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Kushinagar News: कोरोना ने छीना परिवार का मुखिया, चाचा-दादा ने दिया सहारा
Fri, 14 Jul 2023 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 14 Jul 2023 11:46 PM IST
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योजना के बारे में पता न चलने से वंचित हो गए बहुत से बेसहारा बच्चे
चयनित परिवारों को बच्चों की देखभाल के लिए छह माह पर मिलते हैं चार हजार रुपये
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत दी जाती है यह धनराशि
जिले में 205 बच्चों को मिलता है योजना का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कोरोना महामारी से मरने वाले व्यक्तियों के बच्चों के भरण-पोषण के लिए संचालित उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत छह माह में एक बार धनराशि मिलने की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। इसकी वजह से बच्चे अपनी जरूरतें समय से पूरी नहीं कर पाते। इसके अलावा कुछ तो ऐसे परिवार मिले हैं, जाे इस योजना के बारे में जान ही नहीं सके। ऐसे बच्चों का सहारा उनके चाचा-दादा या अन्य लोग बने हैं, जो भरण-पोषण में मदद कर रहे हैं।
कोरोना संक्रमण की वजह से कुशीनगर जिले में लगभग एक हजार लोगाें की मौत हो गई थी, लेकिन जिनका पोस्टमार्टम हो सका, उन्हें ही स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से मौत माना। इनमें ऐसे लोगों की संख्या भी अधिक रही, जो अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से पत्नी और बच्चे बेसहारा हो गए।
कुछ बच्चों की मां गुजर गई तो किसी के पिता, जबकि कुछ बच्चों के माता-पिता दोनों का सहारा छिन गया। ऐसे बच्चाें के भरण-पोषण में किसी प्रकार की रुकावट न आए, इसलिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत 18 वर्ष आयु तक के बच्चों की देखभाल के लिए 4,000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है।
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कुशीनगर जनपद में इस योजना के तहत 205 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें चार हजार रुपये दिए जाते हैं। ऐसे बच्चों के संरक्षकों ने बताया कि यह धनराशि जनपद में छह माह में एक बार दिए जाने के चलते जरूरतें पूरी करने में दिक्कतें आ रही हैं।
केस-एक
तीन बच्चों के सिर से उठ गया था माता-पिता का साया
वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के चलते तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के महुअवा गांव निवासी पति-पत्नी की मौत होे गई थी। तब उनके तीनों बच्चों की उम्र 15 वर्ष, 13 वर्ष और 12 वर्ष थी। तीनों नाबालिग थे। ऐसे में बच्चों की चाची को संरक्षक बनाकर उनके बैंक खाता में दस लाख रुपये अहेतुक सहायता के रूप में दिए गए थे। उन्हीं के खाते में बच्चों के लिए चार हजार रुपये प्रतिमाह आता था, जो बीते छह माह से नहीं आ रहा है।
केस-दो
नहीं मिली योजना के बारे में जानकारी, चाचा-दादा करते हैं देखरेख
हाटा नगर के 34 वर्षीय एक फर्नीचर व्यवसायी की कोरोना महामारी से मौत हाे गई थी। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से पत्नी और चार बच्चे बेसहारा हो गए। उस समय बड़े बेटे की उम्र 14 साल, बड़ी बेटी दस साल, उससे छोटी आठ साल और सबसे छोटा बेटा दो साल का था। उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिलती है। मृतक की पत्नी ने बताया कि बच्चों के भरण-पोषण में उनके चाचा-दादा का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
केस-तीन
कप्तानगंज क्षेत्र के भड़सर खास निवासी 31 वर्षीय एक युवक कोरोना महामारी की चपेट में आ गया था। उनके इलाज में परिवार के लोगों ने काफी रुपये खर्च किए, लेकिन बचा नहीं सके। अंत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में उसकी मौत हो गई। मृतक की पत्नी ने बताया कि सरकार की ओर से तात्कालिक रूप से 50 हजार रुपये की मदद मिली थी। उनके दो पुत्र दस एवं आठ वर्ष के हैं। सरकार की योजना के बारे में पता नहीं चल सका। इसलिए आवेदन नहीं कर सकीं। उस योजना का लाभ नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि पति के देहांत के बाद हालात और भी बदतर हो गए। मृतक की पत्नी का एक गुर्दा खराब हो गया, जिसे इलाज के दौरान शरीर से काटकर बाहर निकाल दिया गया। मृतक की पत्नी के मुताबिक, किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला।
केस-चार
कप्तानगंज कस्बे के वार्ड नंबर-13 के 60 वर्षीय एक व्यक्ति की कोरोना से कस्बे के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतक के बेटे ने बताया कि सरकार की ओर से 50 हजार रुपये मिले थे। उसके बाद कोई लाभ नहीं मिला। उनकी बहन की उम्र उस समय 17 साल थी, इस योजना के बारे में जानकारी नहीं हो पाई थी।
केस-पांच
कप्तानगंज क्षेत्र के मुजरिया बसंतपुर गांव में भी 38 वर्षीय एक महिला की कोरोना से मौत हो गई थी। मृतका के पति ने बताया कि महिला का इलाज कप्तानगंज स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उनकी चार संतानें हैं। बड़ी बेटी उस समय 16 साल, दूसरी बेटी 15 साल, एक बेटा 12 और दूसरा 10 साल का था। अनाथ बच्चों को कोई सरकारी मदद नहीं मिली।
कप्तानगंज सीएचसी क्षेत्र में हुई थी 21 लोगों की मौत
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कप्तानगंज क्षेत्र में 21 लोगों की कोरोना से मौत हुई थी। सभी मृतकों के परिवार को 50 हजार रुपये की सहायता सरकार की ओर से राशि दी गई थी।
वर्जन-
जनपद में कोरोना से मरने वाले माता-पिता के 205 बच्चों की तरफ से आवेदन पत्र मिले थे। इन बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 4,000 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से छह माह पर भेजा जाता है। अभी मार्च में इन बच्चों को धनराशि भेजी गई है। पुन: बजट आते ही भेज दिया जाएगा। इस योजना के तहत ऑफलाइन आवेदन लिए जाते हैं। जिन बच्चों के संबंध में आवेदन मिले थे, उन्हें ही योजना का लाभ मिलता है।
-विनय कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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चयनित परिवारों को बच्चों की देखभाल के लिए छह माह पर मिलते हैं चार हजार रुपये
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत दी जाती है यह धनराशि
जिले में 205 बच्चों को मिलता है योजना का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कोरोना महामारी से मरने वाले व्यक्तियों के बच्चों के भरण-पोषण के लिए संचालित उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत छह माह में एक बार धनराशि मिलने की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। इसकी वजह से बच्चे अपनी जरूरतें समय से पूरी नहीं कर पाते। इसके अलावा कुछ तो ऐसे परिवार मिले हैं, जाे इस योजना के बारे में जान ही नहीं सके। ऐसे बच्चों का सहारा उनके चाचा-दादा या अन्य लोग बने हैं, जो भरण-पोषण में मदद कर रहे हैं।
कोरोना संक्रमण की वजह से कुशीनगर जिले में लगभग एक हजार लोगाें की मौत हो गई थी, लेकिन जिनका पोस्टमार्टम हो सका, उन्हें ही स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से मौत माना। इनमें ऐसे लोगों की संख्या भी अधिक रही, जो अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से पत्नी और बच्चे बेसहारा हो गए।
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कुछ बच्चों की मां गुजर गई तो किसी के पिता, जबकि कुछ बच्चों के माता-पिता दोनों का सहारा छिन गया। ऐसे बच्चाें के भरण-पोषण में किसी प्रकार की रुकावट न आए, इसलिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत 18 वर्ष आयु तक के बच्चों की देखभाल के लिए 4,000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है।
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कुशीनगर जनपद में इस योजना के तहत 205 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें चार हजार रुपये दिए जाते हैं। ऐसे बच्चों के संरक्षकों ने बताया कि यह धनराशि जनपद में छह माह में एक बार दिए जाने के चलते जरूरतें पूरी करने में दिक्कतें आ रही हैं।
केस-एक
तीन बच्चों के सिर से उठ गया था माता-पिता का साया
वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के चलते तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के महुअवा गांव निवासी पति-पत्नी की मौत होे गई थी। तब उनके तीनों बच्चों की उम्र 15 वर्ष, 13 वर्ष और 12 वर्ष थी। तीनों नाबालिग थे। ऐसे में बच्चों की चाची को संरक्षक बनाकर उनके बैंक खाता में दस लाख रुपये अहेतुक सहायता के रूप में दिए गए थे। उन्हीं के खाते में बच्चों के लिए चार हजार रुपये प्रतिमाह आता था, जो बीते छह माह से नहीं आ रहा है।
केस-दो
नहीं मिली योजना के बारे में जानकारी, चाचा-दादा करते हैं देखरेख
हाटा नगर के 34 वर्षीय एक फर्नीचर व्यवसायी की कोरोना महामारी से मौत हाे गई थी। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से पत्नी और चार बच्चे बेसहारा हो गए। उस समय बड़े बेटे की उम्र 14 साल, बड़ी बेटी दस साल, उससे छोटी आठ साल और सबसे छोटा बेटा दो साल का था। उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिलती है। मृतक की पत्नी ने बताया कि बच्चों के भरण-पोषण में उनके चाचा-दादा का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
केस-तीन
कप्तानगंज क्षेत्र के भड़सर खास निवासी 31 वर्षीय एक युवक कोरोना महामारी की चपेट में आ गया था। उनके इलाज में परिवार के लोगों ने काफी रुपये खर्च किए, लेकिन बचा नहीं सके। अंत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में उसकी मौत हो गई। मृतक की पत्नी ने बताया कि सरकार की ओर से तात्कालिक रूप से 50 हजार रुपये की मदद मिली थी। उनके दो पुत्र दस एवं आठ वर्ष के हैं। सरकार की योजना के बारे में पता नहीं चल सका। इसलिए आवेदन नहीं कर सकीं। उस योजना का लाभ नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि पति के देहांत के बाद हालात और भी बदतर हो गए। मृतक की पत्नी का एक गुर्दा खराब हो गया, जिसे इलाज के दौरान शरीर से काटकर बाहर निकाल दिया गया। मृतक की पत्नी के मुताबिक, किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला।
केस-चार
कप्तानगंज कस्बे के वार्ड नंबर-13 के 60 वर्षीय एक व्यक्ति की कोरोना से कस्बे के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतक के बेटे ने बताया कि सरकार की ओर से 50 हजार रुपये मिले थे। उसके बाद कोई लाभ नहीं मिला। उनकी बहन की उम्र उस समय 17 साल थी, इस योजना के बारे में जानकारी नहीं हो पाई थी।
केस-पांच
कप्तानगंज क्षेत्र के मुजरिया बसंतपुर गांव में भी 38 वर्षीय एक महिला की कोरोना से मौत हो गई थी। मृतका के पति ने बताया कि महिला का इलाज कप्तानगंज स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उनकी चार संतानें हैं। बड़ी बेटी उस समय 16 साल, दूसरी बेटी 15 साल, एक बेटा 12 और दूसरा 10 साल का था। अनाथ बच्चों को कोई सरकारी मदद नहीं मिली।
कप्तानगंज सीएचसी क्षेत्र में हुई थी 21 लोगों की मौत
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कप्तानगंज क्षेत्र में 21 लोगों की कोरोना से मौत हुई थी। सभी मृतकों के परिवार को 50 हजार रुपये की सहायता सरकार की ओर से राशि दी गई थी।
वर्जन-
जनपद में कोरोना से मरने वाले माता-पिता के 205 बच्चों की तरफ से आवेदन पत्र मिले थे। इन बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 4,000 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से छह माह पर भेजा जाता है। अभी मार्च में इन बच्चों को धनराशि भेजी गई है। पुन: बजट आते ही भेज दिया जाएगा। इस योजना के तहत ऑफलाइन आवेदन लिए जाते हैं। जिन बच्चों के संबंध में आवेदन मिले थे, उन्हें ही योजना का लाभ मिलता है।
-विनय कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी