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ठंड में हृदय रोग के मरीजों की बढ़ी मुश्किल, जिले में सिर्फ एक विशेषज्ञ

Sun, 02 Jan 2022 11:03 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 11:03 PM IST
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hart patient was in problam from cold
ठंड में हृदय रोग के मरीजों की बढ़ी मुश्किल, जिले में सिर्फ एक विशेषज्ञ
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- जिला अस्पताल में रिक्त है हृदय रोग विशेषज्ञ का पद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले में अब शीतलहर शुरू हो गई है, स्वस्थ लोग भी घरों में दुबक जा रह रहे हैं। ऐसे में हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, दमा के रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। कारण जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सीएमओ के अधीन आने वाले अस्पतालों में सिर्फ एक डॉक्टर ही तैनात हैं, जबकि एक निजी डॉक्टर उपलब्ध हैं। ऐसे में इस कड़ाके की ठंड में हालत बिगड़ जाए तो इलाज बड़ा मुश्किल होगा।
जनपद में चिकित्सकीय संसाधनों में निरंतर वृद्धि हो रही है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 37 पद स्वीकृत हैं, जिसमें एक पद हृदय रोग विशेषज्ञ का भी है, लेकिन अब तक यहां किसी हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। अलबत्ता सीएमओ के अधीन आने वाले पडरौना नगर के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में एक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सुमन तैनात हैं। निजी डॉक्टर के रूप में भी एक ही उपलब्ध हैं। ऐसे में थोड़ी सी असावधानी से मरीजों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है।
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ठंड में बढ़ जाता है हार्टअटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
पडरौना के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार बताते हैं कि कड़ाके की ठंड में शरीर की धमनियां सिकुड़ने लगती है। इससे हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसकी पहचान सीने में दर्द होना है। बांह, गले, जबड़े या पीठ में दर्द होता है। सांस लेने में तकलीफ होती है। चक्कर आना, घबराहट, गिर जाना इसके लक्षण होते हैं। इसके अलावा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। इसे सेरिब्रोवैक्सुकलर एक्सीडेंट कहा जाता है। ऐसी दशा में ब्रेनहैमरेज हो सकता है। स्ट्रोक शरीर के किसी एक हिस्से में हो सकता है। ब्रेन की नस फट सकती है। कोई एक अंग या शरीर का कोई एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो सकता है। इसकी पहचान यह है कि मरीज की आवाज नहीं आती है या आवाज लड़खड़ाने लगती है। वह बेहोश हो सकता है या सिर में दर्द होता है।
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अस्थमा के रोगियों की देखभाल भी जरूरी
शीतलहर में अस्थमा के रोगियों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। दमा के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। श्वांस संबंधी बीमारियों के मरीजों को अपनी दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए। यदि किसी तरह की परेशानी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। श्वांस रोगियों को पुआल या हरी लकड़ियों की अलाव के पास नहीं बैठना चाहिए। अत्यधिक धुआं नुकसान पहुंचा सकता है।
ब्लड प्रेशर, थायराइड और शुगर के मरीज भी रहें सतर्क
डॉक्टरों के मुताबिक ठंड में शुगर बढ़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। क्योंकि जाड़े में खून गाढ़ा होने के कारण धमनियां सिकुड़ने लगती हैं। इसलिए दवाइयों का सेवन कतई बंद न करें। कोई परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ. संजीव सुमन बोले
पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में तैनात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सुमन बताते हैं कि इस मौसम में हृदय और शरीर की नसें सिकुड़ती हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। शुगर भी बढ़ सकता है। हार्टअटैक का एक प्रमुख कारण सांस लेने में परेशानी भी होती है। इन समस्याओं से बचने के लिए ब्लड प्रेशर, थायराइड, श्वांस संबंधी बीमारी की दवा नियमित लेते रहें। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी परेशानी हो तो चिकित्सक से मिलकर परामर्श लें। इसी तरह धड़कन बढ़ जाए, चलने-फिरने, सीने में दर्द, सीने में जलन या सीना भारी महसूस हो तो गैस की बीमारी न समझकर डॉक्टर से मिलें। यह हार्टअटैक का दर्द हो सकता है।

सीएमओ बोले
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया का कहना है कि उनके अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में हृदय रोग के सिर्फ एक डॉक्टर हैं। उन्हें पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय में तैनात किया गया है। अन्य अस्पतालों में फिजिशियन ही ऐसे मरीजों का उपचार करते हैं।
सीएमएस बोले
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके वर्मा ने कहा कि यहां कोई हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। यहां आने वाले मरीजों के इलाज फिजिशियन ही करते हैं।
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