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मनरेगा घोटाला : ईडी जुटा रही आरोपियों की संपत्ति का ब्योरा
Kushinagar
Updated Tue, 28 Jun 2016 12:30 AM IST
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जांच
- फोटो : demopic
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खड्डा ब्लॉक के चार गांवों में हुए मनरेगा घोटाले से जुड़े आरोपियों की संपत्ति का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। इसके लिए आरोपियों को नोटिस भी जारी हो चुका है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही ईडी आरोपियों की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। दरअसल, वर्ष 2007 से 2010 के बीच हुए इस घोटाले की जांच सीबीआई पहले ही पूरा कर चुकी है।
कुशीनगर जिले में मनरेगा घोटाले के तहत लाखों रुपये की हेराफेरी हुई थी। इसकी पुष्टि सीबीआई जांच में हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2014 में सीबीआई ने इसकी जांच शुरू की थी। इसमें एक मामला चर्चित रोहुअवा पुल समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में हुए घोटाले का था जिसमें नौ लोग आरोपी बनाए गए हैं।
दूसरा मामला खड्डा विकास खंड के चार गांवों भैंसहा, पकड़ी बृजलाल, शाहपुर व नरायनपुर गांवों में हुए घोटाले का था, जिसमें तत्कालीन ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी, तकनीकी सहायक एवं एक जिला पंचायत सदस्य के भाई सहित सात लोग आरोपी हैं। कुछ ही वर्षों में की गई लाखों रुपये के इस गड़बड़ी के मामले में सीबीआई के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच शुरू कर दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करते हुए इस साल चार जनवरी को आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपियों को जेल भी जाना पड़ा था। वर्तमान में सभी जमानत पर चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार खड्डा ब्लॉक के चार गांवों में हुए घोटाले के मामले में ईडी की जांच तेज हो गई है।
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ईडी ने इस मामले से जुड़े सात लोगों को पिछले महीने ही नोटिस भेजकर उनकी संपत्तियों से संबंधित ब्योरा मांगा है। इसमें उन्हें अपनी स्वयं की पैतृक संपत्ति के अलावा वर्तमान संपत्ति और परिवार के अन्य लोगों की संपत्तियों का भी विवरण देना है। वहीं ईडी ने भी अपने स्तर से भी तमाम रिकार्ड जुटाएं है। सूत्र बताते हैं कि अब तक जुटाए गए आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि एक आरोपी ने ग्राम प्रधानों व सेक्रेटरी पर दबाव बनाकर करीब 40 लाख रुपये से ज्यादा का धन स्वयं प्राप्त किया है। आरोपियों ने कुछ ही वर्षों में खुद के अलावा अपने परिवार के लोगों व कारोबार के सहयोगियों के साथ मिलकर संपत्तियों का क्रय-विक्रय भी किया है। नोटिस भेजना घोटाले से अर्जित की गई संपत्तियों को जब्त करने की शुरूआत है। जिस भी संपत्ति को अर्जित करने में मनरेगा घोटाले की रकम का उपयोग हुआ होगा, उसे जब्त किया जाएगा।
इस संबंध मे सीबीआई के डीएसपी/विवेचक पीके श्रीवास्तव का कहना है कि ईडी की जांच अभी चल रही है। आरोपियों की संपत्तियां जब्त करने समेत सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत ही पूरी की जाएगी।
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कुशीनगर जिले में मनरेगा घोटाले के तहत लाखों रुपये की हेराफेरी हुई थी। इसकी पुष्टि सीबीआई जांच में हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2014 में सीबीआई ने इसकी जांच शुरू की थी। इसमें एक मामला चर्चित रोहुअवा पुल समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में हुए घोटाले का था जिसमें नौ लोग आरोपी बनाए गए हैं।
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दूसरा मामला खड्डा विकास खंड के चार गांवों भैंसहा, पकड़ी बृजलाल, शाहपुर व नरायनपुर गांवों में हुए घोटाले का था, जिसमें तत्कालीन ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी, तकनीकी सहायक एवं एक जिला पंचायत सदस्य के भाई सहित सात लोग आरोपी हैं। कुछ ही वर्षों में की गई लाखों रुपये के इस गड़बड़ी के मामले में सीबीआई के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच शुरू कर दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करते हुए इस साल चार जनवरी को आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपियों को जेल भी जाना पड़ा था। वर्तमान में सभी जमानत पर चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार खड्डा ब्लॉक के चार गांवों में हुए घोटाले के मामले में ईडी की जांच तेज हो गई है।
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ईडी ने इस मामले से जुड़े सात लोगों को पिछले महीने ही नोटिस भेजकर उनकी संपत्तियों से संबंधित ब्योरा मांगा है। इसमें उन्हें अपनी स्वयं की पैतृक संपत्ति के अलावा वर्तमान संपत्ति और परिवार के अन्य लोगों की संपत्तियों का भी विवरण देना है। वहीं ईडी ने भी अपने स्तर से भी तमाम रिकार्ड जुटाएं है। सूत्र बताते हैं कि अब तक जुटाए गए आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि एक आरोपी ने ग्राम प्रधानों व सेक्रेटरी पर दबाव बनाकर करीब 40 लाख रुपये से ज्यादा का धन स्वयं प्राप्त किया है। आरोपियों ने कुछ ही वर्षों में खुद के अलावा अपने परिवार के लोगों व कारोबार के सहयोगियों के साथ मिलकर संपत्तियों का क्रय-विक्रय भी किया है। नोटिस भेजना घोटाले से अर्जित की गई संपत्तियों को जब्त करने की शुरूआत है। जिस भी संपत्ति को अर्जित करने में मनरेगा घोटाले की रकम का उपयोग हुआ होगा, उसे जब्त किया जाएगा।
इस संबंध मे सीबीआई के डीएसपी/विवेचक पीके श्रीवास्तव का कहना है कि ईडी की जांच अभी चल रही है। आरोपियों की संपत्तियां जब्त करने समेत सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत ही पूरी की जाएगी।