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Kushinagar News: देवतहां सीएचसी में बवाल से डॉक्टरों में गुस्सा, उपद्रवियों पर कार्रवाई की मांग
Thu, 07 May 2026 02:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 07 May 2026 02:22 AM IST
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सीएमओ को मांग पत्र देते प्रांतीय सेवा संघ के पदाधिकारी।संवाद
- फोटो : samvad
पडरौना। सर्पदंश से किशोर की मौत के बाद देवतहां सीएचसी में मंगलवार को हुए बवाल और स्वास्थ्यकर्मियों की पिटाई से नाराज डाॅक्टरों ने बुधवार सुबह कार्य बहिष्कार कर दिया। सीएमओ के समझाने के बाद माने डॉक्टरों ने डीएम महेंद्र सिंह तंवर से मिलकर प्रकरण की जांच कराने और स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट करने वालों पर कार्रवाई की मांग की। डीएम ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए हाटा एसडीएम योगेश्वर सिंह को जांच का निर्देश दिया। डाॅक्टरों ने बृहस्पतिवार से पट्टी बांधकर कार्य करने का निर्णय लिया है। उपद्रवियों पर कार्रवाई नहीं होने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी।
मंगलवार को अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के कोटवा गांव निवासी विजेंद्र सिंह के 13 वर्षीय पुत्र नितेश सिंह को सांप डस लिया था। परिजन उसे लेकर देवतहां सीएचसी पहुंचे। यहां से इलाज के बाद डाॅक्टरों ने गोरखपुर एम्स रेफर कर दिया था। वहां पहुंचने पर डाॅक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन नितेश का शव लेकर सीएचसी पर पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इलाज में देरी व लापरवाही का आरोप लगाकर करीब साढ़े छह घंटे तक बवाल किया था। इसके चलते पूरे दिन ओपीडी और देर शाम तक इमरजेंसी सेवा बाधित रही।
इस घटना से नाराज डाॅक्टरों ने बुधवार सुबह कसया सीएचसी अधीक्षक और प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. मारकंंडेय चतुर्वेदी के नेतृत्व में कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। इसकी जानकारी होने पर सीएमओ ने सभी को समझाया। इसके बाद डाक्टर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। यहां से डीएम कार्यालय पहुंचकर मांग पत्र दिया। डाॅक्टरों ने कहा कि मरीजों को रेफर नहीं करने और वहीं पर भर्ती इलाज पर जोर दिया जाता है। ऐसा करने पर मरीज की मौत होती है तो लोग विवाद करते हैं।
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देवतहां सीएचसी में हुए बवाल से स्वास्थ्यकर्मी दहशत में हैं। डीएम ने हाटा एसडीएम को जांच का निर्देश दिया। उन्हाेंने आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।
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अस्पताल में खामोशी, हर आहट पर चौकन्ने दिखे लोग
सुकरौली। देवतहां सीएचसी पर बीते मंगलवार को हुए बवाल के बाद स्वास्थ्यकर्मियों में बुधवार को नाराजगी देखी गई। डाॅक्टरों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद था, तब भी भीड़ ने डाक्टर की पिटाई की। मंगलवार की रात पुलिस की मौजूदगी में इमरजेंसी चली, जबकि बुधवार को ओपीडी में सन्नाटा पसरा था और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी डरे सहमे नजर आए।
बुधवार को सीएचसी अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसरा रहा और कर्मचारी भय के साये में काम करते दिखे। पर्ची काउंटर पर तैनात कर्मचारी परवेज ने बताया कि दोपहर एक बजे तक कुल 58 मरीजों का पंजीकरण किया गया। वहीं, पैथालॉजी में 18 मरीजों के सैंपल जांच की गई। ओपीडी में डॉ. आरडी द्विवेदी मरीजों को देख रहे थे। दवा कक्ष में फार्मासिस्ट संजीव सिंह दवाएं दे रहे थे। अस्पताल में सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल नहीं दिखी। कई कर्मचारी एक साथ एक जगह बैठे रहे और आपस में घटना पर चर्चा करते दिखे। अस्पताल के गलियारों में खामोशी छाई रही। मरीज और उनके तीमारदार भी असहज महसूस करते रहे।
कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. हेमंत वर्मा सहित अन्य चिकित्सक मुख्यालय गए हैं। इस कारण व्यवस्थाएं सीमित स्टाफ के सहारे संचालित होती दिखीं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अस्पताल परिसर में एक अतिरिक्त पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है, जबकि पहले से मौजूद सुरक्षा गार्ड भी मुस्तैद नजर आया। इसके बावजूद कर्मचारियों के मन में भय साफ झलक रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को व्यवस्था सुधारने के साथ-साथ कर्मचारियों और मरीजों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
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मंगलवार को अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के कोटवा गांव निवासी विजेंद्र सिंह के 13 वर्षीय पुत्र नितेश सिंह को सांप डस लिया था। परिजन उसे लेकर देवतहां सीएचसी पहुंचे। यहां से इलाज के बाद डाॅक्टरों ने गोरखपुर एम्स रेफर कर दिया था। वहां पहुंचने पर डाॅक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन नितेश का शव लेकर सीएचसी पर पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इलाज में देरी व लापरवाही का आरोप लगाकर करीब साढ़े छह घंटे तक बवाल किया था। इसके चलते पूरे दिन ओपीडी और देर शाम तक इमरजेंसी सेवा बाधित रही।
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इस घटना से नाराज डाॅक्टरों ने बुधवार सुबह कसया सीएचसी अधीक्षक और प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. मारकंंडेय चतुर्वेदी के नेतृत्व में कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। इसकी जानकारी होने पर सीएमओ ने सभी को समझाया। इसके बाद डाक्टर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। यहां से डीएम कार्यालय पहुंचकर मांग पत्र दिया। डाॅक्टरों ने कहा कि मरीजों को रेफर नहीं करने और वहीं पर भर्ती इलाज पर जोर दिया जाता है। ऐसा करने पर मरीज की मौत होती है तो लोग विवाद करते हैं।
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देवतहां सीएचसी में हुए बवाल से स्वास्थ्यकर्मी दहशत में हैं। डीएम ने हाटा एसडीएम को जांच का निर्देश दिया। उन्हाेंने आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।
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अस्पताल में खामोशी, हर आहट पर चौकन्ने दिखे लोग
सुकरौली। देवतहां सीएचसी पर बीते मंगलवार को हुए बवाल के बाद स्वास्थ्यकर्मियों में बुधवार को नाराजगी देखी गई। डाॅक्टरों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद था, तब भी भीड़ ने डाक्टर की पिटाई की। मंगलवार की रात पुलिस की मौजूदगी में इमरजेंसी चली, जबकि बुधवार को ओपीडी में सन्नाटा पसरा था और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी डरे सहमे नजर आए।
बुधवार को सीएचसी अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसरा रहा और कर्मचारी भय के साये में काम करते दिखे। पर्ची काउंटर पर तैनात कर्मचारी परवेज ने बताया कि दोपहर एक बजे तक कुल 58 मरीजों का पंजीकरण किया गया। वहीं, पैथालॉजी में 18 मरीजों के सैंपल जांच की गई। ओपीडी में डॉ. आरडी द्विवेदी मरीजों को देख रहे थे। दवा कक्ष में फार्मासिस्ट संजीव सिंह दवाएं दे रहे थे। अस्पताल में सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल नहीं दिखी। कई कर्मचारी एक साथ एक जगह बैठे रहे और आपस में घटना पर चर्चा करते दिखे। अस्पताल के गलियारों में खामोशी छाई रही। मरीज और उनके तीमारदार भी असहज महसूस करते रहे।
कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. हेमंत वर्मा सहित अन्य चिकित्सक मुख्यालय गए हैं। इस कारण व्यवस्थाएं सीमित स्टाफ के सहारे संचालित होती दिखीं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अस्पताल परिसर में एक अतिरिक्त पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है, जबकि पहले से मौजूद सुरक्षा गार्ड भी मुस्तैद नजर आया। इसके बावजूद कर्मचारियों के मन में भय साफ झलक रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को व्यवस्था सुधारने के साथ-साथ कर्मचारियों और मरीजों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।