तीन घंटे की मशक्कत के बाद खुला पिंजड़े का फाटक
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तुर्कपट्टी। थाना क्षेत्र के बसडीला पांडेय गांव में पांच दिन से आतंक का पर्याय बने तेंदुआ ने रविवार को एक बछड़े को मार दिया। सुबह इसकी जानकारी होने पर भयभीत लोगों ने वन विभाग के अफसरों को फोन पर सूचना देते हुए तेंदुआ पकड़ने का प्रबंध न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इसके कुछ देर बाद पिंजड़ा लेकर पहुंचे वन कर्मियों ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद उसे एक खेत में रखवाया। गोरखपुर और महराजगंज के कुछ वन कर्मियों के साथ डीएफओ व अन्य अफसर मौके पर डटे रहे।
बृहस्पतिवार को तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के बसडीला पांडेय, रावतपार, महासोंन, बेलवा, तेंदुआ, अमवा दुबे, बरवा सुकदेव गांव के बीच स्थित चंवर में तेंदुआ देखे जाने की बात कही गई थी। इस जानवर ने बसडीला पांडेय निवासी विवेक सिंह और वनकर्मी राजकिशोर मिश्रा को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। शुक्रवार की रात में यह तेंदुआ बसडीला पांडेय गांव की आबादी में दिखा। शनिवार को दिन भर तेंदुआ नहीं दिखा तो शाम को वन विभाग की टीम उसके यहां से चले जाने की बात कहते हुए लौट गई। रविवार की देर रात तेंदुआ बगल के गांव रावतपार के निकट दिखा। रात को उसने छुट्टा घूम रहे एक बछड़े को मार डाला। सोमवार की सुबह इसकी जानकारी होने पर भयभीत लोगों ने डीएफओ वेदप्रकाश जायसवाल को इसकी जानकारी दी।
लोगों ने तेंदुआ पकड़ने का प्रबंध नहीं किए जाने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी। इसके बाद रेंजर और अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे। गोरखपुर से मंगाया गया पिजड़ा भी आ गया, लेकिन एक नई समस्या यह आ गई कि इस पिंजड़े का दरवाजा ही नहीं खुल रहा था। करीब तीन घंटे तक प्रयास के बाद फाटक खुला। इसके बाद उसमें एक बकरी बांधकर गन्ने के खेत में रखवाया गया। पिंजड़े को घास-फूस से ढकने के बाद डीएफओ समेत अन्य वनकर्मी गांव में बैठकर तेंदुआ के बाहर आने का इंतजार करते रहे।