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गांधी जयंती पर विशेष

Fri, 01 Oct 2021 10:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 10:27 PM IST
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Elderly Brahmachari Baba is following in the footsteps of Bapu
गोपालदास उर्फ ब्रह्मचारी बाबा ।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR
फोटो
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बापू के पदचिह्नों पर गतिशील हैं बुजुर्ग ब्रह्मचारी बाबा
चरखे से स्वयं सूत कातने में दिन भर रहते हैं व्यस्त, धोती कुर्ता है इनका पहनावा
अमवा बाजार के रहनेवाले गांधीवादी गोपालदास दूसरे के लिए भी हैं प्रेरणास्रोत
संवाद न्यूज एजेंसी
टेकुआटार। आज के आधुनिक युग में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पद चिह्नों पर चलने वाले क्षेत्र के 70 वर्षीय गोपालदास उर्फ ब्रह्मचारी बाबा अपने चरखे से सूत कातकर कुर्ता-धोती बनाते और पहनते हैं। इनकी दिनचर्या खादी से ही शुरू होकर खादी पर ही समाप्त होती है। यही नहीं, यह खुद तो खादी पहनावे में रहते हैं और दूसरों को भी स्वदेशी वस्त्र पहनने के लिए प्रेरित करते हैं।
रामकोला ब्लॉक क्षेत्र के अमवा बाजार के टोला टड़वा टोला निवासी गोपालदास बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति एवं गांधीवादी नीति के हैं। सादा जीवन उच्च विचार रखने वाले गोपालदास बताते हैं कि बचपन में करीब नौ वर्ष की उम्र में ही हिमालय पर चले गए थे। वहां एक हठी विचारधारा के सन्यासी से मुलाकात हुई। उन्होंने इन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित किया, तो वह अपने ननिहाल जाकर शिक्षा ग्रहण किए। जूनियर हाईस्कूल भटही राजा में तत्कालीन प्रधानाचार्य कमलापति त्रिपाठी ने इन्हें शिक्षा दीक्षा दी। कमलापति त्रिपाठी गांधीवादी व्यक्ति थे। उन्हीं से सीख लेकर वह महात्मा गांधी के पद चिह्नों पर चलने का संकल्प लिए।
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संत बिनोवा भावे की पुस्तक गीता प्रवचन पढ़ने से उनका जीवन काफी प्रभावित हुआ जिससे हठयोग छोड़कर कर्मयोग के तरफ सर्वोदय विचारधारा को लेकर चल पड़े। उम्र की परवाह किए बिना अपने चरखे से सूत कातकर खुद की बुनी हुई धोती कुर्ता धारण करते हैं। यह चरखा, तकली, अंबर, पुस्तक चक्र, किसान चरखा चलाने में माहिर हैं। अपने हाथ से चरखा चलाना गांधीवादी सूत कातना इनकी दिनचर्या में है। इन्होंने गो सेवा सदन की स्थापना कर गायों को चराने, खिलाने, नहलाने आदि से लेकर चारा काटना, गोबर उठाना इनकी दिनचर्या है। क्षेत्र में इनकी गांधी विचारधारा की चर्चा है।
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