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Kushinagar News: दाल की चमक पर गए तो पड़ जाएंगे बीमार

Fri, 21 Nov 2025 01:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Nov 2025 01:41 AM IST
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If you go by the shine of lentils, you will fall ill
दुकान पर सजी दाल।
पडरौना। बाजार में मिल रही चमकीली दाल से सावधान हो जाएं। चमक देखकर दाल नहीं खरीदें नहीं तो वह आपकी सेहत खराब कर सकती है। खाद्य विभाग की ओर से इस वित्तीय वर्ष में एकत्र पांच नमूनों में से एक अधोमानक मिला है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में एकत्र कुल 13 नमूनों में से चार पास मिले थे। वहीं दाल के चार नमूनों में रंग और पांच में नमी मिली थी। ऐसे में दाल की खरीदारी करते हुए लोगों को पूरी तरह सतर्कता बरतनी चाहिए।
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खाने में सबसे अधिक लोग दाल-चावल पसंद करते हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह प्रोटीन और फाइबर का सबसे बड़ा स्रोत है। दालें महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक हैं। इसलिए दाल हर घर में अनिवार्य रूप से बनती है। मिलावट के कारोबारी इसी का फायदा उठा रहे हैं। बाजार में मिल रही पॉलिश की गई दालें चमकदार और आकर्षक लगती हैं, लेकिन आप इनकी चमक पर मत जाइए। क्योंकि कारोबारी काफी दिनों से रखी गई खराब दाल को चमकाने के लिए पॉलिशिंग सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। पुरानी दाल की चमक बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा तेल और पानी से पॉलिशिंग की जाती है और रंगने के लिए मेटालिन येलो का उपयोग किया जाता है। ऐसा करने से दाल के प्रत्येक दाने को एक चमकदार रूप मिलता है। ग्राहक चमकीली दाल को ताजा और सबसे बेहतर समझ कर इसे खरीद लेते हैं। जब लोग इसका सेवन करते हैं, तब उन्हें दाल के खराब होने की जानकारी मिलती है। ऐसे में उनके पास पछतावे के अलावा कुछ शेष नहीं बचता है। इस तरह के दाल के सेवन से आपकी सेहत धीरे-धीरे खराब होने लगती है।
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दालों में मिलाई जा रही यह सामग्री
अरहर दाल में उससे मिलते जुलते रंग वाली सस्ती दालों की मिलावट की जाती है। अरहर की दाल में खेसारी दाल की भी मिलावट की जा सकती है। हालांकि जिले में अभी तक खेसारी दाल की मिलावट नहीं मिली है। यह अरहर दाल के आकार से थोड़ा भिन्न होता है। इस आधार पर आप पहचान सकते हैं। चने की कई किस्में होती है। कोई चना बड़ा तो कोई छोटा होता है। किसी का रंग अधिक भूरा तो किसी का कम होता है। ऐसा माना जाता है, बेहतर क्वालिटी का चना हल्के भूरे रंग होता है। उसकी कीमतें अधिक होती है। इसकी दाल स्वादिष्ट होती हैं। खराब किस्म के चने की दाल की मिलावट अच्छी किस्मों के चने की दाल में की जाती है। इन दालों के आकार के जरिए मिलावट को पहचान सकते हैं। इसी तरह मूंग की दाल स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद मानी जाती है। तबीयत खराब होने पर लोगों को डॉक्टर मूंग की दाल की खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं। इसलिए यह दाल महंगी होती है। इसे देखते हुए इसमें मिलावट की गुंजाइश अधिक होती है। मूंग दाल मिलती-जूलती दूसरे जंगली पौधे के बीज की मिलावट की जाती है। उसमें मूंग की दाल की तरह रंग मिलाकर मूंग दाल में मिलावट की जाती है। मूंग दाल को पानी से धोकर चेक कर सकते हैं कि मिलावट हुई है या नहीं। कभी अधिक चमक के लिए भी मूंग की दाल में रंग मिलाए जाते हैं।
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पोषक तत्व से भरपूर होता है दाल
दाल में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। जानकारी के अनुसार 100 ग्राम दाल में 25.8 ग्राम प्रोटीन, दो ग्राम शुगर, 30.5 ग्राम फाइबर, 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, छह मिलीग्राम सोडियम मिलता है।




जिले के लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिले। इसके लिए विभाग पूरी तरह गंभीर है। वैसे तो विभाग की टीम हर समय जिले में भ्रमण कर खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजती है, लेकिन सहालग और त्योहारों के समय टीम की सक्रियता बढ़ा दी जाती है। विभाग की तरफ से टीम गठित कर संदेह के आधार पर खाद्य पदार्थों के नमूनों एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं खाद्य पदार्थों में मिलावट का संदेह हो तो विभाग को जानकारी उपलब्ध कराएं। शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।


- प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त, खाद्य- द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग।



केमिकल युक्त रंग पेट में जाने पर पाचन क्रिया को प्रभावित करते हैं। खाद्य पदार्थों में मिलावट के कारण लोगों के पेट में संक्रमण, लिवर में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्वसनीय दुकानों से खरीद करें और मिलावट की जांच कर लें। यदि पेट से जुड़ी समस्या हो रही है तो अपने मन से दवा का सेवन न करें। विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही दवाएं लें।

- डॉ. प्रवीण कुमार राव, डीएम गैस्ट्रो।
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