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मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी मीरा की पीड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
Updated Sun, 14 Aug 2016 11:40 PM IST
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जेल काटने के बाद शनिवार को छूटी मीरा
- फोटो : अमर उजाला
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अपनी जमीन पर कब्जा पाने के लिए अफसरों और नेताओं की चौखट पर हाजिरी लगाते-लगाते जेल तक पहुंची मीरा का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शांतिभंग में 14 दिन जेल काटकर शनिवार को घर पहुंची मीरा से सपा के वरिष्ठ नेता नथुनी कुशवाहा ने मुलाकात की। मीरा को न्याय दिलाने के लिए सीएम को पूरा प्रकरण बताने की बात कही।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि फरियाद लेकर पहुंची पीड़ित के साथ मनमानी करने वाले अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। शनिवार शाम को वरिष्ठ सपा नेता नथुनी कुशवाहा मीरा के घर पहुंचे और उससे पूरे प्रकरण की जानकारी ली। नथुनी ने फोन से प्रकरण पर डीएम से वार्ता की और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी जानकारी दी। उन्होंने मीरा कुशवाहा के शिकायती पत्रों व जमीनी विवाद से संबंधित कागजात लिए और स्वयं मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने मामले में एसडीएम की कार्रवाई की भर्त्सना करते हुए इसे प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने वाला कृत्य बताया है।
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जमानत में अटकाए रोड़े
30 जुलाई को वकील संग एसडीएम से मिलने पहुंची मीरा को शांतिभंग की आशंका में जेल भेज दिया गया। आमतौर पर ऐसे मामलों में 24 से 48 घंटे में जमानत मिल जाती है, लेकिन मीरा की जमानत अर्जी एक हफ्ते बाद भी मंजूर नहीं की गई। इसके पीछे वकील मीरा कुशवाहा के प्रति एसडीएम की नाराजगी को कारण ठहरा रहे हैं। इतना ही नहीं एसडीएम खड्डा ने मीरा की जमानत के लिए तृतीय श्रेणी के राज्य कर्मचारी को बतौर जमानतदार पेश करने की शर्त रख दी। इस बीच मीरा के परिजन डीएम के पास पहुंचे और जमानत अर्जी मंजूर कराने के लिए कार्रवाई करने की गुहार लगाई।
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वकीलों ने बताया नैसर्गिक न्याय का हनन
12 अगस्त को मीरा की खड्डा एसडीएम कोर्ट में पेशी पर जेल प्रशासन ने एक पत्र भी पेश किया। इसमें उल्लेख था कि शांतिभंग की आशंका में आरोपी को सात दिन से अधिक जेल में नहीं रखा जा सकता है। पत्र को आधार बनाकर वकीलों ने दबाव बनाया तो एसडीएम ने 50-50 हजार के दो बांड भराकर मीरा को जमानत दे दी। मीरा प्रकरण समेत कुछ अन्य मामलों को लेकर खड्डा तहसील बार एसोसिएशन ने एक सप्ताह से एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर रखा है। डीएम से एसडीएम व उनके पेशकार के स्थानांतरण की मांग भी की है। वकीलों का आरोप है कि मीरा के मामले में नैसर्गिक न्याय के हक का हनन हुआ है।
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मां की ममता पर भारी पड़े 14 दिन
मीरा को जेल भेजते वक्त उसकी गोद से छह माह का बेटा छीन लिया गया। हफ्ते भर मां से दूर रहने के बाद दुधमुंहा बीमार पड़ गया। तब उसका इलाज कराने के बाद घरवाले डीएम से गुहार लगाने पहुंचे। वहीं जेल में बेटे की जुदाई में एक दिन बाद ही मीरा बीमार पड़ गई। रविवार को आपबीती बताते हुए मीरा रो पड़ी। बकौल मीरा 30 जुलाई की देर रात जेल पहुंची तो बिना खाना-पानी के पूरी रात बैठकर बितानी पड़ी। अगले दिन बैरक में बंद कुल 107 महिला कैदियों का जूठन फेंकवाया गया। नाली भी साफ करनी पड़ी। दूसरे दिन ही तेज बुखार हो गया। पांच दिन तक तेज बुखार से तपती रही। खाना बेहद खराब था। लेकिन शिकायत पर महिला बंदी रक्षक पिटाई करती थीं।
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तीन साल पुराना है जमीन विवाद
खड्डा के गांव हथिया के गोबरी कुशवाहा की चार बेटियों में दूसरी मीरा महराजगंज में ब्याही है। पति विदेश में हैं। मीरा मायके में मां-बाप की सेवा करती है और गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। करीब तीन साल पहले पड़ोसियों ने घारी की जमीन पर छप्पर डालकर कब्जा कर लिया। अनशन किया तो कब्जा हट गया, लेकिन जमीन पर वह काबिज न हो सकी। फरियाद कर हारी मीरा ने आत्मदाह की चेतावनी देने के बाद एसडीएम कार्यालय के सामने खुद पर मिट्टी का तेल गिरा लिया। हालांकि, समय रहते पहुंचे पुलिसवालों ने उसे बचा लिया। कुछ दिन बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। मीरा ने पिटाई कर बाल काटने का आरोप लगाया।
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सीएमओ में पहले भी हो चुकी है शिकायत
बकौल मीरा वह 12 मई की शाम को डीएम के निर्देश पर एसडीएम खड्डा से मिलने उनके कार्यालय में पहुंची थी। एसडीएम व एक अन्य राजस्व अधिकारी ने मामले के निस्तारण के लिए एक लाख रुपये मांगे। रिश्वत न दी तो मनमानी का प्रयास किया। इसमें बेटा गोद से गिरकर चोटिल हो गया था। खड्डा थाने पहुंची तो बिना कार्रवाई के ही लौटा दिया गया। जन सुनवाई कार्यक्रम में सीएम से इसकी शिकायत की तो विशेष सचिव प्रांजल यादव ने 24 जून को कमिश्नर व एसपी कुशीनगर को कार्रवाई का निर्देश दिया था। कार्रवाई नहीं हुई तो मीरा ने 28 जुलाई को आईजी से मिली। आईजी ने कुशीनगर पुलिस से आख्या मांगी है।
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उन्होंने स्पष्ट कहा कि फरियाद लेकर पहुंची पीड़ित के साथ मनमानी करने वाले अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। शनिवार शाम को वरिष्ठ सपा नेता नथुनी कुशवाहा मीरा के घर पहुंचे और उससे पूरे प्रकरण की जानकारी ली। नथुनी ने फोन से प्रकरण पर डीएम से वार्ता की और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी जानकारी दी। उन्होंने मीरा कुशवाहा के शिकायती पत्रों व जमीनी विवाद से संबंधित कागजात लिए और स्वयं मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने मामले में एसडीएम की कार्रवाई की भर्त्सना करते हुए इसे प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने वाला कृत्य बताया है।
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जमानत में अटकाए रोड़े
30 जुलाई को वकील संग एसडीएम से मिलने पहुंची मीरा को शांतिभंग की आशंका में जेल भेज दिया गया। आमतौर पर ऐसे मामलों में 24 से 48 घंटे में जमानत मिल जाती है, लेकिन मीरा की जमानत अर्जी एक हफ्ते बाद भी मंजूर नहीं की गई। इसके पीछे वकील मीरा कुशवाहा के प्रति एसडीएम की नाराजगी को कारण ठहरा रहे हैं। इतना ही नहीं एसडीएम खड्डा ने मीरा की जमानत के लिए तृतीय श्रेणी के राज्य कर्मचारी को बतौर जमानतदार पेश करने की शर्त रख दी। इस बीच मीरा के परिजन डीएम के पास पहुंचे और जमानत अर्जी मंजूर कराने के लिए कार्रवाई करने की गुहार लगाई।
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वकीलों ने बताया नैसर्गिक न्याय का हनन
12 अगस्त को मीरा की खड्डा एसडीएम कोर्ट में पेशी पर जेल प्रशासन ने एक पत्र भी पेश किया। इसमें उल्लेख था कि शांतिभंग की आशंका में आरोपी को सात दिन से अधिक जेल में नहीं रखा जा सकता है। पत्र को आधार बनाकर वकीलों ने दबाव बनाया तो एसडीएम ने 50-50 हजार के दो बांड भराकर मीरा को जमानत दे दी। मीरा प्रकरण समेत कुछ अन्य मामलों को लेकर खड्डा तहसील बार एसोसिएशन ने एक सप्ताह से एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर रखा है। डीएम से एसडीएम व उनके पेशकार के स्थानांतरण की मांग भी की है। वकीलों का आरोप है कि मीरा के मामले में नैसर्गिक न्याय के हक का हनन हुआ है।
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मां की ममता पर भारी पड़े 14 दिन
मीरा को जेल भेजते वक्त उसकी गोद से छह माह का बेटा छीन लिया गया। हफ्ते भर मां से दूर रहने के बाद दुधमुंहा बीमार पड़ गया। तब उसका इलाज कराने के बाद घरवाले डीएम से गुहार लगाने पहुंचे। वहीं जेल में बेटे की जुदाई में एक दिन बाद ही मीरा बीमार पड़ गई। रविवार को आपबीती बताते हुए मीरा रो पड़ी। बकौल मीरा 30 जुलाई की देर रात जेल पहुंची तो बिना खाना-पानी के पूरी रात बैठकर बितानी पड़ी। अगले दिन बैरक में बंद कुल 107 महिला कैदियों का जूठन फेंकवाया गया। नाली भी साफ करनी पड़ी। दूसरे दिन ही तेज बुखार हो गया। पांच दिन तक तेज बुखार से तपती रही। खाना बेहद खराब था। लेकिन शिकायत पर महिला बंदी रक्षक पिटाई करती थीं।
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तीन साल पुराना है जमीन विवाद
खड्डा के गांव हथिया के गोबरी कुशवाहा की चार बेटियों में दूसरी मीरा महराजगंज में ब्याही है। पति विदेश में हैं। मीरा मायके में मां-बाप की सेवा करती है और गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। करीब तीन साल पहले पड़ोसियों ने घारी की जमीन पर छप्पर डालकर कब्जा कर लिया। अनशन किया तो कब्जा हट गया, लेकिन जमीन पर वह काबिज न हो सकी। फरियाद कर हारी मीरा ने आत्मदाह की चेतावनी देने के बाद एसडीएम कार्यालय के सामने खुद पर मिट्टी का तेल गिरा लिया। हालांकि, समय रहते पहुंचे पुलिसवालों ने उसे बचा लिया। कुछ दिन बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। मीरा ने पिटाई कर बाल काटने का आरोप लगाया।
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सीएमओ में पहले भी हो चुकी है शिकायत
बकौल मीरा वह 12 मई की शाम को डीएम के निर्देश पर एसडीएम खड्डा से मिलने उनके कार्यालय में पहुंची थी। एसडीएम व एक अन्य राजस्व अधिकारी ने मामले के निस्तारण के लिए एक लाख रुपये मांगे। रिश्वत न दी तो मनमानी का प्रयास किया। इसमें बेटा गोद से गिरकर चोटिल हो गया था। खड्डा थाने पहुंची तो बिना कार्रवाई के ही लौटा दिया गया। जन सुनवाई कार्यक्रम में सीएम से इसकी शिकायत की तो विशेष सचिव प्रांजल यादव ने 24 जून को कमिश्नर व एसपी कुशीनगर को कार्रवाई का निर्देश दिया था। कार्रवाई नहीं हुई तो मीरा ने 28 जुलाई को आईजी से मिली। आईजी ने कुशीनगर पुलिस से आख्या मांगी है।