{"_id":"6a29d5840f1eaccebb0bbcb4","slug":"happiness-turned-into-mourning-three-bodies-were-raised-together-kushinagar-news-c-205-1-ksh1049-161537-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: मातम में बदलीं खुशियां एकसाथ उठीं तीन अर्थियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: मातम में बदलीं खुशियां एकसाथ उठीं तीन अर्थियां
Thu, 11 Jun 2026 02:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जोकवा बाजार। जिस घर में बेटे के मुंडन और जनेऊ संस्कार की मंगल गूंज सुनाई देने वाली थी, वहां बुधवार को सिर्फ चीख-पुकार और मातम से सन्नाटा पसरा हुआ था। बाबा धाम से लौटते समय हुए एक सड़क हादसे में गड़हियां वार्ड नंबर-12 निवासी उपेंद्र सिंह का हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। बुधवार को जब एक ही दरवाजे से मां, बेटे और दो वर्षीय मासूम की अर्थी एक साथ निकली, तो पूरा गांव के लोग रो पड़े। गड़हियां गांव में बुधवार का सूरज खुशियां नहीं, बल्कि जिंदगी के लिए गहरा गम लेकर आया। हादसे में जान गंवाने वाले उपेंद्र सिंह (40), उनकी मां फूलमती देवी (65) और महज दो वर्ष की मासूम इशिता के शव जैसे ही गांव पहुंचे, परिजनों के चित्कार हर किसी की आंखें भर आईं।
मृतक उपेंद्र सिंह तीन भाइयों में मझले थे। इनके बड़े भाई जितेंद्र सिंह गांव में ही खेती करते हैं, जबकि छोटा भाई विदेश में नौकरी करता है। उपेंद्र पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ बेटे का मुंडन कराने बाबाधाम गए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। किसी ने पता नहीं था कि बाबा के दर पर मत्था टेकने जा रहा यह परिवार अब वापस हंसता-खेलता नहीं लौटेगा।
बुधवार को जब एक ही घर से तीन अर्थियां उठे, तो लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। खासकर दो साल की मासूम इशिता की छोटी सी अर्थी को देखकर मौजूद हर शख्स के दिल को झकझोर रहा था। गांव की गलियों में सिर्फ सन्नाटा, बेबसी के आंसू और मातम पसरा रहा।र
विज्ञापन
विज्ञापन
मृतक उपेंद्र सिंह तीन भाइयों में मझले थे। इनके बड़े भाई जितेंद्र सिंह गांव में ही खेती करते हैं, जबकि छोटा भाई विदेश में नौकरी करता है। उपेंद्र पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ बेटे का मुंडन कराने बाबाधाम गए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। किसी ने पता नहीं था कि बाबा के दर पर मत्था टेकने जा रहा यह परिवार अब वापस हंसता-खेलता नहीं लौटेगा।
विज्ञापन
बुधवार को जब एक ही घर से तीन अर्थियां उठे, तो लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। खासकर दो साल की मासूम इशिता की छोटी सी अर्थी को देखकर मौजूद हर शख्स के दिल को झकझोर रहा था। गांव की गलियों में सिर्फ सन्नाटा, बेबसी के आंसू और मातम पसरा रहा।र
विज्ञापन