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Kushinagar News: कौशल उन्नयन के लिए शिल्पकार किए जा रहे प्रशिक्षित

Thu, 24 Aug 2023 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 24 Aug 2023 12:01 AM IST
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craft training
फोटो है।
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प्रशिक्षण के बाद महिला शिल्पकारों को मिलेगी नई पहचान, उत्पादों को बाजार व बढ़ेगी आमदनी

संवाद न्यूज एजेंसी
पकवा इनार। कुशीनगर में विश्व बैंक सहायतित उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना के तहत शिल्पकारों का प्रशिक्षण चल रहा है। इसमें मिट्टी कला, बांस कला, मुंज कला, इंब्रायडरी (कशीदाकारी), केला रेशा, केला चिप्स व पत्ते से दोना-पत्तल व प्लॉस्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) के बारे में जानकारी दी जा रही है। इससे शिल्पकारों को नई पहचान मिलेगी।
जिले के चयनित शिल्पकारों के गठित समूहों की महिलाओं को दो से तीन चरणों में 20 से 45 दिवसीय प्रशिक्षण दिलाया जाना है। कुशल प्रशिक्षक शिल्पकारों को परंपरागत उत्पादों व तरीके से हटकर नए तकनीक से नए व आकर्षक उत्पाद तैयार करने के लिए दक्ष कर रहे हैं, ताकि गठित समूहों के महिला शिल्पकारों को नई पहचान के साथ उनके उत्पादों को बाजार मिले और आमदनी बढाई जा सके।
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कोट
हस्तशिल्प और उनसे जुड़े शिल्पकारों को प्रशिक्षण देने का प्रमुख मकसद उन्हें दक्षता प्रदान कर रोजगार सृजन करना है। उनके उत्पादों को आकर्षक व आधुनिकता से जोड़कर तैयार करने के लिए टूल किट भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण नवंबर माह तक चलेगा। वर्तमान में क्ले आर्ट व बंबू आर्ट के हस्तशिल्पियों के महिला समूहों को प्रशिक्षित किया जा रहा हैै। आगे अन्य चयनित शिल्प व उनके शिल्पकारों को प्रशिक्षकों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
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-रमेश कुमार रंजन, ग्रुप लीडर,बेसिक्स





शिल्पकारों की पहचान कर 51 समूहों का गठन

बेसिक्स ने शिल्प और उनके शिल्पकारों की पहचान कर क्षेत्र में 51 समूहों का गठन किया है। इसमें बांस कला के सबया व पिपराझाम में गठित छह समूहों और मिट्टी कला के विशंभरपुर, डुमरी व झुंगवा में गठित आठ समूहों के शिल्पकारों का प्रशिक्षण शुरू हुआ है। मिट्टी कला के शिल्पकारों को 20 दिन और बंबू कला के शिल्पकारों को प्रथम चरण में 25 दिन और दूसरे चरण में 20 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशंभरपुर और सबया में प्रशिक्षण चल रहा है। मूंज, इंब्रायडरी, केला रेशा, केला चिप्स और केले के पत्ते से दोना-पत्तल व पीओपी के शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया जाएगा।



क्या है हस्त शिल्प कला
जीवनपयोगी व घरेलू सामान, आभूषण, चित्र आदि बनाने के लिए मिट्टी को विभिन्न आकृतियों में ढालने की कला को क्ले आर्ट यानी मिट्टी कला कहा जाता है। बंबू आर्ट एंड क्राॅफ्ट को बांस हस्तशिल्प के रूप में भी जाना जाता है। इस उद्योग को हस्तशिल्प उद्योग की ख्याति भी प्राप्त है। यह विश्व के प्राचीनतम एवं अत्यंत लोकप्रिय शिल्पों में से एक है। इंब्रायडरी (कसीदाकारी) में बेल-बूटे का काम किया जाता है। यह एक प्राचीन भारतीय कला है। जिसमें धागों, मोतियों, मनकों, चिड़िया के पंख और सितारों जैसे सामग्रियों से कपड़े को सजाने की कला शामिल है। पीओपी कला में नवीन आकृतियां निर्माण, डिजाइन, किसी स्वरूप का आकर्षण बढ़ाने व मूर्ति निर्माण की आधुनिकतम तकनीक है। इसका उपयोग भवन से लेकर चिकित्सा क्षेत्र तक किया जाता है। मूंज कला में मूंज घास से उत्पाद तैयार किए जाते हैं। हस्तशिल्पी महिलाएं अपने हस्तशिल्प से घास में भी जान डाल देती हैं। इसमें रंगयुक्त नक्काशी कर उत्पादों को खूबसूरत बनाया जाता है।
केला एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल है। इसलिए केले के रेशे से उत्पाद, केला चिप्स व केले के पत्ते से दोना व पत्तल बनाना प्रमुख है।





क्ले आर्ट यानी मिट्टी कला के लिए गठित महिला शिल्पकारों का समूह पारंपरिक उत्पाद जैसे दीया, घड़ा, कुल्हड़, कोसा, परई, गुल्लक, गगरी, हांडी, तऊला से हटकर मिट्टी से देवी, देवताओं व कई तरह के खिलौने को बनाने की नवीनतम तकनीक सिखाई जा रही है। ताकि उनके आकर्षक उत्पादों का विपणन कर रोजगार सृजन के साथ आमदनी बढ़ाई जा सके।



बाजार भी कराएंगे मुहैया

प्रो पुअर पर्यटन विकास परियोजना के तहत फूड प्लॉजा में छह सुविधायुक्त दुकानों का निर्माण कार्य अंतिम दौर में चल रहा है। प्रत्येक चयनित हस्तशिल्प से शिल्पकारों के उत्पादों के विक्रय के लिए नवनिर्मित एक दुकान का आंवटन भी होगा। वहां उनके सामानों को देश-विदेश से आने वाले पर्यटक व स्थानीय लोग पहुंचकर क्रय कर सकेंगे। इसके अलावा उत्पादों के ऑनलाइन बिक्री के लिए पोर्टल पर शिल्पकारों का पंजीकरण कराया जाएगा। उत्पादों को ख्याति व बेहतर बाजार मुहैया कराने के लिए समय-समय पर जिले व अन्य दूसरी जगहों पर लगने वाले प्रदर्शनियों के माध्यम से भी प्रचारित व प्रसारित किया जाएगा।





बेसिक्स ने शिल्पकारों की पहचान कर उनके कारीगरों का पहचान कार्ड बनाया है। इनमें मौजूदा समय में कुशीनगर के पिपराझाम, कसया का सबया, दीना पट्टी, फुलवापट्टी, सिसई, विशंभरपुर, डुमरी, झुंगवा व सोनबरसा के शिल्पकारों का समूह गठन किया गया है। अभी सिर्फ महिला शिल्पकारों का ही समूह बनाया गया है।
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