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Kushinagar News: खाद के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे किसान, 12 सचिवों को नोटिस
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गोदामों में स्टॉक,पर ताले लटके होने से खाली हाथ लौट रहे अन्नदाता
अनुपस्थित 12 समितियों के सचिवों को थमाया गया नोटिस
पडरौना। जिले में साधन सहकारी समितियों और पैक्स केंद्रों पर खाद उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को नहीं मिल पा रही है। सचिवों की हड़ताल से वितरण ठप होने के कारण रबी फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका है। किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। इस बीच निरीक्षण में अनुपस्थित मिले 12 सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिले में संचालित पैक्स केंद्रों और साधन सहकारी समितियों पर खाद लेने के लिए किसानों की भीड़ उमड़ रही है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से बुआई प्रभावित हो रही है। कई समितियों के गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद ताले लटके हैं। ऐसे में किसानों को खुले बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है या बिना खाद लिए लौटना पड़ रहा है।
पिपरा कनक संवाद के अनुसार, क्षेत्र के पिपरा कनक, मंगुरी पट्टी, महुअवा, अहलादपुर और रजवटिया स्थित पैक्स केंद्रों पर किसान खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वितरण बंद होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पैक्स केंद्र पिपरा कनक के प्रभारी सचिव प्रेम सागर मिश्रा ने बताया कि मानदेय की मांग को लेकर सचिव हड़ताल पर हैं।
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जानकीनगर संवाद के अनुसार, क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों पर ताले लटके हैं। साड़ी खुर्द निवासी रामचंद्र मद्धेशिया ने बताया कि समितियों पर खाद उपलब्ध है, लेकिन सचिवों की हड़ताल के कारण वितरण नहीं हो रहा है। दुर्गवलिया निवासी अलीहसन अंसारी ने कहा कि रबी फसलों की बुआई का समय चल रहा है। प्रशासन को जल्द समस्या का समाधान कराना चाहिए, ताकि किसानों को समय से खाद मिल सके।
बरवापट्टी संवाद के अनुसार, क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों पर भी खाद वितरण ठप है। किसान डीएपी, यूरिया और एनपीके के लिए चक्कर लगा रहे हैं। अमवादीगर समिति के गोदाम में 210 बोरी यूरिया, 175 बोरी एनपीके और 180 बोरी डीएपी उपलब्ध है। दशाहवा निवासी मनोज पटेल और बजरंगी पटेल ने बताया कि वे लगातार तीन दिन से समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। इससे बुआई पिछड़ने की आशंका है।
गुरवलिया बाजार संवाद के अनुसार, बी-पैक्स कोरया खिरिया और बी-पैक्स ठाकुर सेमरहरदो पट्टी में भी खाद उपलब्ध होने के बावजूद वितरण नहीं हो रहा है। दोनों केंद्रों पर 300-300 बोरी डीएपी और 400-400 बोरी यूरिया उपलब्ध है। किसान तिलहन, आलू और गन्ने की बुआई के लिए खेत तैयार कर चुके हैं, लेकिन खाद के लिए भटक रहे हैं। सचिव संजय शाही ने बताया कि गोदाम में खाद उपलब्ध है, लेकिन हड़ताल के कारण वितरण नहीं हो पा रहा है। हड़ताल समाप्त होने पर खाद वितरित की जाएगी।
वर्जन
कुल 145 समितियों के सापेक्ष कुल 54 सचिव तैनात हैं। जिले का कोई भी सचिव लखनऊ में आयोजित धरने में नहीं गया है। विभाग की तरफ से समितियों के निरीक्षण में 12 सचिव अनुपस्थित मिले हैं। उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
-नीरज गोंड़, एआर को-आपरेटिव, कुशीनगर
00000
किसान बोले:-
रबी सीजन में फसलों की बुआई के लिए खाद की जरूरत होती है। सचिवों की हड़ताल के चलते किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। प्रशासन को वैकल्पिक प्रबंध कर खाद मुहैया कराया जाना चाहिए ताकि किसानों की परेशानी दूर हो जाए।
-अखिलेश तिवारी, महुअवां
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फसलों की बुआई के लिए किसानों को फॉस्फेटिक खाद उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके बिना बुआई पिछड़ जाएगी तो पैदावार भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। खाद वितरण के लिए मुक्कमल इंतजाम करने की आवश्यकता है ताकि किसानों को सहूलियत मिले।
-अजय गुप्ता, महुअवां
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अनुपस्थित 12 समितियों के सचिवों को थमाया गया नोटिस
पडरौना। जिले में साधन सहकारी समितियों और पैक्स केंद्रों पर खाद उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को नहीं मिल पा रही है। सचिवों की हड़ताल से वितरण ठप होने के कारण रबी फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका है। किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। इस बीच निरीक्षण में अनुपस्थित मिले 12 सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिले में संचालित पैक्स केंद्रों और साधन सहकारी समितियों पर खाद लेने के लिए किसानों की भीड़ उमड़ रही है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से बुआई प्रभावित हो रही है। कई समितियों के गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद ताले लटके हैं। ऐसे में किसानों को खुले बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है या बिना खाद लिए लौटना पड़ रहा है।
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पिपरा कनक संवाद के अनुसार, क्षेत्र के पिपरा कनक, मंगुरी पट्टी, महुअवा, अहलादपुर और रजवटिया स्थित पैक्स केंद्रों पर किसान खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वितरण बंद होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पैक्स केंद्र पिपरा कनक के प्रभारी सचिव प्रेम सागर मिश्रा ने बताया कि मानदेय की मांग को लेकर सचिव हड़ताल पर हैं।
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जानकीनगर संवाद के अनुसार, क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों पर ताले लटके हैं। साड़ी खुर्द निवासी रामचंद्र मद्धेशिया ने बताया कि समितियों पर खाद उपलब्ध है, लेकिन सचिवों की हड़ताल के कारण वितरण नहीं हो रहा है। दुर्गवलिया निवासी अलीहसन अंसारी ने कहा कि रबी फसलों की बुआई का समय चल रहा है। प्रशासन को जल्द समस्या का समाधान कराना चाहिए, ताकि किसानों को समय से खाद मिल सके।
बरवापट्टी संवाद के अनुसार, क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों पर भी खाद वितरण ठप है। किसान डीएपी, यूरिया और एनपीके के लिए चक्कर लगा रहे हैं। अमवादीगर समिति के गोदाम में 210 बोरी यूरिया, 175 बोरी एनपीके और 180 बोरी डीएपी उपलब्ध है। दशाहवा निवासी मनोज पटेल और बजरंगी पटेल ने बताया कि वे लगातार तीन दिन से समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। इससे बुआई पिछड़ने की आशंका है।
गुरवलिया बाजार संवाद के अनुसार, बी-पैक्स कोरया खिरिया और बी-पैक्स ठाकुर सेमरहरदो पट्टी में भी खाद उपलब्ध होने के बावजूद वितरण नहीं हो रहा है। दोनों केंद्रों पर 300-300 बोरी डीएपी और 400-400 बोरी यूरिया उपलब्ध है। किसान तिलहन, आलू और गन्ने की बुआई के लिए खेत तैयार कर चुके हैं, लेकिन खाद के लिए भटक रहे हैं। सचिव संजय शाही ने बताया कि गोदाम में खाद उपलब्ध है, लेकिन हड़ताल के कारण वितरण नहीं हो पा रहा है। हड़ताल समाप्त होने पर खाद वितरित की जाएगी।
वर्जन
कुल 145 समितियों के सापेक्ष कुल 54 सचिव तैनात हैं। जिले का कोई भी सचिव लखनऊ में आयोजित धरने में नहीं गया है। विभाग की तरफ से समितियों के निरीक्षण में 12 सचिव अनुपस्थित मिले हैं। उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
-नीरज गोंड़, एआर को-आपरेटिव, कुशीनगर
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किसान बोले:-
रबी सीजन में फसलों की बुआई के लिए खाद की जरूरत होती है। सचिवों की हड़ताल के चलते किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। प्रशासन को वैकल्पिक प्रबंध कर खाद मुहैया कराया जाना चाहिए ताकि किसानों की परेशानी दूर हो जाए।
-अखिलेश तिवारी, महुअवां
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फसलों की बुआई के लिए किसानों को फॉस्फेटिक खाद उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके बिना बुआई पिछड़ जाएगी तो पैदावार भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। खाद वितरण के लिए मुक्कमल इंतजाम करने की आवश्यकता है ताकि किसानों को सहूलियत मिले।
-अजय गुप्ता, महुअवां