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इंसेफेलाइटिस: तीन माह में ही 22 चपेट में आए, छह की मौत
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:27 AM IST
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इंसेफेलाइटिस: तीन माह में ही 22 चपेट में आए, छह की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। हर साल जनपद के सैकड़ों नौनिहालों को अपनी गिरफ्त में लेने वाले इंसेफेलाइटिस ने साल के शुरुआत में ही कहर बरपाना शुरू कर दिया है। अभी इस बीमारी का समय भी नहीं है, फिर भी 22 मासूम इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें छह बच्चों की बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मृत्यु हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े ही हर साल तमाम बच्चों के इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने की गवाही देते हैं। इनमें से बहुत से मासूम समुचित इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। निजी अस्पतालों में भी ऐसे बहुत से बच्चे इलाज के लिए ले जाए जाते हैं, जहां इलाज का समुचित प्रबंध न होने की वजह से स्थिति बिगड़ते ही डॉक्टर उन्हें रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इस वर्ष जनवरी से मार्च तक 22 बच्चे इंसेफेलाइटिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिनमें 14 बच्चे बीआरडी मेडिकल कॉलेज और आठ जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। इन बच्चों में से छह की बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मृत्यु हो गई। जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय का कहना है कि जनवरी से 24 मार्च 2018 तक इंसेफेलाइटिस के 22 मामले आए हैं। इनमें से छह बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। इस पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पूरा प्रयास किया जा रहा है। इलाज की व्यवस्था भी की गई है। जागरूकता के लिए दो से 16 अप्रैल तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े ही हर साल तमाम बच्चों के इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने की गवाही देते हैं। इनमें से बहुत से मासूम समुचित इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। निजी अस्पतालों में भी ऐसे बहुत से बच्चे इलाज के लिए ले जाए जाते हैं, जहां इलाज का समुचित प्रबंध न होने की वजह से स्थिति बिगड़ते ही डॉक्टर उन्हें रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इस वर्ष जनवरी से मार्च तक 22 बच्चे इंसेफेलाइटिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिनमें 14 बच्चे बीआरडी मेडिकल कॉलेज और आठ जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। इन बच्चों में से छह की बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मृत्यु हो गई। जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय का कहना है कि जनवरी से 24 मार्च 2018 तक इंसेफेलाइटिस के 22 मामले आए हैं। इनमें से छह बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। इस पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पूरा प्रयास किया जा रहा है। इलाज की व्यवस्था भी की गई है। जागरूकता के लिए दो से 16 अप्रैल तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा।
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