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खुशियों वाले घरों में गूूंज रही सिसकियां
कुशीनगर
Updated Tue, 12 Apr 2016 11:29 PM IST
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आग की चपेट में आने से अपना घर गंवा दिए
- फोटो : अमर उजाला
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नवीन पांडेय
जटहां बाजार। आग की चपेट में आकर अपना सब कुछ गंवाने वाले लोगों की रात की नींद गायब हो गई है। जिन घरों में शादी की ठिठोलियां गूंज रही थीं आज वहां सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
ऐसे में लोगों को परिवार के भरण पोषण की चिंता सता रही है। अभी कुछ लोगों की सहायता से किसी तरह से पेट की आग तो बुझ जा रही है, लेकिन आग की लपटों ने जो लोगों के जीवन में आग लगाई है उसे बुझा पाना काफी मुश्किल लग रहा है।
नौ अप्रैल की दोपहर में पुरनहां गांव के कटहरिया टोले में चाय बनाते वक्त लगी आग में 35 घर जल गए थे, लेकिन यहां पर सिर्फ घर ही नहीं कई लोगों के अरमान भी आग की भेंट चढ़ गए। गांव की दो बेटियों की शादी तय है, लेकिन आग ने उनके घरों में ऐसा घाव छोड़ा कि अब उनके हाथ पीले करने की व्यवस्था को लेकर परिवार चिंतिंत हैं। प्रशासन की ओर से दी गई राहत नाकाफी साबित हो रही है।
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इस टोले में मकान के नाम पर मात्र तीन घर ही बचे हैं। बाकी सभी लोग खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक तानकर गुजर-बसर कर रहे हैं। दिन में तेज धूप से बचने के लिए लोग बगीचों में पेड़ों की छांव का सहारा लेने को विवश है। विशुनपुरा ब्लॉक के पुरनहां गांव के कटहरिया टोले में लगी आग से पूरी तरह तबाह हो चुके प्रत्येक परिवारों को प्रशासन ने पिछले रविवार को 7900 रुपये का चेक देकर सरकारी सहायता का मरहम लगा दिया।
ग्राम प्रधान की सहायता से लोग अभी अपने पेट की भूख तो शांत कर ले रहे हैं, लेकिन उनकी असली चिंता का समाधान किसी के पास नहीं है। आग की चपेट में आने से अपना घर गंवा चुके बदरी कुशवाहा की लड़की सरिता की शादी 26 अप्रैल को तय है।
मंगलवार को उन्होंने बताया कि 18 अप्रैल को तिलक लेकर जाना था। तिलक के सामानों से लेकर बारात के स्वागत तक की सभी तैयारियां पूरी हो गईं थी, लेकिन आग ने सब कुछ तबाह कर दिया। सभी गहने, सामान और 50 हजार रुपये नकद आग की भेंट चढ़ गए। यह सब बताते हुए उनकी आंखें भर जाती हैं। हालांकि लोगों और रिश्तेदारों के सहयोग से बेटी की शादी का तय तिथि पर ही करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कही से इंतजाम नहीं हुआ तो जो थोड़ा खेत है उसे बंधक रखकर भी अपनी बेटी के हाथ पीले करेंगे।
इसी गांव के रमाशंकर कुशवाहा की बेटी बबिता की भी शादी अगले महीने 12 मई को होनी है। शादी के साथ ही बेटी की विदाई भी होनी थी। इसलिए उन्होंने विदाई के लिए फर्नीचर, कपडे़, जेवर, नकदी आदि पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन आग से सब कुछ तबाह हो गया। उनका कहना है कि अब शादी कैसे होगी, अभी यह समझ में नहीं आ रहा है। आग में जले घरों में से एक घर सुनीता देवी का है।
इनके पति जनार्दन इस वक्त विदेश में हैं। सुनीता देवी का कहना है कि घर में जो कुछ भी था आग में जलकर नष्ट हो गया। पति घर पर हैं नहीं। उनके पास खेत भी नहीं है। ऐसे में तीन बच्चों के साथ खुद की परवरिश मुश्किल हो गई है। अब लोगाें की सहायता का ही आसरा है। इस गर्मी में टेंट में कैसे दिन कट रही हैं यह कहा नहीं जा सकता। इसी गांव की सलहंती का भी आग में सब कुछ जल कर खत्म हो चुका है।
घर के पास वाली खेत में लगी 10 कट्ठा गेहूं की फसल भी घर के साथ जल गई। इनका कहना है कि बेटे नंदलाल के एमएससी में नामांकन के लिए घर में रखे नकद रुपये और मॉर्कशीट भी जल गई। अब खाने के लाले पड़ गए हैं। इस संबंध में तहसीलदार सदर नरेश चंद्र का कहना है कि प्रशासन की तरफ से राहत के तौर पर केवल चेक ही देने की व्यवस्था है, जो दिया जा चुका है।
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जटहां बाजार। आग की चपेट में आकर अपना सब कुछ गंवाने वाले लोगों की रात की नींद गायब हो गई है। जिन घरों में शादी की ठिठोलियां गूंज रही थीं आज वहां सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
ऐसे में लोगों को परिवार के भरण पोषण की चिंता सता रही है। अभी कुछ लोगों की सहायता से किसी तरह से पेट की आग तो बुझ जा रही है, लेकिन आग की लपटों ने जो लोगों के जीवन में आग लगाई है उसे बुझा पाना काफी मुश्किल लग रहा है।
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नौ अप्रैल की दोपहर में पुरनहां गांव के कटहरिया टोले में चाय बनाते वक्त लगी आग में 35 घर जल गए थे, लेकिन यहां पर सिर्फ घर ही नहीं कई लोगों के अरमान भी आग की भेंट चढ़ गए। गांव की दो बेटियों की शादी तय है, लेकिन आग ने उनके घरों में ऐसा घाव छोड़ा कि अब उनके हाथ पीले करने की व्यवस्था को लेकर परिवार चिंतिंत हैं। प्रशासन की ओर से दी गई राहत नाकाफी साबित हो रही है।
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इस टोले में मकान के नाम पर मात्र तीन घर ही बचे हैं। बाकी सभी लोग खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक तानकर गुजर-बसर कर रहे हैं। दिन में तेज धूप से बचने के लिए लोग बगीचों में पेड़ों की छांव का सहारा लेने को विवश है। विशुनपुरा ब्लॉक के पुरनहां गांव के कटहरिया टोले में लगी आग से पूरी तरह तबाह हो चुके प्रत्येक परिवारों को प्रशासन ने पिछले रविवार को 7900 रुपये का चेक देकर सरकारी सहायता का मरहम लगा दिया।
ग्राम प्रधान की सहायता से लोग अभी अपने पेट की भूख तो शांत कर ले रहे हैं, लेकिन उनकी असली चिंता का समाधान किसी के पास नहीं है। आग की चपेट में आने से अपना घर गंवा चुके बदरी कुशवाहा की लड़की सरिता की शादी 26 अप्रैल को तय है।
मंगलवार को उन्होंने बताया कि 18 अप्रैल को तिलक लेकर जाना था। तिलक के सामानों से लेकर बारात के स्वागत तक की सभी तैयारियां पूरी हो गईं थी, लेकिन आग ने सब कुछ तबाह कर दिया। सभी गहने, सामान और 50 हजार रुपये नकद आग की भेंट चढ़ गए। यह सब बताते हुए उनकी आंखें भर जाती हैं। हालांकि लोगों और रिश्तेदारों के सहयोग से बेटी की शादी का तय तिथि पर ही करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कही से इंतजाम नहीं हुआ तो जो थोड़ा खेत है उसे बंधक रखकर भी अपनी बेटी के हाथ पीले करेंगे।
इसी गांव के रमाशंकर कुशवाहा की बेटी बबिता की भी शादी अगले महीने 12 मई को होनी है। शादी के साथ ही बेटी की विदाई भी होनी थी। इसलिए उन्होंने विदाई के लिए फर्नीचर, कपडे़, जेवर, नकदी आदि पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन आग से सब कुछ तबाह हो गया। उनका कहना है कि अब शादी कैसे होगी, अभी यह समझ में नहीं आ रहा है। आग में जले घरों में से एक घर सुनीता देवी का है।
इनके पति जनार्दन इस वक्त विदेश में हैं। सुनीता देवी का कहना है कि घर में जो कुछ भी था आग में जलकर नष्ट हो गया। पति घर पर हैं नहीं। उनके पास खेत भी नहीं है। ऐसे में तीन बच्चों के साथ खुद की परवरिश मुश्किल हो गई है। अब लोगाें की सहायता का ही आसरा है। इस गर्मी में टेंट में कैसे दिन कट रही हैं यह कहा नहीं जा सकता। इसी गांव की सलहंती का भी आग में सब कुछ जल कर खत्म हो चुका है।
घर के पास वाली खेत में लगी 10 कट्ठा गेहूं की फसल भी घर के साथ जल गई। इनका कहना है कि बेटे नंदलाल के एमएससी में नामांकन के लिए घर में रखे नकद रुपये और मॉर्कशीट भी जल गई। अब खाने के लाले पड़ गए हैं। इस संबंध में तहसीलदार सदर नरेश चंद्र का कहना है कि प्रशासन की तरफ से राहत के तौर पर केवल चेक ही देने की व्यवस्था है, जो दिया जा चुका है।