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इंसेफेलाइटिस से बच्ची की मौत
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Thu, 07 Jan 2016 11:27 PM IST
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रामकोला। लाला छपरा गांव के बढ़ई टोला में इंसेफेलाइटिस से दस साल की बच्ची की बुधवार को मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई।
बृहस्पतिवार को उसका शव घर लाया गया। इस गांव में डेढ़ माह में इंसेफेलाइटिस से चार बच्चों की मौत हो चुकी है। बृहस्पतिवार को सीएमओ यहां पहुंचे और बाकी बच्चों की सेहत का जायजा लिया।
इस गांव के मुंतजीर की दस साल की बच्ची साबिया बीमार थी। मंगलवार को परिवार के लोग उसे कप्तानगंज सीएचसी पर ले गए। वहां इलाज के बाद वापस भेज दिया गया।
उसके बाद परिवार के लोग बच्ची को लेकर रामकोला सीएचसी पर पहुंचे। वहां से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
बुधवार की शाम को इस बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिवार के लोग बृहस्पतिवार को शव लेकर घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। इसकी जानकारी सीएमओ को दी गई।
सीएमओ स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव में पहुंचे। वह बच्ची के परिवारवालों से मिले और बीमारी की जानकारी ली। गांव के ग्यासुद्दीन ने कहा कि उनकी बच्ची की इसी बीमारी से 24 नवंबर को मौत हो गई थी।
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मुटुर ने बताया कि नौ दिसंबर को उनकी बेटी ज्योति की मौत हुई।
इल्ताफ ने कहा कि 20 दिन पहले उनके बेटे शहजाद ने दम तोड़ दिया था। इस पर सीएमओ ने तत्काल फागिंग कराने का आदेश दिया।
वहीं गांव के डेढ़ साल पहले दो बच्चों की मौत के बाद इस टोले पर सात इंडिया मार्क टू हैंडपंप स्वीकृत हुए थे, पर लगे एक भी नहीं। मजबूरी में गांव के काफी लोग अब भी देसी हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करते हैं।
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बृहस्पतिवार को उसका शव घर लाया गया। इस गांव में डेढ़ माह में इंसेफेलाइटिस से चार बच्चों की मौत हो चुकी है। बृहस्पतिवार को सीएमओ यहां पहुंचे और बाकी बच्चों की सेहत का जायजा लिया।
इस गांव के मुंतजीर की दस साल की बच्ची साबिया बीमार थी। मंगलवार को परिवार के लोग उसे कप्तानगंज सीएचसी पर ले गए। वहां इलाज के बाद वापस भेज दिया गया।
उसके बाद परिवार के लोग बच्ची को लेकर रामकोला सीएचसी पर पहुंचे। वहां से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
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बुधवार की शाम को इस बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिवार के लोग बृहस्पतिवार को शव लेकर घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। इसकी जानकारी सीएमओ को दी गई।
सीएमओ स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव में पहुंचे। वह बच्ची के परिवारवालों से मिले और बीमारी की जानकारी ली। गांव के ग्यासुद्दीन ने कहा कि उनकी बच्ची की इसी बीमारी से 24 नवंबर को मौत हो गई थी।
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मुटुर ने बताया कि नौ दिसंबर को उनकी बेटी ज्योति की मौत हुई।
इल्ताफ ने कहा कि 20 दिन पहले उनके बेटे शहजाद ने दम तोड़ दिया था। इस पर सीएमओ ने तत्काल फागिंग कराने का आदेश दिया।
वहीं गांव के डेढ़ साल पहले दो बच्चों की मौत के बाद इस टोले पर सात इंडिया मार्क टू हैंडपंप स्वीकृत हुए थे, पर लगे एक भी नहीं। मजबूरी में गांव के काफी लोग अब भी देसी हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करते हैं।