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कालाजार के चार मरीज भर्ती
कुशीनगर
Updated Sat, 07 May 2016 11:42 PM IST
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जांच करते डॉक्टर।
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। विभिन्न गांवों के चार मासूम कालाजार की चपेट में आ गए हैं। इनमें दो बच्चे एक ही परिवार के हैं। इन सभी को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां इनका इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक तुर्कपट्टी थानाक्षेत्र के शंकरपुर गांव के निवासी शंभू की छह वर्षीय बेटी निभा कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। बुखार ठीक नहीं होने से परेशान परिवारवालों ने बच्ची को जिला अस्पताल में डॉक्टर से दिखाया। जांच में बच्ची को कालाजार होने की पुष्टि हुई। डॉक्टर की सलाह पर बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
बिहार के धनहां थानाक्षेत्र के खलवापट्टी गांव के निवासी उदय मियां की आठ वर्ष की बच्ची गुलशन को भी कालाजार होने के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनके अलावा सेवरही थानाक्षेत्र के कोटवा गांव के एक ही परिवार के दो बच्चे इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गए हैं। रामू के दस वर्षीय बेटा दीपक और चार वर्षीय बेटी काजल का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
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इन बच्चों का इलाज कर रहे वरिष्ठ बाल रोग सलाहकार डॉ. सतीश रंजन ने बताया कि बच्चों की हालत में सुधार हो रहा है। उनका कहना था कि यह रोग सेंट फ्लाई नाम की मक्खी के कारण होता है, जो गंदगीयुक्त स्थानों पर पाई जाती हैं।
इस रोग की चपेट में आने वालों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता निरंतर कम होती जाती है। लीवर की तिल्ली बढ़ जाती है, जिससे शरीर में खून नहीं बनता और अन्य रोग भी अपनी गिरफ्त में लेने लगते हैं।
ज्यादातर जमीन पर सोने वाले लोग ही इस बीमारी की चपेट में आते हैं। इस बुखार में मरीज का शरीर काला पड़ने लगता है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है, लेकिन जिला चिकित्सालय में कालाजार के मरीजों के जांच और इलाज की निशुल्क व्यवस्था है। एमबीसोन नाम का इंजेक्शन इसका कारगर उपाय है, जो जिला अस्पताल में उपलब्ध है।
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स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक तुर्कपट्टी थानाक्षेत्र के शंकरपुर गांव के निवासी शंभू की छह वर्षीय बेटी निभा कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। बुखार ठीक नहीं होने से परेशान परिवारवालों ने बच्ची को जिला अस्पताल में डॉक्टर से दिखाया। जांच में बच्ची को कालाजार होने की पुष्टि हुई। डॉक्टर की सलाह पर बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
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बिहार के धनहां थानाक्षेत्र के खलवापट्टी गांव के निवासी उदय मियां की आठ वर्ष की बच्ची गुलशन को भी कालाजार होने के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनके अलावा सेवरही थानाक्षेत्र के कोटवा गांव के एक ही परिवार के दो बच्चे इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गए हैं। रामू के दस वर्षीय बेटा दीपक और चार वर्षीय बेटी काजल का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
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इन बच्चों का इलाज कर रहे वरिष्ठ बाल रोग सलाहकार डॉ. सतीश रंजन ने बताया कि बच्चों की हालत में सुधार हो रहा है। उनका कहना था कि यह रोग सेंट फ्लाई नाम की मक्खी के कारण होता है, जो गंदगीयुक्त स्थानों पर पाई जाती हैं।
इस रोग की चपेट में आने वालों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता निरंतर कम होती जाती है। लीवर की तिल्ली बढ़ जाती है, जिससे शरीर में खून नहीं बनता और अन्य रोग भी अपनी गिरफ्त में लेने लगते हैं।
ज्यादातर जमीन पर सोने वाले लोग ही इस बीमारी की चपेट में आते हैं। इस बुखार में मरीज का शरीर काला पड़ने लगता है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है, लेकिन जिला चिकित्सालय में कालाजार के मरीजों के जांच और इलाज की निशुल्क व्यवस्था है। एमबीसोन नाम का इंजेक्शन इसका कारगर उपाय है, जो जिला अस्पताल में उपलब्ध है।