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कटान की जद में हैं कई मकान
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:28 AM IST
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कटान की जद में हैं कई मकान
- फोटो : अमर उजाला
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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। गंडक नदी की कटान थम नहीं रही है। इसके चलते अहिरौलीदान के कचहरी टोला के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। नदी के मुहाने पर आए मकानों के मालिक अपने घरों से जरूरी सामान समेटने में जुटे हैं वहीं दूूूसरी तरफ बाढ़ खंड ने बचाव कार्य तेज कर दिया है।
बीस दिनों से अहिरौलीदान का कचहरी टोला गंडक नदी के निशाने पर है। नदी की कटान की चपेट में कचहरी टोला का आधा हिस्सा आ चुका है। पचास से अधिक लोग अपने पक्के मकान को तोड़ चुके है। गांव के धुरंधर सिंह को काफी क्षति हुई है। इसी तरह भुटेलाराम, मंटू सिंह, हरिकृष्ण सिंह, सुशील सिंह, श्यामसुंदर सिंह, बिंदेश्वरी सिंह, रामध्यान सिंह, हीरालाल सिंह, मोहन यादव, ईश्वर सिंह, रविंद्र सिंह सहित तमाम लोगो को अपने मकान के साथ उपजाऊ भूमि से भी हाथ धोना पड़ा है, जबकि इस समय नदी जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल और बृजकिशोर सिंह के घर से मात्र 15-20 मीटर की दूरी पर है। इसके चलते अब भी बीस से पच्चीस मकानों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ खंड एक सप्ताह से रात दिन कभी बोल्डर और कभी जियो बैग से गंडक की कटान रोकने की कोशिशों में लगा हुआ, लेकिन अपेक्षित सफलता उसे नहीं मिल पा रही है। कभी नोनियापट्टी में तो कभी खैरखूटा अथवा मदुरही में कटान के कारण विभाग की कोशिशों पर पानी फिर जा रहा है। यही नहीं, कभी बोल्डर तो कभी लोहे की जाली भी कम पड़ जाती है। ग्रामप्रधान हीरालाल यादव, जितेन्द्र सिंह, सुजीत यादव, अरविन्द सिंह आदि का कहना है कि इस नदी के रुख का कोई पता नहीं होता है। कब कटान तेज हो जाएगी, कोई नहीं जानता। यही कारण है कि लोग अब भी दहशत में है और सामानों को हटाने में लगे है। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड भरत राम ने बताया कि बचाव कार्य जारी है। पूरी कोशिश है कि लोगों के मकान और सामान सुरक्षित बच जाएं।
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बीस दिनों से अहिरौलीदान का कचहरी टोला गंडक नदी के निशाने पर है। नदी की कटान की चपेट में कचहरी टोला का आधा हिस्सा आ चुका है। पचास से अधिक लोग अपने पक्के मकान को तोड़ चुके है। गांव के धुरंधर सिंह को काफी क्षति हुई है। इसी तरह भुटेलाराम, मंटू सिंह, हरिकृष्ण सिंह, सुशील सिंह, श्यामसुंदर सिंह, बिंदेश्वरी सिंह, रामध्यान सिंह, हीरालाल सिंह, मोहन यादव, ईश्वर सिंह, रविंद्र सिंह सहित तमाम लोगो को अपने मकान के साथ उपजाऊ भूमि से भी हाथ धोना पड़ा है, जबकि इस समय नदी जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल और बृजकिशोर सिंह के घर से मात्र 15-20 मीटर की दूरी पर है। इसके चलते अब भी बीस से पच्चीस मकानों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ खंड एक सप्ताह से रात दिन कभी बोल्डर और कभी जियो बैग से गंडक की कटान रोकने की कोशिशों में लगा हुआ, लेकिन अपेक्षित सफलता उसे नहीं मिल पा रही है। कभी नोनियापट्टी में तो कभी खैरखूटा अथवा मदुरही में कटान के कारण विभाग की कोशिशों पर पानी फिर जा रहा है। यही नहीं, कभी बोल्डर तो कभी लोहे की जाली भी कम पड़ जाती है। ग्रामप्रधान हीरालाल यादव, जितेन्द्र सिंह, सुजीत यादव, अरविन्द सिंह आदि का कहना है कि इस नदी के रुख का कोई पता नहीं होता है। कब कटान तेज हो जाएगी, कोई नहीं जानता। यही कारण है कि लोग अब भी दहशत में है और सामानों को हटाने में लगे है। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड भरत राम ने बताया कि बचाव कार्य जारी है। पूरी कोशिश है कि लोगों के मकान और सामान सुरक्षित बच जाएं।
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