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चेतावनी बिंदु के करीब पहुंची बड़ी गंडक

Sat, 16 Jul 2016 11:18 PM IST
kushinagar
kushinagar Updated Sat, 16 Jul 2016 11:18 PM IST
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gandak reached warning level
बाढ़ - फोटो : santosh verma
खड्डा। बड़ी गंडक के जलस्तर में आंशिक वृद्धि होने से नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। शनिवार को सुबह आठ बजे भैंसहां गेज पर जलस्तर 94.87 मीटर पर था, जो बढ़कर 94.97 मीटर पर पहुंच गया। इससे ज्वालापुर और करमहवा में फसल के साथ-साथ खेतों का भी कटान हो रहा है। सर्वाधिक नुकसान केले की फसल को हुआ है। नदी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गई है।
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शुक्रवार की शाम चार बजे वाल्मीकिनगर बैराज पर नदी का डिस्चार्ज 1.16 लाख क्यूसेक था, जो शनिवार की सुबह आठ बजे 1.26 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। दोपहर एक बजे बड़ी गंडक चेतावनी बिंदु से तीन सेंटीमीटर नीचे 94.97 मीटर पर थी। नदी के जलस्तर में कमी आने से इसके किनारे बसे मरचहवां, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, बकुलादह आदि गांवों में बाढ़ का पानी न घुसने से लोगों ने जहां राहत की सांस ली है, वहीं नदी में पानी का बहाव तेज हो जाने से छितौनी बांध के वीरभार ठोकर पर दबाव बन गया है। छितौनी-बगहां रेल पुल से कुछ दूरी पर स्थित ज्वालापुर और करमहवा के लोगों में नदी एक सप्ताह से कटान कर रही है। बहुत से किसानों की धान, गन्ना और केला की फसल नदी में बह चुकी है। 65 वर्षीय कैलाशी देवी ने बताया कि काफी प्रयास के बाद उन्होंने एक एकड़ धान की बुआई की थी, लेकिन वह नदी में बह गया। काशी यादव, भीमबली, महेंद्र बताते हैं कि अब तक प्रति एकड़ 70 से 80 हजार रुपये बुआई में लग गए, लेकिन नदी सब कुछ बहा ले गई। कटान अब भी जारी है।
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नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बरकरार
तमकुहीरोड। गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से पिपराघाट और एपी तटबंध के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। नदी के कटान करने से कई किसानों की गन्ने की फसल नदी में विलीन हो गई है।
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पिपराघाट और एपी तटबंध के किनारे बसे जंगलीपट्टी, बिनटोलिया, चैनपट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल से होकर बहने वाली बड़ी गंडक के जलस्तर में उतार चढ़ाव का सिलसिला अब भी जारी है। वाल्मीकिनगर बैराज से कभी एक लाख क्यूसेक से अधिक तो कभी कम पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जंगलीपट्टी गांव के सामने कटान तेज हो गई है तथा कई किसानों की फसलें नदी में बह चुकी हैं। गन्ने की फसल को नुकसान का अंदेशा होने के कारण किसान उसे काटकर मवेशी को खिलाने लगे हैं। इस गांव के किसान मथुरा सिंह बताते हैं कि उनकी तरह बहुत से किसानों ने बड़ी उम्मीद से गन्ना की बुआई की थी, लेकिन उन्हें भी फसल को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान पुजारी सिंह, हरिहर यादव, हेमंत सिंह, बाबूलाल निषाद, राजेश सिंह, रामायन यादव ने नदी से हुई क्षति का मुआवजा दिलाने की मांग की है।

इस संबंध में तमकुहीराज के तहसीलदार रामसुधार का कहना है कि संबंधित गांवों के लेखपालों को प्रभावित किसानों की सूची तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। 
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