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Kushinagar News: काग भुशुंडी प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
Tue, 10 Mar 2026 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:02 AM IST
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परसिया गांव के शिव मंदिर परिसर में कथा सुनाते प्रमोद ।संवाद
सुकरौली। क्षेत्र के परसिया में भवानी शंकर मंदिर के परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रुद्र महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को श्रीराम कथा के दौरान कथावाचक प्रमोद ने काग भुशुंडी प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि काग भुशुंडी भगवान श्रीराम के परम भक्त थे, जिनकी भक्ति और तपस्या के कारण उन्हें अमरत्व की प्राप्ति हुई।
कथावाचक ने बताया कि जब गरुड़ जी के मन में भगवान श्रीराम के अवतार और उनकी लीलाओं को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ, तब उन्हें काग भुशुंडी के पास भेजा गया। काग भुशुंडी ने उन्हें रामकथा का विस्तार से वर्णन किया। बताया कि प्रभु की भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च मार्ग है। उन्होंने कहा कि अहंकार और संदेह मनुष्य को सत्य से दूर कर देते हैं, जबकि भक्ति और सत्संग से जीवन में ज्ञान और शांति की प्राप्ति होती है।
प्रमोद महाराज ने कहा कि रामकथा का श्रवण मनुष्य के भीतर सकारात्मकता और धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करता है। कथा के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे और भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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इस दौरान अमरनाथ तिवारी, उमेश तिवारी, राजेंद्र तिवारी, श्यामनारायण तिवारी, विश्वजीत तिवारी, विश्वजीत तिवारी, दीनदयाल तिवारी, राजू तिवारी व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथावाचक ने बताया कि जब गरुड़ जी के मन में भगवान श्रीराम के अवतार और उनकी लीलाओं को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ, तब उन्हें काग भुशुंडी के पास भेजा गया। काग भुशुंडी ने उन्हें रामकथा का विस्तार से वर्णन किया। बताया कि प्रभु की भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च मार्ग है। उन्होंने कहा कि अहंकार और संदेह मनुष्य को सत्य से दूर कर देते हैं, जबकि भक्ति और सत्संग से जीवन में ज्ञान और शांति की प्राप्ति होती है।
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प्रमोद महाराज ने कहा कि रामकथा का श्रवण मनुष्य के भीतर सकारात्मकता और धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करता है। कथा के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे और भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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इस दौरान अमरनाथ तिवारी, उमेश तिवारी, राजेंद्र तिवारी, श्यामनारायण तिवारी, विश्वजीत तिवारी, विश्वजीत तिवारी, दीनदयाल तिवारी, राजू तिवारी व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।