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गंडक नदी पर पुल न होने से जान जोखिम में डालकर खेती करने जाते हैं कई गांवों के किसान
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कटाई भरपुरवा गांव के पास बड़ी गंडक नदी को नाव से पार कर अपने खेतों की तरफ जाते है किसान। फाइल फोटो।
- फोटो : KUSHINAGAR
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गंडक नदी पर पुल न होने से जान जोखिम में डालकर खेती करने जाते हैं कई गांवों के किसान
क्षेत्र के किसानों की 2500 एकड़ खेती है दियारा क्षेत्र में
जटहां बाजार(कुशीनगर)। कटाई भरपुरवा गांव के पास गंडक नदी पर पुल न बनने से किसानों के लिए नाव ही एक मात्र आवागमन का माध्यम है। इसके बावजूद पुल नहीं बन पा रहा है। इस वजह से क्षेत्र के कई गांवों के किसानों को जान खतरे में डालकर नाव से गंडक नदी पार करनी पड़ती है।
नदी में पानी अधिक होने पर नाव से और कम होने पर पानी के रास्ते आना-जाना पड़ता है। हालांकि, गंडक नदी पर पुल के लिए क्षेत्र के लोग कई बार धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह, हस्ताक्षर अभियान चला चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी नहीं हुई। कटाई भरपुरवा गांव के सामने बड़ी गंडक नदी पर पुल का निर्माण हो जाए तो समय से फसल की बुआई से लेकर अच्छी पैदावार हो जाएगी। साथ ही बगहां (बिहार) जाने के लिए महज छह किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। गंडक नदी के दियारा क्षेत्र में किसानों की करीब 2,500 एकड़ खेती है। खेती करने के लिए किसानों को बरसात के समय नावों के सहारे आना-जाना पड़ता है।
जटहां बाजार थानाक्षेत्र के कटाई भरपुरवा, पड़रही, जटहां बाजार और जरार आदि गांवों के किसानों की करीब 2500 एकड़ खेती गंडक नदी के उस पार दियारा क्षेत्र में है। जून में जब बरसात शुरू होती है तो नदी में पानी ज्यादा हो जाता है। इस कारण किसानों को खेती करने के लिए जान जोखिम में डालकर नाव या तैरकर नदी पार कर खेतों में जाना पड़ता है।
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छह बच्चों की हो चुकी है मौत-
वर्ष 2021 में छह बच्चों की मौत अलग-अलग महीनों में हुई थी। वहीं बिहार के बगहां में जाने के लिए करीब 70 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। अगर पुल का निर्माण हो जाए तो यह दूरी घटकर महज छह किमी ही रह जाएगी।
पूर्व में हो चुका है धरना-प्रदर्शन
कटाई भरपुरवा गांव के सामने बड़ी गंडक नदी पर पुल निर्माण कराने के लिए इन गांवों के लोगों ने वर्ष 2019 में धरना दिया था। तत्कालीन विधायक जटाशंकर त्रिपाठी मौके पर आए थे और आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था। इसके अलावा लोगों ने कई बार सांसद विजय कुमार दुबे को भी ज्ञापन दिया। सांसद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकात कर पुल निर्माण की मांग की थी, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि जून से नवंबर तक बड़ी गंडक नदी में पानी रहता है। ऐसे में नाव के सहारे ही आना-जाना पड़ता है। बहुत किसान फसल की देखरेख नहीं कर पाते है। दिसंबर से नदी में पानी सूख जाता है तो किसान आसानी से खेतों में चले जाते हैं। इस समय भी पानी कम है।
कोट
अगर गंडक नदी पर पुल का निर्माण हो जाता तो हम लोगों की सभी समस्याएं कम हो जातीं। नदी उस पार खेती करने के लिए जाने के बाद परिवार के लोग चिंतित रहते हैं।
संदीप कुशवाहा, कटाई भरपुरवा
कटाई भरपुरवा में गंडक नदी पर पुल बनवाने के लिए चार वर्षों से लगातार मांग होती आ रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका है।
वीरेंद्र पांडेय, कटाई भरपुरवा
हम लोगों ने पुल निर्माण के लिए बंधे पर धरना भी दिया था। जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा था। कोई सकारात्मक पहल होते नहीं दिख रहा है।
सिद्धार्थ कुशवाहा, जटहां बाजार
क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के हित से जुड़ी इतनी बड़ी समस्या कभी नेताओं के लिए गंभीर नहीं दिखी। इस समस्या को दूर कराने के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई।
सरतेज मिश्र, दुसाधीपट्टी
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क्षेत्र के किसानों की 2500 एकड़ खेती है दियारा क्षेत्र में
जटहां बाजार(कुशीनगर)। कटाई भरपुरवा गांव के पास गंडक नदी पर पुल न बनने से किसानों के लिए नाव ही एक मात्र आवागमन का माध्यम है। इसके बावजूद पुल नहीं बन पा रहा है। इस वजह से क्षेत्र के कई गांवों के किसानों को जान खतरे में डालकर नाव से गंडक नदी पार करनी पड़ती है।
नदी में पानी अधिक होने पर नाव से और कम होने पर पानी के रास्ते आना-जाना पड़ता है। हालांकि, गंडक नदी पर पुल के लिए क्षेत्र के लोग कई बार धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह, हस्ताक्षर अभियान चला चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी नहीं हुई। कटाई भरपुरवा गांव के सामने बड़ी गंडक नदी पर पुल का निर्माण हो जाए तो समय से फसल की बुआई से लेकर अच्छी पैदावार हो जाएगी। साथ ही बगहां (बिहार) जाने के लिए महज छह किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। गंडक नदी के दियारा क्षेत्र में किसानों की करीब 2,500 एकड़ खेती है। खेती करने के लिए किसानों को बरसात के समय नावों के सहारे आना-जाना पड़ता है।
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जटहां बाजार थानाक्षेत्र के कटाई भरपुरवा, पड़रही, जटहां बाजार और जरार आदि गांवों के किसानों की करीब 2500 एकड़ खेती गंडक नदी के उस पार दियारा क्षेत्र में है। जून में जब बरसात शुरू होती है तो नदी में पानी ज्यादा हो जाता है। इस कारण किसानों को खेती करने के लिए जान जोखिम में डालकर नाव या तैरकर नदी पार कर खेतों में जाना पड़ता है।
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छह बच्चों की हो चुकी है मौत-
वर्ष 2021 में छह बच्चों की मौत अलग-अलग महीनों में हुई थी। वहीं बिहार के बगहां में जाने के लिए करीब 70 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। अगर पुल का निर्माण हो जाए तो यह दूरी घटकर महज छह किमी ही रह जाएगी।
पूर्व में हो चुका है धरना-प्रदर्शन
कटाई भरपुरवा गांव के सामने बड़ी गंडक नदी पर पुल निर्माण कराने के लिए इन गांवों के लोगों ने वर्ष 2019 में धरना दिया था। तत्कालीन विधायक जटाशंकर त्रिपाठी मौके पर आए थे और आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था। इसके अलावा लोगों ने कई बार सांसद विजय कुमार दुबे को भी ज्ञापन दिया। सांसद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकात कर पुल निर्माण की मांग की थी, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि जून से नवंबर तक बड़ी गंडक नदी में पानी रहता है। ऐसे में नाव के सहारे ही आना-जाना पड़ता है। बहुत किसान फसल की देखरेख नहीं कर पाते है। दिसंबर से नदी में पानी सूख जाता है तो किसान आसानी से खेतों में चले जाते हैं। इस समय भी पानी कम है।
कोट
अगर गंडक नदी पर पुल का निर्माण हो जाता तो हम लोगों की सभी समस्याएं कम हो जातीं। नदी उस पार खेती करने के लिए जाने के बाद परिवार के लोग चिंतित रहते हैं।
संदीप कुशवाहा, कटाई भरपुरवा
कटाई भरपुरवा में गंडक नदी पर पुल बनवाने के लिए चार वर्षों से लगातार मांग होती आ रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका है।
वीरेंद्र पांडेय, कटाई भरपुरवा
हम लोगों ने पुल निर्माण के लिए बंधे पर धरना भी दिया था। जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा था। कोई सकारात्मक पहल होते नहीं दिख रहा है।
सिद्धार्थ कुशवाहा, जटहां बाजार
क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के हित से जुड़ी इतनी बड़ी समस्या कभी नेताओं के लिए गंभीर नहीं दिखी। इस समस्या को दूर कराने के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई।
सरतेज मिश्र, दुसाधीपट्टी