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Kushinagar News: घर में ही पिता की ‘मर्यादा’ की बलि चढ़ गईं बेटियां
Tue, 09 Jun 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:24 AM IST
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सेवरही के देवनारायण टोला पर घटना स्थल पर तैनात पुलिसकर्मी।संवाद
तमकुहीरोड। सेवरही थाना क्षेत्र के पिपराघाट गांव के देवनरायन टोला में सोमवार की शाम हुई वारदात ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और पिता के रिश्ते को भी तार-तार कर दिया है। लोक-लाज कहें या झूठी शान, दो सगी बहनों की जिंदगी को उनके ही घर में बेरहमी से खत्म कर दिया गया।
जिस घर में बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती रहेगी, वहां सोमवार की शाम सिर्फ खामोशी और घर के एक कमरे में खून से लथपथ दो सगी बहनों लाशें बंद कमरे में पड़ी थीं। पास ही पड़े खून से सने लाठी-डंडे चीख-चीख कर बयां कर रहे थे कि मौत से पहले 20 वर्षीय लाली और 18 वर्षीय शीला पर कितनी बेरहमी से प्रहार किया गया होगा। जब लाठियां बरस रही होंगी, तो उन दोनों बहनों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की होंगी, चीखी-चिल्लाई होंगी, गिड़गिड़ाई होंगी... लेकिन हत्यारे के दिल में ममता और रहम का एक कतरा भी नहीं जागा, क्यों कि कमरे में खून से सनी दोनों बहनों की लाशों को देखने के बाद कुछ ऐसा ही कहानी बयां कर रही थी।
करीब आठ माह पूर्व मां की मौत के बाद दोनों सगी बहनें अपनी सुध-बुध खो चुकी थीं। मां रामप्रसाद पहले विदेश रहता था। कुछ माह से घर पर रहता है और गांव कुछ ऐसे लोगों का साथ मिला कि अक्सर वह नशे में रहता है। मां की कमी को पूरा करने और उन्हें सही राह दिखाने की जिम्मेदारी जिस पिता के कंधों पर थी, आरोप है कि वही पिता उनकी जिंदगी का काल बन गया।
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बताया जा रहा है कि मां के नहीं रहने के बाद से दोनों सगी बहनों राह भटक चुकी थीं और गांव के ही कुछ युवकों के साथ आए दिन घर से निकल जाती थीं। इसको लेकर पहले कई बार पंचायत व मामला थाने तक पहुंच चुका था। इससे परिजन काफी परेशान होते रहते थे। लेकिन दोनों सगी बहनों की बेरहमी से पीटकर हत्या करना ही सिर्फ रास्ता था। सामाजिक बदनामी के चलते एक बाप के हाथ नहीं कांपे जब वह अपने बेटियों पर लाठी बरसा रहा था,यानी बाप के कुछ समझ नहीं आ रहा था,सिर्फ उसे बेटियों को मौत के घाट उतराना ही रास्ता सूझ रहा था। ऐसे में बदनामी के डर से खुद को किया दागी किया और खौफनाक वारदात को अंजाम देकर घर से फरार हो गया। अब बेटियों के खून से सने हाथों के साथ पिता समाज में सिर ऊंचा नहीं कर पाएगा। इस वारदात के बाद से वह समाज के डर से नहीं, बल्कि अपने ही गुनाह के डर से कानून से मुंह छिपाए इधर-उधर भटकता फिरेगा।
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जिस घर में बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती रहेगी, वहां सोमवार की शाम सिर्फ खामोशी और घर के एक कमरे में खून से लथपथ दो सगी बहनों लाशें बंद कमरे में पड़ी थीं। पास ही पड़े खून से सने लाठी-डंडे चीख-चीख कर बयां कर रहे थे कि मौत से पहले 20 वर्षीय लाली और 18 वर्षीय शीला पर कितनी बेरहमी से प्रहार किया गया होगा। जब लाठियां बरस रही होंगी, तो उन दोनों बहनों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की होंगी, चीखी-चिल्लाई होंगी, गिड़गिड़ाई होंगी... लेकिन हत्यारे के दिल में ममता और रहम का एक कतरा भी नहीं जागा, क्यों कि कमरे में खून से सनी दोनों बहनों की लाशों को देखने के बाद कुछ ऐसा ही कहानी बयां कर रही थी।
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करीब आठ माह पूर्व मां की मौत के बाद दोनों सगी बहनें अपनी सुध-बुध खो चुकी थीं। मां रामप्रसाद पहले विदेश रहता था। कुछ माह से घर पर रहता है और गांव कुछ ऐसे लोगों का साथ मिला कि अक्सर वह नशे में रहता है। मां की कमी को पूरा करने और उन्हें सही राह दिखाने की जिम्मेदारी जिस पिता के कंधों पर थी, आरोप है कि वही पिता उनकी जिंदगी का काल बन गया।
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बताया जा रहा है कि मां के नहीं रहने के बाद से दोनों सगी बहनों राह भटक चुकी थीं और गांव के ही कुछ युवकों के साथ आए दिन घर से निकल जाती थीं। इसको लेकर पहले कई बार पंचायत व मामला थाने तक पहुंच चुका था। इससे परिजन काफी परेशान होते रहते थे। लेकिन दोनों सगी बहनों की बेरहमी से पीटकर हत्या करना ही सिर्फ रास्ता था। सामाजिक बदनामी के चलते एक बाप के हाथ नहीं कांपे जब वह अपने बेटियों पर लाठी बरसा रहा था,यानी बाप के कुछ समझ नहीं आ रहा था,सिर्फ उसे बेटियों को मौत के घाट उतराना ही रास्ता सूझ रहा था। ऐसे में बदनामी के डर से खुद को किया दागी किया और खौफनाक वारदात को अंजाम देकर घर से फरार हो गया। अब बेटियों के खून से सने हाथों के साथ पिता समाज में सिर ऊंचा नहीं कर पाएगा। इस वारदात के बाद से वह समाज के डर से नहीं, बल्कि अपने ही गुनाह के डर से कानून से मुंह छिपाए इधर-उधर भटकता फिरेगा।

सेवरही के देवनारायण टोला पर घटना स्थल पर तैनात पुलिसकर्मी।संवाद

सेवरही के देवनारायण टोला पर घटना स्थल पर तैनात पुलिसकर्मी।संवाद