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Kushinagar News: ईको-टूरिज्म का ‘आइकॉन’ अधूरा, हैंडओवर कर पर्यटन विभाग ने झाड़ा पल्ला

Wed, 12 Aug 2026 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 12 Aug 2026 02:42 AM IST
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Eco-tourism icon remains incomplete
पडरौना। हाटा तहसील क्षेत्र के रामपुर सोहरौना ताल को प्रदेश के बड़े ईको-टूरिज्म ''''आइकॉन'''' के रूप में चमकाने का दावा किया गया था। 4.20 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी यह सपना अधूरा ही रह गया। कंक्रीट के बर्ड वॉच टावर तैयार कर पर्यटन विभाग ने बिना किसी संसाधन के परियोजना को हैंडओवर किया और चुपके से अपना पल्ला झाड़ लिया। स्थानीय लोगों का सवाल यह है कि सिर्फ सूखी इमारतें खड़ी कर देने से पर्यटक खिंचे चले आएंगे, वे इस स्थल को पर्यटन सुविधाओं से लैस किए जाने की मांग कर रहे हैं।
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प्रदेश सरकार की राज्य योजना (2023-24) के तहत इस ताल की सूरत बदलने का खाका खींचा गया था। मकसद था कि प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट के साथ यहां सैलानियों का मेला लगेगा। लेकिन, आज की हकीकत यह है कि पक्षियों को निहारने के लिए न तो दूरबीन है, न सुरक्षा के इंतजाम और न ही सैलानियों के बैठने की कोई सुविधा। संसाधनों के अभाव में यह करोड़ों की परियोजना अनुपयोगी साबित हो रही है।
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न बिजली की रोशनी, न सुरक्षा, सिर्फ ताले में कैद है ढांचा
करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अब तक विद्युत व्यवस्था से संतृप्त नहीं हो सका है। रात के समय पूरे ताल क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है। सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था इस कदर लचर है कि नवनिर्मित मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ है, जिससे यहां आने वाले लोग और पर्यटक अंदर प्रवेश तक नहीं कर पा रहे हैं। वहीं बर्ड वाच टॉवर की दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘आप कैमरे की नजर में हैं’ लिखा गया है, लेकिन हकीकत में निगरानी के लिए एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि बर्ड वॉच टावर मौजूदा समय में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है।
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स्थानीय लोग बोले:-
रामपुर सोहरौना ताल के किनारे काम शुरू हुआ था, तो लगा था कि गांव का नाम चमकेगा और युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। लेकिन, यहां सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा खड़ा है। करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए गए। उसका कोई लाभ होता नहीं दिखाई दे रहा है। -राजन आर्य, नाऊमुंडा
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बर्ड वॉच टावर तो बना दिया गया है लेकिन वहां नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है। टावर की सीढि़यों से लेकर बर्ड वाच स्थल तक बीड़ी के टुकड़े, सिगरेट सहित गुटखा के रैपर बिखरे रहते हैं। ऐसे में पर्यटन विभाग की छवि धूमिल हो रही है। अब तक यह स्थल मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त नहीं हो पाया है। -आद्या लाल गोड़, नाऊमुंडा
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दीवारों पर सिर्फ चेतावनी लिख दी गई है कि ''''आप कैमरे की नजर में हैं'''', जबकि कैमरा एक भी नहीं है। यह जनता की आंख में धूल झोंकने जैसा है। -शेषमणि पांडेय, धरमौली
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पर्यटन विभाग की तरफ से बड़ा ढिंढोरा पीटा गया था कि दूर-दूर से लोग पक्षी देखने रामपुर सोहरौना ताल आएंगे। हकीकत यह है कि यहां बिजली तक की व्यवस्था नहीं है। ताल के मझधार में माता मंझरिया देवी का मंदिर भी है। इसलिए यहां पर पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिए। -समीर गुप्ता, बतरौली
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बिना आत्मा के शरीर जैसा है यह निर्माण। इस ताल का अपना प्राकृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। सुंदरता के नाम पर पैसा तो खूब बहाया गया, लेकिन इसमें कोई दूरदर्शिता नहीं थी। न बिजली है, न सुरक्षा, सिर्फ ताले जड़े हैं। यह प्रोजेक्ट बिना आत्मा के शरीर जैसा बनकर रह गया है। -विवेकानंद उर्फ बालकदास, महंत/पुजारी, मंझरिया देवी मंदिर
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राज्य योजना के तहत हमें जितने बजट की स्वीकृति मिली थी, उससे बर्ड वॉच टावर और सिविल निर्माण का काम पूरा करा दिया गया है। हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बिजली कनेक्शन, उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी अब संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन की है। -डाॅ. प्राण रंजन, पर्यटन सूचना अधिकारी कुशीनगर
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प्रदेश में चयनित 11 प्रमुख स्थलों में रामपुर सोहरौना ताल
उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड राज्य के 11 प्रमुख स्थलों पर पर्यावरण अनुकूल पर्यटन सुविधाएं विकसित करने और रखरखाव पर ध्यान दे रहा है। इन स्थलों में अयोध्या का फ्लोटिंग रेस्तरां और उधेला झील, बलिया का मेरितार गांव-सुरहा ताल बर्ड सेंचुअरी, बाराबंकी की बगहर झील, सीतापुर की अज्जेपुर झील, कुशीनगर का सोहरौना ताल, चित्रकूट का रामनगर झील व मड़फा किला, जालौन का पचनदा (पांच नदियों का संगम), ललितपुर का ककरावल जलप्रपात, बांदा में पर्यटक सुविधा केंद्र व कालिंजर किला व महराजगंज की देवदह ईको टूरिज्म साइट शामिल हैं।

करोड़ों की परियोजना...संचालन की व्यवस्था हवा में
ईको टूरिज्म आईकॉन के रूप में पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग की तरफ से रामपुर सोहरौना ताल के किनारे करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं। लेकिन, इसकी देखरेख व संचालन की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है। बर्ड वाच टॉवर की निगरानी करने वाला कोई नहीं है। परियोजना के तहत नवनिर्मित बिल्डिंग सहित दुकान व अन्य संरचनाएं बंद गेट के अंदर धूल फांक रही हैंं। सफाई आदि का कोई बंदोबस्त नहीं है। कुछ सैलानी कंटीले तार से घुसकर फोटो आदि खींच रहे हैं। नुकीले तार में फंसकर उनके कपड़े फट जा रहे हैं। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है।


कोट:-
करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद पर्यटन विकास की परियोजना चालू नहीं होने का मामला गंभीर है। इसके कारणों सहित सभी बिंदुओं की गहनता से जांच कराई जाएगाी। जांच में आए तथ्यों व रिपोर्ट के आधार पर सुचारु तरीके से संचालित किए जाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। -योगेश्वर सिंह, एसडीएम हाटा
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