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दोस्तों का शव गांव आया तो मचा कोहराम
Sun, 09 Jun 2019 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jun 2019 12:26 AM IST
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मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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कठकुइयां। कसया क्षेत्र के सपहा के पास हुए हादसे में कुबेरस्थान क्षेत्र के सिकटा निवासी दो युवकों की हुई मौत की से गांव में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को शव गांव पहुंचा तो लोगों की भीड़ जुट गई। हर कोई दोनों होनहार युवकों की मौत पर रो पड़ा।
गांव के लोगों ने बताया कि 24 वर्षीय नसीम पुत्र मंजूर दिल्ली में किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। पांच दिन पहले ईद मनाने घर आए थे। दो भाइयों और एक बहन में नसीम सबसे बड़ा था। घर की सारी जिम्मेदारी उसी के कंधे पर थी। पिता को आर्थिक मदद देने वाला नसीम हादसे का शिकार हो गया। परिजन रो-रो कर बेहाल हैं।
जबकि 22 वर्षीय आरिफ पुत्र रमजान चार भाइयों में सबसे छोटा था। एक सप्ताह बाद आरिफ सऊदी जाने वाला था। रोते हुए उसके पिता रमजान ने बताया कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि बेटा आरिफ ऐसे बीच मझधार में परिवार को छोड़ कर चला जाएगा। शुक्रवार की शाम को बेटा अपने दोस्त के साथ किसी जरूरत से कसया गया था। लौटते समय वह और उसका दोस्त नसीम हादसे का शिकार हो गए। दोस्त नसीम और आरिफ की मौत से पूरा गांव मर्माहत था। दोनों परिवार की चीख पुकार सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। लोग यहीं कह रहे थे कि यदि दोनों हेलमेट पहने होते तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
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ईद के तीसरे दिन ही दो परिवार की छिन गई खुशियां
कुबेरस्थान। सिकटा गांव के आरिफ और नसीम की हादसे में हुई मौत से दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अभी तीन दिन पूर्व ही दोनों परिवारों में ईद की खुशियां मनाई गई थी। दोनों युवक ईद के मौके पर ही अपने परिवार में शामिल होने घर आए थे, लेकिन किसी को अहसास नहीं था कि ईद के तीन दिन बाद ही दोनों परिवारों की खुशियां छिन जाएंगी। इस घटना से गांव के अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले।
गांव के लोग कभी आरिफ के घर पहुंच कर ढांढस बंधा रहे थे तो कभी नसीम के घर। दोनों घरों में मातम का माहौल था। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार ही थी। दोनों का जनाजा एक ही जगह रखा गया। परिजन तथा गांव के लोग कतार में खड़े हुए। सबकी आंखें हो गईं। दोनों का जनाजा एकसाथ उठा तो गांव का हर व्यक्ति गमगीन हो गया। सबके मुंह से बस यही बात निकली कि ऐसी घड़ी कभी किसी को देखने को न मिले।
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गांव के लोगों ने बताया कि 24 वर्षीय नसीम पुत्र मंजूर दिल्ली में किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। पांच दिन पहले ईद मनाने घर आए थे। दो भाइयों और एक बहन में नसीम सबसे बड़ा था। घर की सारी जिम्मेदारी उसी के कंधे पर थी। पिता को आर्थिक मदद देने वाला नसीम हादसे का शिकार हो गया। परिजन रो-रो कर बेहाल हैं।
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जबकि 22 वर्षीय आरिफ पुत्र रमजान चार भाइयों में सबसे छोटा था। एक सप्ताह बाद आरिफ सऊदी जाने वाला था। रोते हुए उसके पिता रमजान ने बताया कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि बेटा आरिफ ऐसे बीच मझधार में परिवार को छोड़ कर चला जाएगा। शुक्रवार की शाम को बेटा अपने दोस्त के साथ किसी जरूरत से कसया गया था। लौटते समय वह और उसका दोस्त नसीम हादसे का शिकार हो गए। दोस्त नसीम और आरिफ की मौत से पूरा गांव मर्माहत था। दोनों परिवार की चीख पुकार सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। लोग यहीं कह रहे थे कि यदि दोनों हेलमेट पहने होते तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
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ईद के तीसरे दिन ही दो परिवार की छिन गई खुशियां
कुबेरस्थान। सिकटा गांव के आरिफ और नसीम की हादसे में हुई मौत से दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अभी तीन दिन पूर्व ही दोनों परिवारों में ईद की खुशियां मनाई गई थी। दोनों युवक ईद के मौके पर ही अपने परिवार में शामिल होने घर आए थे, लेकिन किसी को अहसास नहीं था कि ईद के तीन दिन बाद ही दोनों परिवारों की खुशियां छिन जाएंगी। इस घटना से गांव के अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले।
गांव के लोग कभी आरिफ के घर पहुंच कर ढांढस बंधा रहे थे तो कभी नसीम के घर। दोनों घरों में मातम का माहौल था। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार ही थी। दोनों का जनाजा एक ही जगह रखा गया। परिजन तथा गांव के लोग कतार में खड़े हुए। सबकी आंखें हो गईं। दोनों का जनाजा एकसाथ उठा तो गांव का हर व्यक्ति गमगीन हो गया। सबके मुंह से बस यही बात निकली कि ऐसी घड़ी कभी किसी को देखने को न मिले।