल सुधार गृह में भेज दिया। पुलिस टीम को एसपी ने 25 हजार इनाम दिया।
बंद नंबरों को आवंटित करा साइबर अपराध को देते हैं अंजाम
पडरौना। साइबर अपराध का नया तरीका सामने आया है। कम उम्र के लड़के शौक पूरा करने के लिए साइबर अपराधियों के संपर्क में आने के बाद जालसाजी को अंजाम दे रहे हैं। रामकोला थाना क्षेत्र के मेहदीगंज के सीएसपी संचालक के साथ हुई ठगी की जांच में पुलिस ने शुक्रवार को साइबर अपराधियों के गैंग का भंडाफोड़ किया। आरोपियों से पूछताछ में साइबर अपराध करने का जो तरीका सामने आया, उससे कुछ देर के लिए पुलिस भी हैरान हो गई।
एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि यह संगठित गिरोह पूर्वांचल और बिहार में भी सक्रिय है। ऐसे मोबाइल नंबर जो लोगों के बैंक खाते में लिंक रहता है और बाद में किसी कारण बंद हो जाता है। लेकिन, लोग लिंक मोबाइल नंबर नहीं बदलते हैं। ऐसे मोबाइल नंबरोें को साइबर अपराधी री एलाट करा लेते हैं। री एलाट कराए मोबाइल नंबर से माई आधार एप की मदद से पुराने मोबाइल नंबर से धारक का आधार कार्ड नंबर प्राप्त कर लेते हैं। पुराने मोबाइल नंबर के धारक के आधार कार्ड नंबर व लिंक मोबाइल नंबर का प्रयोग कर फोन-पे बना लेते हैं। उसके बाद अलग-अलग सीएसपी संचालकों से उक्त बैंक खाते में स्कैनर के माध्यम से रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। सीएसपी संचालक रकम ट्रांसफर के एवज में अधिक कमीशन लेते हैं। ऐसे मोबाइल नंबरों की मदद से इस गिरोह के सदस्य लोगों को ऋण दिलाने के नाम पर वसूली करते हैं।
ये सामान बरामद
पुलिस ने संगठित साइबर गैंग के सदस्यों के पास से अपराध से अर्जित करीब 11 लाख रुपये का सामान और नकदी बरामद की है। 1.12 लाख रुपये नकद, एक कार, तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और 26 फर्जी आधार कार्ड पुलिस ने जब्त किया है।
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- पुलिस के रडार पर गैंग के कई गुर्गे, लाखों की संपत्ति जब्त
पडरौना। साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह का एसपी ने शुक्रवार को पर्दाफाश किया। सीएसपी संचालक से एक लाख की ठगी के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया। इनमें एक बाल अपचारी भी शामिल है। साइबर अपराध से अर्जित कार व अन्य सामान पुलिस ने जब्त कर लिया है।
पडरौना कोतवाली क्षेत्र के उपाध्याय छपरा निवासी विजय कुमार उपाध्याय मेहदीगंज में सीएसपी चलाते हैं। इनकी दुकान पर आठ सितंबर की दोपहर में दो युवक बाइक से पहुंचे। एक युवक ने अपना नाम सिंटू यादव जिला महराजगंज बताया और वोटर आईडी कार्ड दिखाते हुए कहा कि बहन के घर आया था। अचानक एक लाख रुपये की जरूरत पड़ गई है। उसके मोबाइल नंबर पर कॉल और वोटर आईडी देखने के बाद सीएसपी संचालक को विश्वास हो गया।
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जालसाज ने सीएसपी संचालक के मोबाइल पर दो बैंकों में चार बार में 25-25 हजार रुपये ऑनलाइन भेज दिया। इसके बाद सीएसपी संचालक ने उसे एक लाख रुपये नकद दे दिए। अपने मित्र के साथ बैंक में सीएसपी संचालक गया तो उसके खाते से लेन-देन पर रोक लगाने की बात बैंककर्मियों ने बताई। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की तो पता चला कि युवक और किशोर साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। यह गैंग आसपास के जिलों व बिहार में सक्रिय है।
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पुलिस ने रामकोला क्षेत्र के परोहरा डंमर छपरा गांव निवासी संदीप गुप्ता, सन्नी गुप्ता, रामकोला नगर के उर्दहा नंबर दो निवासी मयंक कुशवाहा और विकास कुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। वहीं एक बाल अपचारी को पुलिस ने बाल सुधार गृह में भेज दिया। पुलिस टीम को एसपी ने 25 हजार इनाम दिया।
बंद नंबरों को आवंटित करा साइबर अपराध को देते हैं अंजाम
पडरौना। साइबर अपराध का नया तरीका सामने आया है। कम उम्र के लड़के शौक पूरा करने के लिए साइबर अपराधियों के संपर्क में आने के बाद जालसाजी को अंजाम दे रहे हैं। रामकोला थाना क्षेत्र के मेहदीगंज के सीएसपी संचालक के साथ हुई ठगी की जांच में पुलिस ने शुक्रवार को साइबर अपराधियों के गैंग का भंडाफोड़ किया। आरोपियों से पूछताछ में साइबर अपराध करने का जो तरीका सामने आया, उससे कुछ देर के लिए पुलिस भी हैरान हो गई।
एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि यह संगठित गिरोह पूर्वांचल और बिहार में भी सक्रिय है। ऐसे मोबाइल नंबर जो लोगों के बैंक खाते में लिंक रहता है और बाद में किसी कारण बंद हो जाता है। लेकिन, लोग लिंक मोबाइल नंबर नहीं बदलते हैं। ऐसे मोबाइल नंबरोें को साइबर अपराधी री एलाट करा लेते हैं। री एलाट कराए मोबाइल नंबर से माई आधार एप की मदद से पुराने मोबाइल नंबर से धारक का आधार कार्ड नंबर प्राप्त कर लेते हैं। पुराने मोबाइल नंबर के धारक के आधार कार्ड नंबर व लिंक मोबाइल नंबर का प्रयोग कर फोन-पे बना लेते हैं। उसके बाद अलग-अलग सीएसपी संचालकों से उक्त बैंक खाते में स्कैनर के माध्यम से रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। सीएसपी संचालक रकम ट्रांसफर के एवज में अधिक कमीशन लेते हैं। ऐसे मोबाइल नंबरों की मदद से इस गिरोह के सदस्य लोगों को ऋण दिलाने के नाम पर वसूली करते हैं।
ये सामान बरामद
पुलिस ने संगठित साइबर गैंग के सदस्यों के पास से अपराध से अर्जित करीब 11 लाख रुपये का सामान और नकदी बरामद की है। 1.12 लाख रुपये नकद, एक कार, तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और 26 फर्जी आधार कार्ड पुलिस ने जब्त किया है।