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Kushinagar News: गोली से इंजेक्शन तक पहुंची नशे की लत, धंधेबाजों के मकड़जाल मेंं युवा

Fri, 31 Jul 2026 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 31 Jul 2026 12:55 AM IST
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Drug addiction has progressed from pills to injections, leaving young people trapped in the web of drug dealers.
कुशीनगर। जिले में नशे का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी कीमत नई पीढ़ी चुका रही है। कभी सिर्फ शराब और तंबाकू तक सीमित रहने वाला नशा अब प्रतिबंधित गोलियों, कफ सिरप और नशीले इंजेक्शनों तक पहुंच गया है। हालत यह है कि गांवों से लेकर कस्बों तक युवा इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। इससे जहां परिवारों के सपने बिखर रहे हैं, वहीं युवाओं का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज और कसया सीएचसी पर बनाए गए एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से ओएसटी सेंटर पर परिजन किशोर और युवाओं को लेकर पहुंच रहे हैं।
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जिले के कई इलाकों में नशे की गोलियों और इंजेक्शनों का अवैध कारोबार सक्रिय है। नशे के आदी हो चुके युवाओं को आसानी से प्रतिबंधित दवाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं। कुछ मामलों में मेडिकल दवाओं के दुरुपयोग और अवैध आपूर्ति की भी शिकायतें सामने आती रही हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन इसके बावजूद यह धंधा पूरी तरह थम नहीं सका है। दवा की दुकानों पर नशे की गोली, नशे का इंजेक्शन, कोडिन सिरप जैसी प्रतिबंधित दवाएं अधिक रेट पर बेची जा रही हैं। इसका इस्तेमाल युवा पीढ़ी नशे के लिए धड़ल्ले से कर रही है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. तुषार कुमार तिवारी का कहना है कि शुरुआत अक्सर दोस्तों की संगत या शौक से होती है, लेकिन कुछ ही समय में यह लत बन जाती है। नशे के इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाले युवाओं में संक्रमण, लीवर और किडनी संबंधी बीमारियों के साथ मानसिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। कई मामलों में ओवरडोज जानलेवा साबित होती है।
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पूरा परिवार परेशान
-जिले के एक 17 वर्षीय किशोर को परिजन मेडिसिन विभाग में लेकर पहुंचे, मरीज को देखने के बाद डाक्टर मानसिक रोग विभाग में रेफर कर दिए। काउंसलिंग में पता चला कि किशोर 12 वर्ष की उम्र से शराब, भांग,नशे की गोली का इस्तेमाल कर रहा है। किशोर को मेडिसिन विभाग के वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। करीब चार साल से अभिभावक नशे के आदी हो चुके बेटे को लेकर परेशान हैं, नशे की जाल में फंसकर कक्षा 6 के बाद पढ़ाई भी छोड़ दिया। किशोर पिता ने बताया कि नशे के दलदल में फंसने से पूरा परिवार परेशान है।
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कसया सीएचसी में चिह्नित किए गए 22 लोग

एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से कसया सीएचसी में सीएमओ के अधीन ओएटी सेंटर का खोला गया है। इसका मुख्य उद्देश्य इंजेक्शन के जरिए नशा करने वालों को चिह्नित कर नशामुक्त करना है। अब तक 22 लोग चिह्नित किए गए हैं। इनमें 17 युवा हैं। उनको अब नशे की गोली पर ला दिया गया है। इंजेक्शन की लत छूट गई है। इनमें छह ऐसे युवा हैं, जिन्होंने नशा से दूरी बना ली है। ओएसटी सेंटर में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि हाटा ब्लॉक का एक युवक बीटेक की तैयारी करने लखनऊ गया था। वहां जाने के बाद नशे का सेवन करने लगा। बाद में नशे का इंजेक्शन लेने लगा। घर वाले इसको लेकर काफी चिंतित थे, करीब नौ माह पूर्व उसे चिह्नित किया गया। इन दिनों उसने नशे से दूरी बना ली है।


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सीएमओ के अधीन नशामुक्ति केंद्र संचालित करने की व्यवस्था मेडिकल कॉलेज में हैं लेकिन मैन पॉवर व व्यवस्था नहीं होने के कारण अब तक चालू नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में आने वाले नशे के लती लोगों का इलाज किया जाता है। मानसिक रोग विभाग में 14 से 30 वर्ष उम्र के लोग अधिक आ रहे हैं। मेडिसिन विभाग और मानसिक रोग विभाग के सहयोग से उनका इलाज किया जा रहा है। -डॉ. स्नेह कुमार, मानसिक रोग विभाग

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बढ़ता खतरा



-प्रतिबंधित गोलियों और नशीले इंजेक्शनों की ओर बढ़ रहा रुझान।



-कम उम्र के युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने के मामले बढ़ रहे।



-नशे की लत से पढ़ाई, रोजगार और पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा असर।



-अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा धंधा।
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