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Kushinagar News: सिक्कों की कहानी पर लगी छायाचित्र प्रदर्शनी
Sat, 10 Jun 2023 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 10 Jun 2023 11:25 PM IST
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राजकीय बौद्ध संग्रहालय में छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करते अतिथि व अन्य।संवाद
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राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर में 10 से 30 जून तक चलेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। कुशीनगर स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय में शनिवार से सिक्कों की कहानी छायाचित्रों की जुबानी विषयक प्रदर्शनी शुरू हुई। यह प्रदर्शनी 30 जून तक प्रत्येक कार्य दिवस में देखी जा सकेगी। इसमें प्राचीन सिक्के से लेकर आधुनिक सिक्कों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन बुद्ध पीजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शाशिकांत पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन सिक्के राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर हैं। इनकी सम्यक सुरक्षा एवं भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित रखना और बच्चों में अपने धरोहर के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से प्रदर्शनी आयोजित की गई है।
प्रदर्शनी में सिक्कों की उत्पत्ति, उनके निर्माण के विविध तरीकों यथा टूल-डाई तकनीक, स्क्रू प्रेस तकनीक, भाप-चलित मशीनों से निर्माण व आधुनिक टकसालों में निर्माण की तकनीकों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
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संग्रहालय अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने बताया कि प्रदर्शनी में प्रारम्भ से लेकर वर्तमान तक सिक्कों को ढालने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। तीसरी सहस्राब्दी तक विनिमय के माध्यम के रूप में अनाज के उपयोग, वैदिक काल में विनिमय का माध्यम के रूप में गायों के प्रयोग, विनिमय में हार की तरह के आभूषण ‘निष्क‘ के प्रयोग, निश्चित भार वाले सुवर्ण का प्रयोग आदि के दृश्य विनिमय की आरंभिक व्यवस्था को स्पष्ट करते हैं।
बताया कि धातु पिंडों के माध्यम से विनिमय करने की प्रथा व्यवस्थित हो जाने पर भी उनके सही वजन एवं धातु के शुद्धता की प्रामाणिकता के लिए उन पर उत्तरदायी अधिकारी का चिह्न अंकित किया गया है। भारत के प्राचीनतम आहत सिक्के, विभिन्न जनपदों के सिक्के, भारतीय यवन सिक्के, कुषाण एवं गुप्त राजाओं के सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्कों के अतिरिक्त सातवाहनों के सिक्के, मध्यकालीन सिक्के, आधुनिक सिक्कों की शृंखला में आना, नया पैसा के अतिरिक्त मेडल आदि का अवलोकन प्रदर्शनी में किया जा सकता है।
इस दौरान तेज प्रताप शुक्ला, श्रवण कुशवाहा, धीरेंद्र मिश्रा, जितेंद्र यादव, महेश, सूरज मिश्रा, गोविंद यादव, मीरचंद, वेग आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। कुशीनगर स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय में शनिवार से सिक्कों की कहानी छायाचित्रों की जुबानी विषयक प्रदर्शनी शुरू हुई। यह प्रदर्शनी 30 जून तक प्रत्येक कार्य दिवस में देखी जा सकेगी। इसमें प्राचीन सिक्के से लेकर आधुनिक सिक्कों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन बुद्ध पीजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शाशिकांत पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन सिक्के राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर हैं। इनकी सम्यक सुरक्षा एवं भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित रखना और बच्चों में अपने धरोहर के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से प्रदर्शनी आयोजित की गई है।
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प्रदर्शनी में सिक्कों की उत्पत्ति, उनके निर्माण के विविध तरीकों यथा टूल-डाई तकनीक, स्क्रू प्रेस तकनीक, भाप-चलित मशीनों से निर्माण व आधुनिक टकसालों में निर्माण की तकनीकों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
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संग्रहालय अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने बताया कि प्रदर्शनी में प्रारम्भ से लेकर वर्तमान तक सिक्कों को ढालने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। तीसरी सहस्राब्दी तक विनिमय के माध्यम के रूप में अनाज के उपयोग, वैदिक काल में विनिमय का माध्यम के रूप में गायों के प्रयोग, विनिमय में हार की तरह के आभूषण ‘निष्क‘ के प्रयोग, निश्चित भार वाले सुवर्ण का प्रयोग आदि के दृश्य विनिमय की आरंभिक व्यवस्था को स्पष्ट करते हैं।
बताया कि धातु पिंडों के माध्यम से विनिमय करने की प्रथा व्यवस्थित हो जाने पर भी उनके सही वजन एवं धातु के शुद्धता की प्रामाणिकता के लिए उन पर उत्तरदायी अधिकारी का चिह्न अंकित किया गया है। भारत के प्राचीनतम आहत सिक्के, विभिन्न जनपदों के सिक्के, भारतीय यवन सिक्के, कुषाण एवं गुप्त राजाओं के सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्कों के अतिरिक्त सातवाहनों के सिक्के, मध्यकालीन सिक्के, आधुनिक सिक्कों की शृंखला में आना, नया पैसा के अतिरिक्त मेडल आदि का अवलोकन प्रदर्शनी में किया जा सकता है।
इस दौरान तेज प्रताप शुक्ला, श्रवण कुशवाहा, धीरेंद्र मिश्रा, जितेंद्र यादव, महेश, सूरज मिश्रा, गोविंद यादव, मीरचंद, वेग आदि मौजूद रहे।