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पहले बाढ़ और अब आग ने बरपाया कहर
कुशीनगर
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:35 PM IST
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अमवादीगर गांव में मंगलवार को हुई आग की घटना के बाद तपती धूप में बेघर लोग प्लास्टिक ने नीचे अपना बसेरा बना कर रहने को मजबूर हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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दुदही। ब्लॉक के अमवादीगर गांव में मंगलवार को हुई आग की घटना में कई ऐसे लोगों के सपने चकनाचूर हो गए, जिन्होंने बेटी की शादी के लिए किसी तरह से इंतजाम किए थे और मेहनत कर किसी तरह से घर बनवाया था। अग्निकांड से प्रभावित कुछ लोगों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
गांव के रहने वाले नथुनी की बेटी की शादी 16 अप्रैल को तय है। लेकिन आग से बेटी के लिए किसी तरह से संजोकर रखे गए आभूषण, नकदी और कीमती सामान जलकर नष्ट हो गए।
अब उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है कि बेटी की शादी के लिए कैसे व्यवस्था की जाए। आग के कहर से दुखी नथुनी और गोरख जले सामानों को देखकर अपने तकदीर को कोस रहे हैं और बेटी को सीने से लगाकर जोर-जोर से रोने लगते हैं। बेटी की विवाह के लिए वर्षों से जुटाया गया सामान जलकर नष्ट हो गया। नथुनी का कहना है कि पहले बाढ़ से खेत नदी में समाए, अब बेटी की शादी के लिए एक-एक पाई जुटाकर किसी तरह शादी के सामान जुटाए गए थे। सारा सामान आग से जलकर नष्ट हो गए हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे बेटी के हाथ पीले किए जा सकेंगे।
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वहीं गांव के ही पहवारी का कहना है कि पहले गंडक में आई बाढ़ से खेत नदी में समा गए और अब आग से घर जल गया। आग से प्रभावित लोगों का कहना है कि कठिन मेहनत करके एक-एक पाई जोड़कर झोपड़ी बनाया गया था, जो कुछ समय में ही जल गया। आग में कुछ नहीं बच सका। पहवारी ने अपने जीवन में प्राकृतिक आपदा की कहानी बताते हुए कहा कि वह बिहार के कुसहां गांव के मूल निवासी हैं। वर्ष 1987 में नारायणी नदी में आई भयंकर बाढ़ से तबाही के बाद बरवापट्टी थानाक्षेत्र के अमवादीगर गांव में जमीन खरीदकर बस गए।
इस बाढ़ से प्रभावित होकर नथुनी भी अमवादीगर बाजार में आकर रहने लगे। बसने के चार वर्ष बाद भीषण अग्निकांड में फिर से नथुनी की कड़ी मेहनत से कमाई गई पूंजी से बनी झोपड़ी जल गई थी। इसके अलावा बीते वर्ष भी अग्निकांड से घर जल गया था। वहीं बीते मंगलवार फिर 11 बजे लगी आग से घर जल गए। उधर, गोरख के बेटी की भी 22 अप्रैल को शादी तय है।
आग के तांडव से दुखी गोरख घर पर बेटी के मुंह की तरफ जब देखे तो उनकी आंखें डबडबा गईं। वह अपने तकदीर को कोसते हुए कहते हैं कि भगवान को शायद यही मंजूर था। वहीं गांव के इंद्रासन का कहना है की भाई की शादी की तैयारी चल रही थी। विवाह से जुड़े सामानों की खरीदारी करके घर में रखे गए थे। आग से वह सब जलकर नष्ट हो गया। शादी के लिए फिर से कैसे बंदोबस्त किया जाए समझ में नहीं आ रहा है।
इसके अलावा गांव के संतोष कुछ दिन पहले ही अपने बहन की विदाई के लिए साड़ी के साथ अन्य सामान लाए थे। वह भी इस अग्निकांड में जलकर नष्ट हो गया। संतोष का कहना है कि बाहर दिन-रात कड़ी मेहनत से मिले पारिश्रमिक से बहन की विदाई के लिए महंगे सामान खरीदकर लाया था। जिसमें साड़ी सहित अन्य सामान शामिल थे। आग से कुछ नहीं बच पाया है। वह बहन को देखकर रोने लगता है।
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गांव के रहने वाले नथुनी की बेटी की शादी 16 अप्रैल को तय है। लेकिन आग से बेटी के लिए किसी तरह से संजोकर रखे गए आभूषण, नकदी और कीमती सामान जलकर नष्ट हो गए।
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अब उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है कि बेटी की शादी के लिए कैसे व्यवस्था की जाए। आग के कहर से दुखी नथुनी और गोरख जले सामानों को देखकर अपने तकदीर को कोस रहे हैं और बेटी को सीने से लगाकर जोर-जोर से रोने लगते हैं। बेटी की विवाह के लिए वर्षों से जुटाया गया सामान जलकर नष्ट हो गया। नथुनी का कहना है कि पहले बाढ़ से खेत नदी में समाए, अब बेटी की शादी के लिए एक-एक पाई जुटाकर किसी तरह शादी के सामान जुटाए गए थे। सारा सामान आग से जलकर नष्ट हो गए हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे बेटी के हाथ पीले किए जा सकेंगे।
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वहीं गांव के ही पहवारी का कहना है कि पहले गंडक में आई बाढ़ से खेत नदी में समा गए और अब आग से घर जल गया। आग से प्रभावित लोगों का कहना है कि कठिन मेहनत करके एक-एक पाई जोड़कर झोपड़ी बनाया गया था, जो कुछ समय में ही जल गया। आग में कुछ नहीं बच सका। पहवारी ने अपने जीवन में प्राकृतिक आपदा की कहानी बताते हुए कहा कि वह बिहार के कुसहां गांव के मूल निवासी हैं। वर्ष 1987 में नारायणी नदी में आई भयंकर बाढ़ से तबाही के बाद बरवापट्टी थानाक्षेत्र के अमवादीगर गांव में जमीन खरीदकर बस गए।
इस बाढ़ से प्रभावित होकर नथुनी भी अमवादीगर बाजार में आकर रहने लगे। बसने के चार वर्ष बाद भीषण अग्निकांड में फिर से नथुनी की कड़ी मेहनत से कमाई गई पूंजी से बनी झोपड़ी जल गई थी। इसके अलावा बीते वर्ष भी अग्निकांड से घर जल गया था। वहीं बीते मंगलवार फिर 11 बजे लगी आग से घर जल गए। उधर, गोरख के बेटी की भी 22 अप्रैल को शादी तय है।
आग के तांडव से दुखी गोरख घर पर बेटी के मुंह की तरफ जब देखे तो उनकी आंखें डबडबा गईं। वह अपने तकदीर को कोसते हुए कहते हैं कि भगवान को शायद यही मंजूर था। वहीं गांव के इंद्रासन का कहना है की भाई की शादी की तैयारी चल रही थी। विवाह से जुड़े सामानों की खरीदारी करके घर में रखे गए थे। आग से वह सब जलकर नष्ट हो गया। शादी के लिए फिर से कैसे बंदोबस्त किया जाए समझ में नहीं आ रहा है।
इसके अलावा गांव के संतोष कुछ दिन पहले ही अपने बहन की विदाई के लिए साड़ी के साथ अन्य सामान लाए थे। वह भी इस अग्निकांड में जलकर नष्ट हो गया। संतोष का कहना है कि बाहर दिन-रात कड़ी मेहनत से मिले पारिश्रमिक से बहन की विदाई के लिए महंगे सामान खरीदकर लाया था। जिसमें साड़ी सहित अन्य सामान शामिल थे। आग से कुछ नहीं बच पाया है। वह बहन को देखकर रोने लगता है।