Kushinagar News: डोल जुलूस पर फेंका कचरा, 18 गांवों ने रोका; दो समुदाय आमने-सामने; 106 वर्ष से चल रही परंपरा
मंगलवार को दिन के करीब 11 बजे से रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना गांव से डोल जुलूस निकाला गया। काली मंदिर से जुलूस भ्रमण कर वापस गांव में लौट रहा था। तभी गांव के एक घर के समीप डीजे की गाड़ी फंस गई और इसी दौरान जुलूस पर किसी ने कचरा फेंक दिया। इसकी जानकारी होते ही जुलूस में साथ चल रहे लोग आक्रोशित हो उठे। जुलूस को रोक दिया गया।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मिश्रौली समेत 18 गांवों से मंगलवार को निकले डोल जुलूस पर सोहरौना में एक पक्ष की ओर से कचरा फेंक दिया गया। इससे मौके पर दो समुदाय आमने-सामने आ गए। सूचना पाकर मौके पर एडिशनल एसपी समेत कई थानों की पुलिस फोर्स पहुंच गई।
एहतियात के तौर पर गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। उधर, डोल जुलूस पर कचरा फेंके जाने की जानकारी के बाद 18 गांवों से निकले 35 से अधिक डोल जुलूस को रोक दिया गया। मामले की गंभीरता को देख पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत चार लोगों को हिरासत में ले लिया है।
मंगलवार को दिन के करीब 11 बजे से रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना गांव से डोल जुलूस निकाला गया। काली मंदिर से जुलूस भ्रमण कर वापस गांव में लौट रहा था। तभी गांव के एक घर के समीप डीजे की गाड़ी फंस गई और इसी दौरान जुलूस पर किसी ने कचरा फेंक दिया।
इसकी जानकारी होते ही जुलूस में साथ चल रहे लोग आक्रोशित हो उठे। इसके बाद लोगों ने जुलूस को रोक दिया। इसकी जानकारी होते ही मौके पर भारी पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया। सूचना मिलने पर पहुंचे एडिशनल एसपी रितेश कुमार सिंह, एएसपी अभिनव त्यागी,
इस दौरान लोगों ने ग्राम प्रधान समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत चार लोगों को हिरासत में केस दर्ज कर लिया। कार्रवाई के बाद एक पक्ष के लोगों ने यह कहकर मना कर दिया कि अब जिस रास्ते पर डोल जुलूस रुका है, उसी रास्ते से डोल ले जाया जाएगा।
हालांकि, प्रशासनिक अफसरों ने किसी भी नई परम्परा अथवा नए रास्ते से जुलूस ले जाने की मनाही का हवाला भी दिया। वहीं, दूसरी तरफ इस बात की जानकारी जैसे ही अन्य गांव के लोगों को हुई तो।मिश्रौली क्षेत्र के 18 गांवों से निकलने वाले 35 से अधिक डोल को भी गांव वालों ने रोक दिया।
मामला बढ़ता देख एडिशनल एसपी रितेश कुमार सिंह व अभिनव त्यागी ने कई दौर की वार्ता की। मगर, यह वार्ता भी बेनतीजा रहा। शाम 4.30 बजे तक प्रशासनिक अफसरों व लोगों के बीच वार्ता चल रही थी।
106 वर्ष पुरानी है परंपरा
जन्माष्टमी का त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1918 में स्वर राधा रमण सिंह ने की थी। तभी से जन्मोत्सव कार्यक्रम के बाद अगली सुबह डोल जुलूस निकाला जाता है। इसमें घारी वार्ड, चनुकी मोड़, पिपरा चौराहा सहित 24 से अधिक स्थानों पर रखे डोल मेले में आते हैं।
सभी मुख्य चौराहा से एकत्रित होकर धीरे धीरे गाजे बाजे और जय श्रीकृष्ण के जय घोष करते हुए आगे बढ़ते हैं। भगवान की मनोरम झांकी भी प्रस्तुत करते हैं। इस दौरान घरों की छतों से लोग फूल बरसा डोल जुलूस का स्वागत करते हैं। शाम को सभी डोल कतारबद्ध तरीके से स्वर राधा रमण सिंह के दरवाजे पर पहुंचता है, जहां उनके परिजनों द्वारा भगवान की आरती कर समापन किया जाता है।
इस दौरान दरवाजे पर पहुंचे लोगों को जलपान कराया जाता है। इसके अलावा बेहतर झांकी प्रदर्शन पर पुरस्कृत किया जाता है।