{"_id":"68ab5ec3f9daa5e9560886a6","slug":"conversion-case-the-girls-life-is-in-danger-her-family-members-also-left-the-house-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-143993-2025-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्मांतरण प्रकरण : युवती को जान का खतरा, परिजनों ने भी छोड़ा घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्मांतरण प्रकरण : युवती को जान का खतरा, परिजनों ने भी छोड़ा घर
Mon, 25 Aug 2025 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 25 Aug 2025 12:19 AM IST
विज्ञापन
कुशीनगर/तमकुहीराज। दुष्कर्म व धर्म परिवर्तन की शिकार पडरौना के कोतवाली क्षेत्र की युवती के जेहन में आरोपियों के रसूख व प्रभाव की ऐसी दहशत है कि उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया है। लखनऊ में गुमनाम तरीके से रह रही है। वहीं पीड़िता के परिजन आरोपियों की ओर से अनावश्यक कोई दबाव के डर से उसके माता-पिता व छोटा भाई भी पैतृक घर छोड़ दिए हैं।
वह डर की वजह से किसी परिचित के घर रह रहे हैं। दूसरी ओर पीड़िता मामले के आरोपियों पर हत्या कराने का आरोप लगा रही है। वह अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस से संपर्क में है। पीड़िता के पास उतरौला मजार पर धर्म परिवर्तन के बाद मुस्लिम धर्म के अनुसार पोशाक की तस्वीरें भी हैं। वह कुशीनगर आने के बजाए लखनऊ कोर्ट में ही कलमबंद बयान दर्ज कराने की बात कर रही है। हालाकि लखनऊ पहुंची पुलिस पीड़िता से संपर्क नहीं होने का दावा कर रही है। पडरौना कोतवाली क्षेत्र की निवासी एक युवती की तहरीर के आधार पर पुलिस ने 19 अगस्त को 13 आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म, गैंगरेप, धर्म परिवर्तन सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पीड़िता को मीडिया के सामने हिन्दूवादी नेता गोपाल राय ने लखनऊ में पेश कर इसका भंडाफोड़ किया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। पुलिस घटना से जुड़े कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। पुलिस की एक टीम पीड़िता का बयान दर्ज करने लखनऊ गई है, लेकिन पुलिस ने दावा किया कि उससे संपर्क नहीं हो रहा है।
मामले में नगर पंचायत तमकुहीराज के रफी खान उर्फ बबलू, नौशाद खान, जमालुद्दीन, हाशिम खान, तनवीर, इजहारुल हक, बलरामपुर जिले उतरौला निवासी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, नीतू रोहरा उर्फ नसरीन, तमकुहीराज थाना क्षेत्र के मुकुंदपुर निवासी रितेश मिश्रा, कसया नगर पालिका के वार्ड नंबर दो मां कोटेश्वरी नगर निवासी व बिहार के मूल निवासी आलमगीर अंसारी, तमकुहीराज थाने पर तैनात दिवान इम्तियाज़ खान व अज्ञात पते के साहिल अंसारी व इरशाद खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।
विज्ञापन
मामले से जुड़े अधिकतर आरोपी रसूखदार और मजबूत राजनितिक पकड़ के हैं। लिहाजा पीड़िता खुलकर सामने आने से डर रही है और अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस से संपर्क में होने का दावा कर रही है। मोबाइल पर बातचीत के दौरान रविवार को पीड़िता ने बताया कि मामले के आरोपियों की मजबूत पकड़ व ऊंचे रसूख के कारण खुद की हत्या का भय है। इसी कारण गुमनाम तरीके से लखनऊ में सुरक्षित ठिकाने पर रह रही है।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बीते दिनों तमकुहीराज थाने पर गई थी, लेकिन वहां तैनात दीवान आरोपियों का सहयोगी निकला और उसे नौशाद खान के घर ले जाकर बंधक बना कर रखा गया। बाद में गैंगरेप की घटना को अंजाम देकर समउर मार्ग स्थित झरही नदी के किनारे फेंक आए। केस दर्ज होने के बाद आरोपियों व उनके सहयोगियों के भय से व्यक्तिगत मोबाइल बंद रखा है। उसके मां-बाप व भाई इसी के कारण पैतृक निवास में नहीं रह रहे हैं। आरोपियों के भय व रसूख के कारण पीड़िता पुलिस से अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगा रही है और कुशीनगर नगर आने से इंकार कर रही है।
उसने जिले के एसपी से गुहार लगाई है कि लखनऊ स्थित समकक्ष न्यायालय में उसका बयान दर्ज कराने की व्यवस्था की जाए। पीड़िता के अधिवक्ता मिथलेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारतीय दंड संहिता में इस बाबत प्रावधान है कि कि पीड़ित महिला किसी भी समकक्ष न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करा सकती है। यह जरूरी नहीं कि वह न्यायालय संबंधित वाद के अधिकारिता क्षेत्र में आता हो या नहीं।
विज्ञापन
वह डर की वजह से किसी परिचित के घर रह रहे हैं। दूसरी ओर पीड़िता मामले के आरोपियों पर हत्या कराने का आरोप लगा रही है। वह अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस से संपर्क में है। पीड़िता के पास उतरौला मजार पर धर्म परिवर्तन के बाद मुस्लिम धर्म के अनुसार पोशाक की तस्वीरें भी हैं। वह कुशीनगर आने के बजाए लखनऊ कोर्ट में ही कलमबंद बयान दर्ज कराने की बात कर रही है। हालाकि लखनऊ पहुंची पुलिस पीड़िता से संपर्क नहीं होने का दावा कर रही है। पडरौना कोतवाली क्षेत्र की निवासी एक युवती की तहरीर के आधार पर पुलिस ने 19 अगस्त को 13 आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म, गैंगरेप, धर्म परिवर्तन सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पीड़िता को मीडिया के सामने हिन्दूवादी नेता गोपाल राय ने लखनऊ में पेश कर इसका भंडाफोड़ किया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। पुलिस घटना से जुड़े कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। पुलिस की एक टीम पीड़िता का बयान दर्ज करने लखनऊ गई है, लेकिन पुलिस ने दावा किया कि उससे संपर्क नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
मामले में नगर पंचायत तमकुहीराज के रफी खान उर्फ बबलू, नौशाद खान, जमालुद्दीन, हाशिम खान, तनवीर, इजहारुल हक, बलरामपुर जिले उतरौला निवासी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, नीतू रोहरा उर्फ नसरीन, तमकुहीराज थाना क्षेत्र के मुकुंदपुर निवासी रितेश मिश्रा, कसया नगर पालिका के वार्ड नंबर दो मां कोटेश्वरी नगर निवासी व बिहार के मूल निवासी आलमगीर अंसारी, तमकुहीराज थाने पर तैनात दिवान इम्तियाज़ खान व अज्ञात पते के साहिल अंसारी व इरशाद खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।
विज्ञापन
मामले से जुड़े अधिकतर आरोपी रसूखदार और मजबूत राजनितिक पकड़ के हैं। लिहाजा पीड़िता खुलकर सामने आने से डर रही है और अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस से संपर्क में होने का दावा कर रही है। मोबाइल पर बातचीत के दौरान रविवार को पीड़िता ने बताया कि मामले के आरोपियों की मजबूत पकड़ व ऊंचे रसूख के कारण खुद की हत्या का भय है। इसी कारण गुमनाम तरीके से लखनऊ में सुरक्षित ठिकाने पर रह रही है।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बीते दिनों तमकुहीराज थाने पर गई थी, लेकिन वहां तैनात दीवान आरोपियों का सहयोगी निकला और उसे नौशाद खान के घर ले जाकर बंधक बना कर रखा गया। बाद में गैंगरेप की घटना को अंजाम देकर समउर मार्ग स्थित झरही नदी के किनारे फेंक आए। केस दर्ज होने के बाद आरोपियों व उनके सहयोगियों के भय से व्यक्तिगत मोबाइल बंद रखा है। उसके मां-बाप व भाई इसी के कारण पैतृक निवास में नहीं रह रहे हैं। आरोपियों के भय व रसूख के कारण पीड़िता पुलिस से अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगा रही है और कुशीनगर नगर आने से इंकार कर रही है।
उसने जिले के एसपी से गुहार लगाई है कि लखनऊ स्थित समकक्ष न्यायालय में उसका बयान दर्ज कराने की व्यवस्था की जाए। पीड़िता के अधिवक्ता मिथलेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारतीय दंड संहिता में इस बाबत प्रावधान है कि कि पीड़ित महिला किसी भी समकक्ष न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करा सकती है। यह जरूरी नहीं कि वह न्यायालय संबंधित वाद के अधिकारिता क्षेत्र में आता हो या नहीं।