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कर्जदार को बनाया बंधक
Kushinagar
Updated Wed, 22 Jun 2016 12:16 AM IST
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- फोटो : demo pic
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कर्ज चुकता न करने पर बहोर छपरा गांव के एक व्यक्ति को उसी गांव के साहूकार ने मंगलवार की सुबह बंधक बनाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की पत्नी की गुहार से भी बात नहीं बनी तो उसने पुलिस से गुहार लगाई। गांव पहुंची पुलिस ने कर्जदार को साहूकार के बंधन से मुक्त कराया।
पीड़ित पक्ष के अनुसार रामनरेश और उनके भाई राकेश ने लगभग चार वर्ष पहले अपनी 10 कट्ठा जमीन गांव के ही एक व्यक्ति के पास गिरवी रखकर 75 हजार रुपये कर्ज लिया था। बाद में रामनरेश ने उससे 15 हजार रुपया और कर्ज लिया। रामनरेश के भाई राकेश ने तीन महीने पहले कुछ कर्ज चुकता कर अपने हिस्से की जमीन छुड़ा ली। रामनरेश का आरोप है कि जमीन हाथ से निकलता देख साहूकार ने मनमाना ब्याज जोड़कर कर्ज को तीन लाख रुपया से भी अधिक बताते हुए उससे तगादा शुरू किया।
मंगलवार सुबह लगभग छह बजे साहूकार अपने परिवार के अन्य सदस्यों को साथ लेकर रामनरेश के घर पहुंचा और कर्ज वापसी के लिए दबाव डालने लगा। रामनरेश ने खराब माली हालत का हवाला देते हुए कुछ और वक्त मांगा, लेकिन साहूकार के पक्ष के लोग नहीं माने। वे रामनरेश को पकड़ कर अपने घर ले गए। रामनरेश की पत्नी शांति देवी अपनी दिव्यांग बेटी वंदना को साथ लेकर साहूकार के दरवाजे पर पहुंची और पति को छोड़ देने का आग्रह करने लगी। शांति के अनुसार साहूकार ने कर्ज वापस हुए बिना रामनरेश को छोड़ने से इंकार कर दिया। बात नहीं बनी तो वह थाने पहुंची और पुलिस से मद्द की गुहार लगाई। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे नेबुआ नौरंगिया के पुलिसकर्मी गांव पहुंचे और रामनरेश को छुड़ाकर अपने साथ थाने ले गए।
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इस संबंध में एसओ शैलेष सिंह ने कहा कि मामला जमीन की खरीद से जुड़ा है। जिन लोगों ने रामनरेश को कर्ज दिया था, उन्हें पता लगा कि अब वह जमीन किसी दूसरे को बेंचना चाह रहा है। इस बात की पूछताछ के लिए वे लोग रामनरेश को अपने घर बुलाया था। बंधक बनाने जैसी बात नहीं थी।
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पीड़ित पक्ष के अनुसार रामनरेश और उनके भाई राकेश ने लगभग चार वर्ष पहले अपनी 10 कट्ठा जमीन गांव के ही एक व्यक्ति के पास गिरवी रखकर 75 हजार रुपये कर्ज लिया था। बाद में रामनरेश ने उससे 15 हजार रुपया और कर्ज लिया। रामनरेश के भाई राकेश ने तीन महीने पहले कुछ कर्ज चुकता कर अपने हिस्से की जमीन छुड़ा ली। रामनरेश का आरोप है कि जमीन हाथ से निकलता देख साहूकार ने मनमाना ब्याज जोड़कर कर्ज को तीन लाख रुपया से भी अधिक बताते हुए उससे तगादा शुरू किया।
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मंगलवार सुबह लगभग छह बजे साहूकार अपने परिवार के अन्य सदस्यों को साथ लेकर रामनरेश के घर पहुंचा और कर्ज वापसी के लिए दबाव डालने लगा। रामनरेश ने खराब माली हालत का हवाला देते हुए कुछ और वक्त मांगा, लेकिन साहूकार के पक्ष के लोग नहीं माने। वे रामनरेश को पकड़ कर अपने घर ले गए। रामनरेश की पत्नी शांति देवी अपनी दिव्यांग बेटी वंदना को साथ लेकर साहूकार के दरवाजे पर पहुंची और पति को छोड़ देने का आग्रह करने लगी। शांति के अनुसार साहूकार ने कर्ज वापस हुए बिना रामनरेश को छोड़ने से इंकार कर दिया। बात नहीं बनी तो वह थाने पहुंची और पुलिस से मद्द की गुहार लगाई। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे नेबुआ नौरंगिया के पुलिसकर्मी गांव पहुंचे और रामनरेश को छुड़ाकर अपने साथ थाने ले गए।
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इस संबंध में एसओ शैलेष सिंह ने कहा कि मामला जमीन की खरीद से जुड़ा है। जिन लोगों ने रामनरेश को कर्ज दिया था, उन्हें पता लगा कि अब वह जमीन किसी दूसरे को बेंचना चाह रहा है। इस बात की पूछताछ के लिए वे लोग रामनरेश को अपने घर बुलाया था। बंधक बनाने जैसी बात नहीं थी।