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Kushinagar News: खेत में मिले पद चिह्न तेंदुए के नहीं, किसी खुर वाले जानवर के
Wed, 10 Jun 2026 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 10 Jun 2026 01:53 AM IST
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मृत हिरन के शिकार पर अब भी रहस्य बरकरार, वन विभाग की टीम लगातार कर रही कांबिंग
मंसाछापर। जटहा बाजार क्षेत्र के कटाई भरपुरवा के रेता क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी से दहशत के बीच वन विभाग की जांच में नया खुलासा हुआ है। खेतों में मिले जिन पदचिन्हों को ग्रामीण तेंदुए का बता रहे थे, वे तेंदुए के नहीं बल्कि किसी खुर वाले वन्यजीव के पद चिह्न पाए गए हैं। विभागीय अधिकारियों ने जांच के बाद इसकी पुष्टि की है। इसके बावजूद तीन दिन पूर्व मृत अवस्था में मिले हिरन की घटना को देखते हुए वन विभाग सतर्क है और इलाके में लगातार कांबिंग अभियान चला रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार तीन दिन पहले रेता क्षेत्र में एक हिरन मृत मिला था। घटना के बाद आसपास के खेतों में कई स्थानों पर पदचिह्न दिखाई देने से लोगों ने तेंदुए की आशंका जताई थी। इसके बाद किसानों में भय का माहौल बन गया था और कई लोग अकेले खेतों में जाने से भी बच रहे थे।
वन विभाग की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर पदचिन्हों की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि खेतों में मिले निशान किसी बड़े शिकारी वन्यजीव के नहीं बल्कि खुर वाले जानवर के हैं। अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए के पंजों और खुर वाले जानवरों के पदचिन्हों में स्पष्ट अंतर होता है, जिसकी पुष्टि विशेषज्ञों द्वारा की गई है।
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हालांकि तीन दिन पहले मिले हिरन के शव को विभाग ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हिरन की मौत किस कारण से हुई। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एहतियात के तौर पर क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय कर्मियों को रेता क्षेत्र, गन्ने के खेतों और झाड़ियों वाले इलाकों में नियमित कांबिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना दें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
कटाई भरपुरवा गांव बिहार सीमा से सटे क्षेत्र में स्थित है। यहां घने खेत, झाड़ियां और नदी किनारे का इलाका होने के कारण अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। वन विभाग का मानना है कि फिलहाल तेंदुए की मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए निगरानी जारी रखी जा रही है।
वर्जन
कटाई भरपुरवा गांव के रेता क्षेत्र के खेतों में जो पद चिह्न मिला था वह तेंदुए का नहीं बल्कि किसी खुर वाले जानवर का है। हिरन के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। फिलहाल टीम लगातार नजर बनाए हुए है। -अमृता चंद, रेज़र खड्डा
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मंसाछापर। जटहा बाजार क्षेत्र के कटाई भरपुरवा के रेता क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी से दहशत के बीच वन विभाग की जांच में नया खुलासा हुआ है। खेतों में मिले जिन पदचिन्हों को ग्रामीण तेंदुए का बता रहे थे, वे तेंदुए के नहीं बल्कि किसी खुर वाले वन्यजीव के पद चिह्न पाए गए हैं। विभागीय अधिकारियों ने जांच के बाद इसकी पुष्टि की है। इसके बावजूद तीन दिन पूर्व मृत अवस्था में मिले हिरन की घटना को देखते हुए वन विभाग सतर्क है और इलाके में लगातार कांबिंग अभियान चला रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार तीन दिन पहले रेता क्षेत्र में एक हिरन मृत मिला था। घटना के बाद आसपास के खेतों में कई स्थानों पर पदचिह्न दिखाई देने से लोगों ने तेंदुए की आशंका जताई थी। इसके बाद किसानों में भय का माहौल बन गया था और कई लोग अकेले खेतों में जाने से भी बच रहे थे।
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वन विभाग की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर पदचिन्हों की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि खेतों में मिले निशान किसी बड़े शिकारी वन्यजीव के नहीं बल्कि खुर वाले जानवर के हैं। अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए के पंजों और खुर वाले जानवरों के पदचिन्हों में स्पष्ट अंतर होता है, जिसकी पुष्टि विशेषज्ञों द्वारा की गई है।
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हालांकि तीन दिन पहले मिले हिरन के शव को विभाग ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हिरन की मौत किस कारण से हुई। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एहतियात के तौर पर क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय कर्मियों को रेता क्षेत्र, गन्ने के खेतों और झाड़ियों वाले इलाकों में नियमित कांबिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना दें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
कटाई भरपुरवा गांव बिहार सीमा से सटे क्षेत्र में स्थित है। यहां घने खेत, झाड़ियां और नदी किनारे का इलाका होने के कारण अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। वन विभाग का मानना है कि फिलहाल तेंदुए की मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए निगरानी जारी रखी जा रही है।
वर्जन
कटाई भरपुरवा गांव के रेता क्षेत्र के खेतों में जो पद चिह्न मिला था वह तेंदुए का नहीं बल्कि किसी खुर वाले जानवर का है। हिरन के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। फिलहाल टीम लगातार नजर बनाए हुए है। -अमृता चंद, रेज़र खड्डा