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Kushinagar News: अब तक का सबसे गर्म सितंबर, 15 वर्षों का तोड़ा रिकॉर्ड
Sun, 22 Sep 2024 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 22 Sep 2024 01:18 AM IST
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पडरौना। पिछले वर्ष में सितंबर माह के तापमान की अपेक्षा इस वर्ष एक डिग्री सेल्सियस अधिक है। मौसम के बढ़ते तापमान की वजह मौसम वैज्ञानिक पर्यावरण में हुए प्रदूषण को मान रहे हैं। इसका असर फसल और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सितंबर माह में बारिश होने लायक मानसून सक्रिय नहीं हो रहा है। इस माह में लोगों की उम्मीद से बढ़कर गर्मी पड़ रही है।
शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 36 और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यही नहीं अब तक का सबसे गर्म माह सितंबर है, बीते 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्यावरण प्रदूषण के चलते ऐसा हो रहा है। इस सीजन में भले ही बारिश सामान्य के करीब हुई हो, लेकिन लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल गर्मी का यह दौर बना रहेगा। इस बार सितंबर माह सामान्य से अधिक गर्म है। इस माह में मौसम के तापमान के दर्ज आंकड़ों को देखें तो औसतन अधिकतम तापमान 35.9 और न्यूनतम तापमान 26.56 डिग्री सेल्सियस है, जबकि पिछले वर्ष सितंबर माह में अधिकतम तापमान 34.82 और न्यूनतम तापमान 26.18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
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पिछले 15 वर्षों का सितंबर माह का तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2011 32.77 25.23
2012 34.02 24.91
2013 33.18 25.06
2014 34.78 24.7
2015 32.49 25.21
2016 34.17 24.06
2017 33.41 25.98
2018 33.39 24.86
2019 31.9 25.11
2020 33.68 25.92
2021 34.03 25.85
2022 33.76 25.5
2023 34.82 26.18
2024 35.9 26.56 अब तक
स्रोत: कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया, कुशीनगर।
कोट
प्रदूषण के कारण सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में शहरी घाट द्वीप विकसित हो रहे हैं। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार में अल-नीनो की स्थिति पैदा हो रही है, जिसके कारण वर्षा में कमी आ रही है। अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। आईएमडी दिल्ली ने यह भी पूर्वानुमान लगाया है कि इस वर्ष ला-नीना की स्थिति के कारण सर्दी बहुत ठंडी होगी।
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-श्रुति वी सिंह, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया, कुशीनगर।
कोट
बढ़ते औद्योगिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और प्रकृति के साथ मानव के बढ़ते हस्तक्षेप ने पारिस्थितिकीय तंत्र को प्रभावित किया है। इसकी वजह से प्रकृति का भयावह रूप देखने को मिल रहा है। तापमान में वृद्धि होने के साथ ऋतुचक्र भी परिवर्तित हो रही है।
-डॉ. हरिओम मिश्र, पर्यावरणविद।
कोट
मौसम के तापमान में हो रही बढ़ोतरी से सभी तरह के फसलों पर कुप्रभाव पड़ेगा। फसलों के वृद्धि के साथ उसका पैदावार भी सामान्य तापमान की अपेक्षा मौसम का तापमान बढ़ने पर पैदावार कम होगी। हालांकि वैज्ञानिकों की तरफ से बढ़ते तापमान में भी फसलों का पैदावार प्रभावित न हो इसके लिए रिसर्च कर नई-नई प्रजाति के बीज तैयार किए जा रहे हैं।
- डॉ. मोनिका, जिला कृषि अधिकारी, कुशीनगर।
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बदलते मौसम में मौसमी बीमारियों की समस्या होना तो सामान्य बात है। लेकिन मौसम के तापमान में हो रहे हर वर्ष बढ़ोत्तरी से लोगों श्वास से संबंधित बीमारियों से अधिक पीड़ीत होंगे। क्योंकि तापमान में हुइ बढ़ोत्तरी की वजह प्रर्यावरण प्रदूषण है। प्रदूषण का सीधा कुप्रभाव लोगों के फेफड़े पर पड़ता है। यदि इसका सही समय पर ठीक ढंग से इलाज तो मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।
डॉ. विकास गुप्ता, चिकित्सक।
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शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 36 और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यही नहीं अब तक का सबसे गर्म माह सितंबर है, बीते 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्यावरण प्रदूषण के चलते ऐसा हो रहा है। इस सीजन में भले ही बारिश सामान्य के करीब हुई हो, लेकिन लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल गर्मी का यह दौर बना रहेगा। इस बार सितंबर माह सामान्य से अधिक गर्म है। इस माह में मौसम के तापमान के दर्ज आंकड़ों को देखें तो औसतन अधिकतम तापमान 35.9 और न्यूनतम तापमान 26.56 डिग्री सेल्सियस है, जबकि पिछले वर्ष सितंबर माह में अधिकतम तापमान 34.82 और न्यूनतम तापमान 26.18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
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पिछले 15 वर्षों का सितंबर माह का तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2011 32.77 25.23
2012 34.02 24.91
2013 33.18 25.06
2014 34.78 24.7
2015 32.49 25.21
2016 34.17 24.06
2017 33.41 25.98
2018 33.39 24.86
2019 31.9 25.11
2020 33.68 25.92
2021 34.03 25.85
2022 33.76 25.5
2023 34.82 26.18
2024 35.9 26.56 अब तक
स्रोत: कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया, कुशीनगर।
कोट
प्रदूषण के कारण सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में शहरी घाट द्वीप विकसित हो रहे हैं। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार में अल-नीनो की स्थिति पैदा हो रही है, जिसके कारण वर्षा में कमी आ रही है। अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। आईएमडी दिल्ली ने यह भी पूर्वानुमान लगाया है कि इस वर्ष ला-नीना की स्थिति के कारण सर्दी बहुत ठंडी होगी।
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-श्रुति वी सिंह, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया, कुशीनगर।
कोट
बढ़ते औद्योगिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और प्रकृति के साथ मानव के बढ़ते हस्तक्षेप ने पारिस्थितिकीय तंत्र को प्रभावित किया है। इसकी वजह से प्रकृति का भयावह रूप देखने को मिल रहा है। तापमान में वृद्धि होने के साथ ऋतुचक्र भी परिवर्तित हो रही है।
-डॉ. हरिओम मिश्र, पर्यावरणविद।
कोट
मौसम के तापमान में हो रही बढ़ोतरी से सभी तरह के फसलों पर कुप्रभाव पड़ेगा। फसलों के वृद्धि के साथ उसका पैदावार भी सामान्य तापमान की अपेक्षा मौसम का तापमान बढ़ने पर पैदावार कम होगी। हालांकि वैज्ञानिकों की तरफ से बढ़ते तापमान में भी फसलों का पैदावार प्रभावित न हो इसके लिए रिसर्च कर नई-नई प्रजाति के बीज तैयार किए जा रहे हैं।
- डॉ. मोनिका, जिला कृषि अधिकारी, कुशीनगर।
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बदलते मौसम में मौसमी बीमारियों की समस्या होना तो सामान्य बात है। लेकिन मौसम के तापमान में हो रहे हर वर्ष बढ़ोत्तरी से लोगों श्वास से संबंधित बीमारियों से अधिक पीड़ीत होंगे। क्योंकि तापमान में हुइ बढ़ोत्तरी की वजह प्रर्यावरण प्रदूषण है। प्रदूषण का सीधा कुप्रभाव लोगों के फेफड़े पर पड़ता है। यदि इसका सही समय पर ठीक ढंग से इलाज तो मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।
डॉ. विकास गुप्ता, चिकित्सक।