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एक लाख क्यूसेक पहुंचा गंडक का डिस्चार्ज, बांसी नदी उफनाई
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सेवरही में बांसी नदी की जलस्तर बढ़ने से डूबी धान की फसल।संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
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एक लाख क्यूसेक पहुंचा गंडक का डिस्चार्ज, बांसी नदी उफनाई
- पिपराघाट समेत अन्य गांव के किसानों में छाई मायूसी
- धान की फसल डूबने की आशंका से सहमे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक के पार पहुंचने के बाद बांसी नदी उफना गई है। इसके चलते पिपराघाट सहित अन्य कई गांवों में सैकड़ों एकड़ खेत में लगी धान की फसल पर डूबने का खतरा मंडराने लगा है।
पिपराघाट सहित राजपुर खाश, बेनिया पिपरा, नरवा टोला, इमिलिया टोला, जोगनी, देवनारायण टोला, रानी गंज, व्रह्मपुर, पिरोजहा, चौकी टोला, उपाध्याय टोला, शिव टोला, उपाध्याय टोला, मुसहरी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला आदि गांव गंडक नदी व बांसी नदी के दोआबे में बसे हैं। इन गांव के किसान खेतों में छिटकवा धान की फसल है। लेकिन गंडक नदी का डिस्चार्ज एक लाख सोलह हजार क्यूसेक पहुंचने के बाद इन खेतों में बाढ़ का पानी भरने लगा है। साथ ही बांसी नदी भी अब उफान पर आ गई है। उसके किनारे के खेत जलमग्न होने लगे हैं। खेत में लगी धान की फसल भी डूबने लगी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
क्षेत्र के ध्रुव निषाद, सरल शर्मा, विश्वनाथ चौधरी, श्रीनिवास मिश्र, राकेश तिवारी, कैलाश सिंह, पुष्कर गिरी, पन्नालाल यादव आदि किसानों का कहना है कि गंडक नदी का पानी बांसी नदी में आकर अभी से जलप्लावन की स्थिति उत्पन्न कर दी है। यदि गंडक का डिस्चार्ज इसी तरह बढ़ता रहा तो फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
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- पिपराघाट समेत अन्य गांव के किसानों में छाई मायूसी
- धान की फसल डूबने की आशंका से सहमे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक के पार पहुंचने के बाद बांसी नदी उफना गई है। इसके चलते पिपराघाट सहित अन्य कई गांवों में सैकड़ों एकड़ खेत में लगी धान की फसल पर डूबने का खतरा मंडराने लगा है।
पिपराघाट सहित राजपुर खाश, बेनिया पिपरा, नरवा टोला, इमिलिया टोला, जोगनी, देवनारायण टोला, रानी गंज, व्रह्मपुर, पिरोजहा, चौकी टोला, उपाध्याय टोला, शिव टोला, उपाध्याय टोला, मुसहरी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला आदि गांव गंडक नदी व बांसी नदी के दोआबे में बसे हैं। इन गांव के किसान खेतों में छिटकवा धान की फसल है। लेकिन गंडक नदी का डिस्चार्ज एक लाख सोलह हजार क्यूसेक पहुंचने के बाद इन खेतों में बाढ़ का पानी भरने लगा है। साथ ही बांसी नदी भी अब उफान पर आ गई है। उसके किनारे के खेत जलमग्न होने लगे हैं। खेत में लगी धान की फसल भी डूबने लगी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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क्षेत्र के ध्रुव निषाद, सरल शर्मा, विश्वनाथ चौधरी, श्रीनिवास मिश्र, राकेश तिवारी, कैलाश सिंह, पुष्कर गिरी, पन्नालाल यादव आदि किसानों का कहना है कि गंडक नदी का पानी बांसी नदी में आकर अभी से जलप्लावन की स्थिति उत्पन्न कर दी है। यदि गंडक का डिस्चार्ज इसी तरह बढ़ता रहा तो फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
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