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Kushinagar News: कंस के अत्याचार की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
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सलेमगढ़। तरया सुजान क्षेत्र के बहादुरपुर स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक उपेंद्र कृष्ण पराशर जी, मुक्तिधाम काशी ने कंस के अत्याचार, देवकी-वासुदेव के कारावास और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथावाचक ने बताया कि आकाशवाणी हुई कि कंस की जिस बहन देवकी से वह इतना प्रेम करता है, उसी के गर्भ से जन्म लेने वाला आठवां पुत्र कंस के वध का कारण बनेगा। आकाशवाणी सुनकर कंस ने देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया। इसके बाद देवकी से जन्म लेने वाली संतानों को कंस एक-एक कर मारता गया। कथा के अनुसार, आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव उन्हें सूप में रखकर यमुना पार करते हुए ब्रज पहुंचे और वहां उन्हें यशोदा के पास पहुंचा दिया। इसके बाद वासुदेव यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर कारागार लौट आए। कंस ने जब उस कन्या को मारने का प्रयास किया तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गई। यही देवी आगे चलकर विंध्याचल पर्वत पर विराजमान हुईं, जिन्हें श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के रूप में श्रद्धा से पूजते हैं। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान रवि रावत, धनंजय यादव, अनुराग कुशवाहा, रितेश ठाकुर, मुकुल शर्मा, आनंद पटेल, सोनू रावत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथावाचक ने बताया कि आकाशवाणी हुई कि कंस की जिस बहन देवकी से वह इतना प्रेम करता है, उसी के गर्भ से जन्म लेने वाला आठवां पुत्र कंस के वध का कारण बनेगा। आकाशवाणी सुनकर कंस ने देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया। इसके बाद देवकी से जन्म लेने वाली संतानों को कंस एक-एक कर मारता गया। कथा के अनुसार, आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव उन्हें सूप में रखकर यमुना पार करते हुए ब्रज पहुंचे और वहां उन्हें यशोदा के पास पहुंचा दिया। इसके बाद वासुदेव यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर कारागार लौट आए। कंस ने जब उस कन्या को मारने का प्रयास किया तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गई। यही देवी आगे चलकर विंध्याचल पर्वत पर विराजमान हुईं, जिन्हें श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के रूप में श्रद्धा से पूजते हैं। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान रवि रावत, धनंजय यादव, अनुराग कुशवाहा, रितेश ठाकुर, मुकुल शर्मा, आनंद पटेल, सोनू रावत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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