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यूपी बोर्ड परीक्षा पर भी पड़ रही कोरोना की मार, परीक्षा शुल्क जमा करने में असमर्थता जता रहे अभिभावक
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यूपी बोर्ड परीक्षा पर भी पड़ रही कोरोना की मार, परीक्षा शुल्क जमा करने में असमर्थता जता रहे अभिभावक
पडरौना। कोरोना का प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। स्कूल बंद होने से यूपी बोर्ड परीक्षा का फार्म भरने में भी देरी हो रही है। वर्ष 2021 में बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावक आर्थिक कारणों से बच्चों का परीक्षा शुल्क भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। अब तक बमुश्किल 40 फीसदी विद्यार्थियों का ही परीक्षा शुल्क जमा हो पाया है जबकि इसके लिए अंतिम तिथि भी पांच अगस्त से बढ़ाकर 31 अगस्त की जा चुकी है। सबसे बुरी हालत स्ववित्त पोषित कॉलेजों की है। यहां तो 25 से 30 फीसदी विद्यार्थियों ने ही फिलहाल परीक्षा शुल्क जमा किया है। प्रधानाचार्यों की तरफ से छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को फोन कर बोर्ड परीक्षा शुल्क जमा करने की अपील की जा रही है।
जिले में कुल 327 माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें 19 राजकीय, 55 वित्तपोषित और 253 स्ववित्त पोषित हैं। इस वर्ष यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल के 53571 और इंटर के 44237 छात्र-छात्राओं को शामिल होना है। बोर्ड की तरफ से परीक्षार्थियों की परीक्षा शुल्क जमा करने के लिए पहले पांच अगस्त को अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। लेकिन कोरोना संकट के चलते परीक्षार्थियों का परीक्षा शुल्क जमा नहीं हो पा रहा है। प्रधानाचार्यों की अपील पर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने परीक्षा शुल्क जमा करने की तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है। लेकिन शुल्क जमा करने व पंजीकरण कराने की रफ्तार नहीं बढ़ रही है। अभी तक जिले भर में करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थियों का ही परीक्षा शुल्क जमा हो पाया है। सबसे अधिक परेशानी स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों की हैं। क्योंकि इन विद्यालयों में तो अभी 25 से 30 प्रतिशत बच्चों का ही शुल्क जमा हो पाया है।
अभिभावक पैसों की बता रहे कमी
प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि बोर्ड परीक्षा के लिए हाईस्कूल में 501 रुपये और इंटर में 601 रुपये शुल्क निर्धारित है। इसके अलावा बच्चों को अपनी पढ़ाई का मासिक शुल्क देना होता है। बोर्ड परीक्षा का शुल्क ट्रेजरी में जमा होता है और उसी के अनुरूप पंजीकृत बच्चों का फार्म भी भरा जाता है। अगर बच्चों का शुल्क जमा नहीं होगा तो फार्म भी नहीं भरा जा सकेगा।
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हनुमान इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शैलेंद्र दत्त शुक्ल ने बताया कि स्कूल आने वाले अभिभावक आर्थिक संकट की बात कह रहे हैं। अभिभावक अपने पाल्यों का शिक्षण शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं। साथ ही बोर्ड परीक्षा का शुल्क देने में भी असमर्थता जता रहे हैं।
शाकुंतल इंटर कॉलेज के प्रबंधक अभिषेक तिवारी का कहना है कि पढ़ाई बंद होने से प्राइवेट स्कूलों की हालत पहले से ही खराब है। शिक्षण शुल्क मिलने पर ही शिक्षकों का वेतन दिया जाता है। परीक्षा शुल्क सीधे बोर्ड को जाना है। विद्यालयों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे बिना शुल्क जमा कराए पंजीकरण व बोर्ड परीक्षा का शुल्क अपने पास से जमा कर सकें।
परीक्षा शुल्क जमा करना अनिवार्य है: डीआईओएस
डीआईओएस उदय प्रकाश मिश्र ने बताया कि परीक्षा समय से शुरू कराने के लिए समय से परीक्षा शुल्क जमा कराना जरूरी है। इसी आधार पर परीक्षार्थियों की संख्या का निर्धारण होता है। बोर्ड की तरफ से परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि एक बार बढ़ाई जा चुकी है। इसके संबंध में सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया जा चुका है। आगे बोर्ड के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा।
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पडरौना। कोरोना का प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। स्कूल बंद होने से यूपी बोर्ड परीक्षा का फार्म भरने में भी देरी हो रही है। वर्ष 2021 में बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावक आर्थिक कारणों से बच्चों का परीक्षा शुल्क भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। अब तक बमुश्किल 40 फीसदी विद्यार्थियों का ही परीक्षा शुल्क जमा हो पाया है जबकि इसके लिए अंतिम तिथि भी पांच अगस्त से बढ़ाकर 31 अगस्त की जा चुकी है। सबसे बुरी हालत स्ववित्त पोषित कॉलेजों की है। यहां तो 25 से 30 फीसदी विद्यार्थियों ने ही फिलहाल परीक्षा शुल्क जमा किया है। प्रधानाचार्यों की तरफ से छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को फोन कर बोर्ड परीक्षा शुल्क जमा करने की अपील की जा रही है।
जिले में कुल 327 माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें 19 राजकीय, 55 वित्तपोषित और 253 स्ववित्त पोषित हैं। इस वर्ष यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल के 53571 और इंटर के 44237 छात्र-छात्राओं को शामिल होना है। बोर्ड की तरफ से परीक्षार्थियों की परीक्षा शुल्क जमा करने के लिए पहले पांच अगस्त को अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। लेकिन कोरोना संकट के चलते परीक्षार्थियों का परीक्षा शुल्क जमा नहीं हो पा रहा है। प्रधानाचार्यों की अपील पर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने परीक्षा शुल्क जमा करने की तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है। लेकिन शुल्क जमा करने व पंजीकरण कराने की रफ्तार नहीं बढ़ रही है। अभी तक जिले भर में करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थियों का ही परीक्षा शुल्क जमा हो पाया है। सबसे अधिक परेशानी स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों की हैं। क्योंकि इन विद्यालयों में तो अभी 25 से 30 प्रतिशत बच्चों का ही शुल्क जमा हो पाया है।
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अभिभावक पैसों की बता रहे कमी
प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि बोर्ड परीक्षा के लिए हाईस्कूल में 501 रुपये और इंटर में 601 रुपये शुल्क निर्धारित है। इसके अलावा बच्चों को अपनी पढ़ाई का मासिक शुल्क देना होता है। बोर्ड परीक्षा का शुल्क ट्रेजरी में जमा होता है और उसी के अनुरूप पंजीकृत बच्चों का फार्म भी भरा जाता है। अगर बच्चों का शुल्क जमा नहीं होगा तो फार्म भी नहीं भरा जा सकेगा।
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हनुमान इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शैलेंद्र दत्त शुक्ल ने बताया कि स्कूल आने वाले अभिभावक आर्थिक संकट की बात कह रहे हैं। अभिभावक अपने पाल्यों का शिक्षण शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं। साथ ही बोर्ड परीक्षा का शुल्क देने में भी असमर्थता जता रहे हैं।
शाकुंतल इंटर कॉलेज के प्रबंधक अभिषेक तिवारी का कहना है कि पढ़ाई बंद होने से प्राइवेट स्कूलों की हालत पहले से ही खराब है। शिक्षण शुल्क मिलने पर ही शिक्षकों का वेतन दिया जाता है। परीक्षा शुल्क सीधे बोर्ड को जाना है। विद्यालयों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे बिना शुल्क जमा कराए पंजीकरण व बोर्ड परीक्षा का शुल्क अपने पास से जमा कर सकें।
परीक्षा शुल्क जमा करना अनिवार्य है: डीआईओएस
डीआईओएस उदय प्रकाश मिश्र ने बताया कि परीक्षा समय से शुरू कराने के लिए समय से परीक्षा शुल्क जमा कराना जरूरी है। इसी आधार पर परीक्षार्थियों की संख्या का निर्धारण होता है। बोर्ड की तरफ से परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि एक बार बढ़ाई जा चुकी है। इसके संबंध में सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया जा चुका है। आगे बोर्ड के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा।