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गंडक का पानी घटा, चौकस बरकरार
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प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेतीं एसडीएम भावना सिंह व नायब तहसीलदार रवि यादव।संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
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गंडक का पानी घटा, चौकस बरकरार
पडरौना/खड्डा। पांच दिन बाद रविवार को गंडक नदी के जलस्तर में काफी कमी आ गई। बहाव (डिस्चार्ज) में पौने दो लाख क्यूसेक की कमी आने के बाद गंडक नदी चेतावनी बिंदु से 27 सेंटीमीटर नीचे चली गई है। इससे गंडक नदी के आस-पास के गांवों में निवास करने वाले लोगों और जिला प्रशासन ने राहत महसूस की। हालांकि, गंडक नदी के पिछले दिनों के रुख को देखते हुए जिला प्रशासन चौकसी बनाए हुए है।
इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर बैराज से रविवार की शाम छह बजे गंडक नदी में 90,600 (नब्बे हजार छह सौ) क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि पांच दिन पूर्व 29 जून को 2,67,200 (दो लाख सरसठ हजार) क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। उस दिन जलस्तर चेतावनी बिंदु से 87 सेमी ऊपर 95.87 सेंटीमीटर तक चला गया था। उस दिन गंडक नदी खतरे के लाल निशान 96.00 मीटर से मात्र 23 सेंटीमीटर नीचे रह गई थी। पांच दिन बाद रविवार को राहत की बात यह रही कि भैसहां गेज स्थल पर नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 95.00 मीटर से नीचे 94.73 मीटर पर आ गया।
गंडक नदी के जलस्तर में कमी आने से बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों के लोगों को बाढ़ से फिलहाल राहत मिली है।
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इधर,प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए व लोगों को राहत प्रदान करने के लिए 400 पैकेट राहत सामग्री का किट सुरक्षित करके रख लिया है। एसडीएम भावना सिंह व नायब तहसीलदार रवि यादव लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों व नदी के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। राजस्व कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग सहित कई विभागों को समंवय के साथ आपदा के समय निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
डीएस एस. राजलिंगम ने बताया कि बैराज से हो रहे डिस्चार्ज की नियमित निगरानी की जा रही है। जनपद में 164 बाढ़ प्रभावित गांव चिह्नित किए गए हैं। बाढ़ से पहले ही राहत शिविरों और बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कंट्रोल रूम स्थापित हो गया है। पिछले साल 2800 राहत पैकेट बांटे गए थे, लेकिन इस साल वैसे हालात अभी नहीं हैं, फिर भी राहत सामग्री के 400 पैकेट तैयार कर लिए गए हैं। इसके अलावा पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग को सतर्क कर दिया गया है। एसडीआरएफ की टीम को खड्डा क्षेत्र में निगरानी के लिए कहा गया है। इसके अलावा प्रत्येक बांध पर बाढ़-खंड के एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है।
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पडरौना/खड्डा। पांच दिन बाद रविवार को गंडक नदी के जलस्तर में काफी कमी आ गई। बहाव (डिस्चार्ज) में पौने दो लाख क्यूसेक की कमी आने के बाद गंडक नदी चेतावनी बिंदु से 27 सेंटीमीटर नीचे चली गई है। इससे गंडक नदी के आस-पास के गांवों में निवास करने वाले लोगों और जिला प्रशासन ने राहत महसूस की। हालांकि, गंडक नदी के पिछले दिनों के रुख को देखते हुए जिला प्रशासन चौकसी बनाए हुए है।
इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर बैराज से रविवार की शाम छह बजे गंडक नदी में 90,600 (नब्बे हजार छह सौ) क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि पांच दिन पूर्व 29 जून को 2,67,200 (दो लाख सरसठ हजार) क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। उस दिन जलस्तर चेतावनी बिंदु से 87 सेमी ऊपर 95.87 सेंटीमीटर तक चला गया था। उस दिन गंडक नदी खतरे के लाल निशान 96.00 मीटर से मात्र 23 सेंटीमीटर नीचे रह गई थी। पांच दिन बाद रविवार को राहत की बात यह रही कि भैसहां गेज स्थल पर नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 95.00 मीटर से नीचे 94.73 मीटर पर आ गया।
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गंडक नदी के जलस्तर में कमी आने से बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों के लोगों को बाढ़ से फिलहाल राहत मिली है।
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इधर,प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए व लोगों को राहत प्रदान करने के लिए 400 पैकेट राहत सामग्री का किट सुरक्षित करके रख लिया है। एसडीएम भावना सिंह व नायब तहसीलदार रवि यादव लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों व नदी के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। राजस्व कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग सहित कई विभागों को समंवय के साथ आपदा के समय निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
डीएस एस. राजलिंगम ने बताया कि बैराज से हो रहे डिस्चार्ज की नियमित निगरानी की जा रही है। जनपद में 164 बाढ़ प्रभावित गांव चिह्नित किए गए हैं। बाढ़ से पहले ही राहत शिविरों और बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कंट्रोल रूम स्थापित हो गया है। पिछले साल 2800 राहत पैकेट बांटे गए थे, लेकिन इस साल वैसे हालात अभी नहीं हैं, फिर भी राहत सामग्री के 400 पैकेट तैयार कर लिए गए हैं। इसके अलावा पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग को सतर्क कर दिया गया है। एसडीआरएफ की टीम को खड्डा क्षेत्र में निगरानी के लिए कहा गया है। इसके अलावा प्रत्येक बांध पर बाढ़-खंड के एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है।