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Kushinagar News: त्याग और भक्ति के प्रेरणास्रोत हैं राजा भरत
Sat, 06 Jun 2026 02:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 06 Jun 2026 02:53 AM IST
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दुदही के श्रीराम जानकी मंदिर सुराजी बाजार में रुद्राभिषेक करते लोग।संवाद
- फोटो : अमित कुमार कुलश्रेष्ठ
दुदही। जो व्यक्ति सच्चा ज्ञानी होता है, वही समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। कनिष्ठ भी अपने गुणों के आधार पर श्रेष्ठ बन सकता है, क्योंकि श्रेष्ठता सदैव गुणों पर निर्भर करती है। विषम परिस्थितियों में कष्टों को सहन कर उनसे सीखने का प्रयास करना चाहिए। यही श्रेष्ठता प्राप्त करने का प्रथम सोपान है। राजा भरत त्याग और भक्ति के प्रेरणास्रोत हैं। लोगों को उनके भातृप्रेम की सीख लेनी चाहिए।
ये बातें रामकथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कही। वे शुक्रवार को श्रीराम जानकी मंदिर सुराजी बाजार में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन राजा भरत की कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि राम और भरत ने संपत्ति का बंटवारा नहीं किया, बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया। वहीं केवट ने समर्पित भाव से भगवान राम के चरण धोए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि संसार की कोई भी माता अपने पुत्रों को कष्ट नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि यदि सच्चे मन से भगवान की भक्ति करेंगे, तो भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि प्रभु राम ने भरत को रघुवंश का हंस कहा है। भरत प्रेमरूपी अमृत के सागर हैं।
इस दौरान गिरिजेश जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, रामकुमार जायसवाल, विश्वबंधु जायसवाल, राजन ब्याहुत, हरकेश रौनियार, कीर्तन बिहारी, आलोक, मुकेश, सुनील गुप्ता, स्नेहलता जायसवाल आदि मौजूद रहे।
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ये बातें रामकथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कही। वे शुक्रवार को श्रीराम जानकी मंदिर सुराजी बाजार में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन राजा भरत की कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि राम और भरत ने संपत्ति का बंटवारा नहीं किया, बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया। वहीं केवट ने समर्पित भाव से भगवान राम के चरण धोए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि संसार की कोई भी माता अपने पुत्रों को कष्ट नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि यदि सच्चे मन से भगवान की भक्ति करेंगे, तो भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि प्रभु राम ने भरत को रघुवंश का हंस कहा है। भरत प्रेमरूपी अमृत के सागर हैं।
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इस दौरान गिरिजेश जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, रामकुमार जायसवाल, विश्वबंधु जायसवाल, राजन ब्याहुत, हरकेश रौनियार, कीर्तन बिहारी, आलोक, मुकेश, सुनील गुप्ता, स्नेहलता जायसवाल आदि मौजूद रहे।
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