फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   crocodiles increased

Kushinagar News: घड़ियालों को रास आने लगी गंडक नदी

Sun, 27 Nov 2022 05:30 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 05:30 AM IST
विज्ञापन
crocodiles increased
गंडक नदी के किनारे घड़ियाल की फाइल फोटो।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR
घड़ियालों को रास आने लगी गंडक नदी
विज्ञापन

12 वर्षों में दस से बढ़कर 500 पहुंची घड़ियालों की संख्या
विद्याधर तिवारी
खड्डा। घड़ियालों को गंडक नदी रास आने लगी है। 12 वर्षों में इनकी संख्या दस से बढ़कर 500 तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के प्रयास से बढ़ रहे इनके कुनबे को और विस्तार देने के लिए नदी के 140 किलोमीटर का हिस्सा संरक्षित करने की योजना बनाई जा रही है।
वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से खड्डा क्षेत्र होते हुए सोनपुर में गंगा नदी में मिलने वाली गंडक नदी (नारायणी) में घड़ियालों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण प्रेमी उत्साहित हैं। अगस्त में 140 अंडों से सुरक्षित निकले इनके शिशुओं को नदी में छोड़ा गया है। यह 11 वर्ष में व्यस्क हो जाएंगे। वाइल्ड लाइफ से जुड़े जानकारों के मुताबिक वर्ष 2010 में तिलका मांझी भागलपुर बिहार (घड़ियाल कंजर्वेशन एलाएंस) की ओर से गंडक नदी के वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक सर्वे किया गया तो चार मादा व छह नर सहित कुल दस घड़ियाल होने की जानकारी प्राप्त हुई थी। बाद में संजय गांधी प्राणी उद्यान पटना से कृत्रिम रूप से पैदा हुए घड़ियालों के 30 बच्चों को गंडक नदी में छोड़ा गया। धीरे धीरे हर वर्ष इनकी संख्या बढ़ती गई, जो अब 500 तक पहुंच गई है।
विज्ञापन

------
अंडों व घड़ियालों को सुरक्षित रखने के लिए मास्टर प्लान तैयार
- जानकारों के अनुसार घड़ियाल नदी के किनारे रेत में अंडे देकर उसे ढक देते हैं, लेकिन नदी के तेज बहाव, मानवीय गतिविधि, खनन, मछुआरों की गलती आदि वजहों से अंडों को नुकसान पहुंचता है। उदाहरण के लिए इस वर्ष कुल 5 घोसलों में मादा घड़ियालों ने अंडे रखे थे, लेकिन तीन ही सुरक्षित बच पाए। मास्टर प्लान के जरिए कुछ लोगों को प्रशिक्षित कर अंडे वाले घोसलों को चिह्नित कर सुरक्षा प्रदान करने तथा अंडों से बच्चों के बाहर निकलने पर नदी में छोड़ दिए जाने की कवायद शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त बगहां से फतेहाबाद (मुजफ्फरपुर) तक 140 किलोमीटर लंबाई में नदी को घड़ियाल संरक्षित क्षेत्र बनाए जाने का प्रस्ताव है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------
घड़ियालों के बारे में कुछ रोचक जानकारी
- घड़ियाल व मगरमच्छ दो अलग प्रजाति हैं।
- घड़ियाल साफ व मीठे पानी में रहना पसंद करते हैं। यह मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं होते हैं।
- घड़ियाल छोटी मछलियों व पानी में सड़े गले मांस को खाते हैं। इससे पानी की सफाई हो जाती है।
- घड़ियाल की औसत उम्र 50 से 60 वर्ष होती है। अपवाद स्वरूप 100 वर्ष तक जिंदा रह सकते हैं।
- ग्यारह वर्ष के होने पर घड़ियाल वयस्क हो जाते हैं।
- इनका वजन 150 से 250 किलोग्राम तक तथा लंबाई 11 से 25 फीट तक होती है।
- घड़ियाल पानी व जमीन दोनों जगह चल सकते हैं। पानी में 30 किलोमीटर तो जमीन पर 17 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार होती है।
- धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है कि इसी नारायणी नदी में ग्राह (घड़ियाल) व गजराज (हाथी) में भीषण युद्ध हुआ था। भगवान विष्णु ने ग्राह से हाथी की रक्षा की थी।

------
क्या कहते हैं वीटीआर के सीएफ
- वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक नेसामनी का कहना है कि प्रकृति के संतुलन के लिए घड़ियाल अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं। यह विलुप्त श्रेणी में शामिल हैं। इनके रख रखाव व विस्तार के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं। घड़ियालों की संख्या बढ़ना अत्यंत ही सुखद है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed