{"_id":"96325c6ba2a6c521d94a80870dcdbd9c","slug":"encephalitis-death-of-the-child-22-ill-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंसेफेलाइटिस से बच्ची की मौत, 22 बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंसेफेलाइटिस से बच्ची की मौत, 22 बीमार
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Wed, 14 Oct 2015 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिपरा बाजार। मंगलवार की शाम मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान इंसेफेलाइटिस से पीड़ित सात वर्षीया रिशू की हो गई। रिशू से छोटी दो बहनों के अलावा 22 अन्य बच्चे बीमार हैं।
बीमारी के डर से दो बच्चियों को घर के लोगों ने रिश्तेदार के यहां भेज दिया है। सीएमओ को जानकारी होने के बाद उनके निर्देश पर डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह स्वास्थ्य टीम को लेकर गांव में पहुंचे थे।
मामला विशुनपुरा ब्लॉक के पटेरहा मंगलपुर गांव का है। रिशू को एक सप्ताह पूर्व बुखार हुआ था। पिता रमेश विश्वकर्मा विदेश में रहते हैं। सोमवार को घर के लोग रिशू को मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां मंगलवार को उसकी मौत हो गई। इसके अलावा पूजा, संतोषी, हरिशंकर, संगीत, शिवांगी, अंकित, नेहा, अरुण, रंभा आदि भी बुखार से ग्रस्त हैं।
विज्ञापन
सरिता ने बताया कि मासूमों में फैली बीमारी के डर से उन्होंने बुखार और उल्टी से पीड़ित चार और दो वर्षीया बेटियों को रिश्तेदार के घर भेज दिया है।
बुधवार को किसी ने सीएमओ से पटेरहा मंगलपुर गांव में बीमार बच्चों की जानकारी फोन पर दी। दोपहर तक डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह के साथ स्वास्थ्य टीम पहुंच गई।
लोगों ने टीम से विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवालों की झड़ी लगा डाली। टीम में शामिल हेल्थ सुपरवाइजर ध्रु्व शर्मा से गांववालों ने छिड़काव में लापरवाही की बात कही। गांव के संतोष राव, रामाश्रय, मूरत शर्मा, मनोज राव, अवधेश, रामसूरत पांडेय ने कहा कि विगत 30 वर्षों में कभी भी दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है।
छेदी दुबे, सुधीर दुबे, सुंदरम, आकाश आदि का कहना था कि दिन ढलते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है, लेकिन शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।
स्वास्थ्य टीम को लोगों ने बताया कि सफाई कर्मचारी यदाकदा गांव में नजर आता है, अलबत्ता अपनी एवज में दिहाड़ी मजदूर से माह दो माह पर एक बार सफाई कराई जाती है।
डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह ने कहा कि 22 बच्चे वायरल बुखार से पीड़ित हैं, जिन्हें दवा दे दी गई है। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया है।
विज्ञापन
बीमारी के डर से दो बच्चियों को घर के लोगों ने रिश्तेदार के यहां भेज दिया है। सीएमओ को जानकारी होने के बाद उनके निर्देश पर डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह स्वास्थ्य टीम को लेकर गांव में पहुंचे थे।
विज्ञापन
मामला विशुनपुरा ब्लॉक के पटेरहा मंगलपुर गांव का है। रिशू को एक सप्ताह पूर्व बुखार हुआ था। पिता रमेश विश्वकर्मा विदेश में रहते हैं। सोमवार को घर के लोग रिशू को मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां मंगलवार को उसकी मौत हो गई। इसके अलावा पूजा, संतोषी, हरिशंकर, संगीत, शिवांगी, अंकित, नेहा, अरुण, रंभा आदि भी बुखार से ग्रस्त हैं।
विज्ञापन
सरिता ने बताया कि मासूमों में फैली बीमारी के डर से उन्होंने बुखार और उल्टी से पीड़ित चार और दो वर्षीया बेटियों को रिश्तेदार के घर भेज दिया है।
बुधवार को किसी ने सीएमओ से पटेरहा मंगलपुर गांव में बीमार बच्चों की जानकारी फोन पर दी। दोपहर तक डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह के साथ स्वास्थ्य टीम पहुंच गई।
लोगों ने टीम से विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवालों की झड़ी लगा डाली। टीम में शामिल हेल्थ सुपरवाइजर ध्रु्व शर्मा से गांववालों ने छिड़काव में लापरवाही की बात कही। गांव के संतोष राव, रामाश्रय, मूरत शर्मा, मनोज राव, अवधेश, रामसूरत पांडेय ने कहा कि विगत 30 वर्षों में कभी भी दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है।
छेदी दुबे, सुधीर दुबे, सुंदरम, आकाश आदि का कहना था कि दिन ढलते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है, लेकिन शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।
स्वास्थ्य टीम को लोगों ने बताया कि सफाई कर्मचारी यदाकदा गांव में नजर आता है, अलबत्ता अपनी एवज में दिहाड़ी मजदूर से माह दो माह पर एक बार सफाई कराई जाती है।
डॉक्टर एडीबीपीएन सिंह ने कहा कि 22 बच्चे वायरल बुखार से पीड़ित हैं, जिन्हें दवा दे दी गई है। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया है।