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Kushinagar News: गंडक का जलस्तर घटा, दहशत बरकरार
Sat, 13 Sep 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:10 AM IST
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नरवाजोत में कटान करती गंडक नदी। संवाद
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह 1.04 लाख क्यूसेक रहा। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ डिस्चार्ज में धीरे-धीरे कमी आने लगी, जिससे नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है। नदी की धारा बीच में चले जाने से फिलहाल बांध पर किसी प्रकार का कोई खतरा नही है।
एक सप्ताह पहले तक पिपराघाट स्थित नरवाजोत एक्सटेंशन के पास का किमी 0.500 से किमी 1.000 के बीच का 500 मीटर का हिस्सा करीब 20 से 25 दिन तक गंडक नदी के कटान के जद में रहा है। यहां नदी कटान करती हुई बांध को काफी क्षतिग्रस्त करने के साथ नदी के किनारे करीब 40 से 50 एकड़ से अधिक भूमि में खड़ी धान व गन्ने की फसल भी कटान कर ली थी। किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था, जबकि बांध को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड के अभियंताओं को दिन रात एक करनी पड़ी थी। पहली सितंबर के बाद नदी के तेवर में नरमी आने के बाद नदी की धारा बांध से दूर हो कर बहने लगी थी। नदी का डिस्चार्ज भी धीरे-धीरे कम हो कर 65000 क्यूसेक तक पहुंच गया था, जिससे अभियंताओं के साथ बांध के किनारे बसे नरवाजोत, मोतीराय टोला, भंगी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला आदि गांव के लोगों को राहत मिल गई थी।
करीब दस दिन बाद बृहस्पतिवार की सुबह अचानक नदी का डिस्चार्ज बढ़ कर 1.02 लाख क्युसेक हो गया। शुक्रवार को सुबह नदी का डिस्चार्ज 1.04 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। हालांकि बाद में डिस्चार्ज में धीरे-धीरे कमी आने लगी। क्षेत्र के प्रताप सिंह, प्रभु गुप्ता, रामप्रसाद सिंह, ध्रुव निषाद आदि का कहना है कि फिलहाल नदी का बहाव बीच में होने से बांध से खतरा टल चुका है।
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फसलों का कटान भी थम गया है, लेकिन इन लोगों को आशंका है कि यदि नदी के डिस्चार्ज मे वृद्धि होती है तो बांध के साथ फसलों पर भी खतरा बढ़ सकता है। इस संबंध में एसडीओ दीपरतन सिंह ने बताया कि बांध के किसी हिस्से में पानी दबाव नहीं है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है। एहतियात के तौर पर चौकसी बरती जा रही है।
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एक सप्ताह पहले तक पिपराघाट स्थित नरवाजोत एक्सटेंशन के पास का किमी 0.500 से किमी 1.000 के बीच का 500 मीटर का हिस्सा करीब 20 से 25 दिन तक गंडक नदी के कटान के जद में रहा है। यहां नदी कटान करती हुई बांध को काफी क्षतिग्रस्त करने के साथ नदी के किनारे करीब 40 से 50 एकड़ से अधिक भूमि में खड़ी धान व गन्ने की फसल भी कटान कर ली थी। किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था, जबकि बांध को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड के अभियंताओं को दिन रात एक करनी पड़ी थी। पहली सितंबर के बाद नदी के तेवर में नरमी आने के बाद नदी की धारा बांध से दूर हो कर बहने लगी थी। नदी का डिस्चार्ज भी धीरे-धीरे कम हो कर 65000 क्यूसेक तक पहुंच गया था, जिससे अभियंताओं के साथ बांध के किनारे बसे नरवाजोत, मोतीराय टोला, भंगी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला आदि गांव के लोगों को राहत मिल गई थी।
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करीब दस दिन बाद बृहस्पतिवार की सुबह अचानक नदी का डिस्चार्ज बढ़ कर 1.02 लाख क्युसेक हो गया। शुक्रवार को सुबह नदी का डिस्चार्ज 1.04 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। हालांकि बाद में डिस्चार्ज में धीरे-धीरे कमी आने लगी। क्षेत्र के प्रताप सिंह, प्रभु गुप्ता, रामप्रसाद सिंह, ध्रुव निषाद आदि का कहना है कि फिलहाल नदी का बहाव बीच में होने से बांध से खतरा टल चुका है।
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फसलों का कटान भी थम गया है, लेकिन इन लोगों को आशंका है कि यदि नदी के डिस्चार्ज मे वृद्धि होती है तो बांध के साथ फसलों पर भी खतरा बढ़ सकता है। इस संबंध में एसडीओ दीपरतन सिंह ने बताया कि बांध के किसी हिस्से में पानी दबाव नहीं है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है। एहतियात के तौर पर चौकसी बरती जा रही है।