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Kushinagar News: वैज्ञानिक तकनीक से करें मखाना की खेती, होगा मुनाफा
Sat, 14 Mar 2026 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 14 Mar 2026 12:17 AM IST
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पडरौना। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सरगटिया के प्रशिक्षण सभागार में शुक्रवार को जिला उद्यान विभाग की तरफ से किसानों काे मखाना की खेती की जानकारी दी गई। बताया गया कि वैज्ञानिक तकनीक से मखाना की खेती से मुनाफा होगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यहां की जलवायु बेहतर है। जिले के किसी भी तालाब में इसकी खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मखाना अत्यंत पौष्टिक एवं उच्च मूल्य वाली फसल है। इसकी मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्रों, तालाबों एवं पोखरों का उपयोग कर किसान मखाना की खेती से अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा (बिहार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीआर जाना ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में मखाना एक संभावनाशील फसल के रूप में उभर रही है। बिहार के दरभंगा क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां के विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्तर प्रदेश के किसान भी इस फसल से अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. राहुल कुमार राउत, वैज्ञानिक ने मखाना की वैज्ञानिक खेती, बीज चयन, रोपण विधि, पोषक तत्व प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने की उन्नत तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मखाना की खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और इसके प्रसंस्करण एवं विपणन की भी व्यापक संभावनाएं हैं।
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इस दौरान उद्यान निरीक्षक विपिन उपाध्याय, डॉ. अरुण प्रताप सिंह, ऋद्धि वर्मा, श्रुति वी सिंह, विशाल सिंह, अखिलेश्वर विश्वकर्मा, विपिन उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यहां की जलवायु बेहतर है। जिले के किसी भी तालाब में इसकी खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मखाना अत्यंत पौष्टिक एवं उच्च मूल्य वाली फसल है। इसकी मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्रों, तालाबों एवं पोखरों का उपयोग कर किसान मखाना की खेती से अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
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राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा (बिहार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीआर जाना ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में मखाना एक संभावनाशील फसल के रूप में उभर रही है। बिहार के दरभंगा क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां के विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्तर प्रदेश के किसान भी इस फसल से अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. राहुल कुमार राउत, वैज्ञानिक ने मखाना की वैज्ञानिक खेती, बीज चयन, रोपण विधि, पोषक तत्व प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने की उन्नत तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मखाना की खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और इसके प्रसंस्करण एवं विपणन की भी व्यापक संभावनाएं हैं।
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इस दौरान उद्यान निरीक्षक विपिन उपाध्याय, डॉ. अरुण प्रताप सिंह, ऋद्धि वर्मा, श्रुति वी सिंह, विशाल सिंह, अखिलेश्वर विश्वकर्मा, विपिन उपाध्याय आदि मौजूद रहे।