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Kushinagar News: आधी-अधूरी तैयारी के बीच बांसी में आस्था की डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु

Wed, 05 Nov 2025 12:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 05 Nov 2025 12:52 AM IST
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Devotees will take a dip of faith in Bansi amidst half-hearted preparations.
पडरौना/पडरौना। कार्तिक पूर्णिमा स्नान को लेकर विशुनपुरा ब्लॉक के प्रसिद्ध बांसी घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार की दोपहर बाद से ही जिले समेत आसपास के जनपदों से श्रद्धालु बांसी पहुंचने लगे, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर दिखी।
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पडरौना से बांसी घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को टेंपो और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। मुख्य मार्ग पर जगह-जगह जाम की स्थिति भी बनी रही। नदी में सुरक्षा को देखते हुए बांस लगा दिए गए हैं। हालांकि नदी की सफाई इस बार बेहतर नहीं हो पाई है।
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बांसी पुलिस के पास नदी में गंदगी से पटी हुई है। यानी इस बार भी आधी-अधूरी तैयारी के बीच ही बांसी नदी में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में इस पौराणिक पवित्र नदी का उद्भव हुआ था। जब भगवान श्रीराम अपने विवाह के बाद बरातियों सहित अयोध्या जा रहे थे, तब वे बरातियों के साथ रामघाट किनारे रात्रि विश्राम किए थे। बताया जाता है कि उस समय वहां जल की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में श्रीराम ने नदी नारायणी से एक जलस्रोत की मांग की।
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रामघाट स्थित रामजानकी मंदिर के महंत गोपाल दास ने बताया कि श्रीराम के आग्रह पर माता नारायणी ने एक जलस्रोत प्रदान किया, जो वर्तमान में नारायणी से निकलकर रामघाट बांसी होते हुए पिपरा घाट नारायणी में समाहित हो जाती है। इसी जलस्रोत के किनारे रामघाट व बांसी घाट स्थित है। इसीलिए इस जलस्रोत का नाम बांसी नदी के रूप में विख्यात है। बांसी नदी तट स्थित रामघाट बांसी व शिवा घाट और पिपरा घाट पर बांसी नदी में पवित्र स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं।
बुधवार की सुबह से ही श्रद्धालु बांसी नदी में स्नान करेंगे। इसको लेकर बीते कई दिनों से प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई कराई जा रही है लेकिन अभी तक मुकम्मल घाट की सफाई नहीं हो पाई गई। कार्तिक पूर्णिमा से पहले प्रशासन ने सफाई की बात कही थी लेकिन बांसी नदी की स्थिति में खास सुधार नहीं दिखा।

श्रद्धालुओं ने बताया कि घाट के कई हिस्सों में कचरा और जलकुंभी जमा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर नदी में बांस लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालु सुरक्षित स्नान कर सकें।
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