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Kushinagar News: मदरसे की फर्जी मान्यता पर काॅन्वेंट स्कूल, जांच शुरू
Sat, 19 Apr 2025 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 19 Apr 2025 12:15 AM IST
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कुशीनगर/तुर्कपट्टी। क्षेत्र में फर्जी मदरसे की मान्यता पर दो गांव के संचालित स्कूल हो स्कूल की जानकारी के बाद लोकल इंटेलिजेंस सक्रिय हो गई है। फर्जी नाम से संचालित मदरसों को लेकर हलचल बढ़ गई है। एलआईयू के अलावा जांच का दायरा बढ़ाकर बेसिक शिक्षा विभाग और जिला अल्पसंख्यक विभाग तक पहुंचा है, जहां चौकन्ना हुए अफसर कागजातों के मिलान के साथ स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। फाजिलनगर क्षेत्र के अलावा मदरसों की फर्जी मान्यता का तार सीमावर्ती जनपदों से भी जुड़ा है और इस खेल में कई सफेदपोशों के संलिप्त होने की आशंका है। लोकल इंटेलिजेंस यूनिट इन्हीं सारी पहलुओं पर जानकारी इकट्ठा कर रही है।
बीते मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी कसया ने एक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की जांच की गई। विद्यालय के मान्यता की काॅपी मांगने पर प्रधानाचार्य ने उन्हें नजबुन निशा गर्ल्स स्कूल सपहा के मान्यता की काॅपी दी।
30 अप्रैल 2010 को क्रमांक 95 पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कुशीनगर की ओर से जारी मान्यता आदेश वाला यही प्रति बीईओ के पास फाजिलनगर विकासखंड के महासोन स्थित एक अन्य मदरसा पर अंकित मिला, जिस नाम से डिग्री चौराहे पर पूर्व में एक विद्यालय का संचालन किया गया था।
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क्रमांक 95 पर 30 अप्रैल 2010 को हूबहू एक ही जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी दोनों मान्यता पत्रों में सही कौन है? इसको लेकर उहापोह में फंसे बीईओ को तब आश्चर्य हुआ जब पता चला कि नजबुन नेशा गर्ल्स स्कूल महासोन के नाम से महासोन में कोई मदरसा संचालित ही नहीं है। ऐसे में इस बात की भी चर्चा है कि यह फर्जीवाड़ा यही तक सीमित नहीं। अगर जांच हो तो ऐसे कई अन्य संचालित मदरसे भी मिल सकते हैं। बीएसए कार्यालय से मिलती है शह : जिले में मदरसा हो या कॉन्वेंट स्कूल शहर से लेकर गांव तक अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान सिर्फ नाम का है। बीईओ अपने इलाके के स्कूल आज बंद कराते हैं और फोटो खींचकर ग्रुप में भेज देते हैं, दूसरे दिन फिर वे स्कूल संचालित होने लगते हैं। स्कूल बंद कराने और शह देकर खुलवाने का खेल पिछले साल से चल रहा है। इसकी आड़ में बीईओ से लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय तक के बाबुओं की संलिप्तता है।।
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बीते मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी कसया ने एक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की जांच की गई। विद्यालय के मान्यता की काॅपी मांगने पर प्रधानाचार्य ने उन्हें नजबुन निशा गर्ल्स स्कूल सपहा के मान्यता की काॅपी दी।
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30 अप्रैल 2010 को क्रमांक 95 पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कुशीनगर की ओर से जारी मान्यता आदेश वाला यही प्रति बीईओ के पास फाजिलनगर विकासखंड के महासोन स्थित एक अन्य मदरसा पर अंकित मिला, जिस नाम से डिग्री चौराहे पर पूर्व में एक विद्यालय का संचालन किया गया था।
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क्रमांक 95 पर 30 अप्रैल 2010 को हूबहू एक ही जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी दोनों मान्यता पत्रों में सही कौन है? इसको लेकर उहापोह में फंसे बीईओ को तब आश्चर्य हुआ जब पता चला कि नजबुन नेशा गर्ल्स स्कूल महासोन के नाम से महासोन में कोई मदरसा संचालित ही नहीं है। ऐसे में इस बात की भी चर्चा है कि यह फर्जीवाड़ा यही तक सीमित नहीं। अगर जांच हो तो ऐसे कई अन्य संचालित मदरसे भी मिल सकते हैं। बीएसए कार्यालय से मिलती है शह : जिले में मदरसा हो या कॉन्वेंट स्कूल शहर से लेकर गांव तक अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान सिर्फ नाम का है। बीईओ अपने इलाके के स्कूल आज बंद कराते हैं और फोटो खींचकर ग्रुप में भेज देते हैं, दूसरे दिन फिर वे स्कूल संचालित होने लगते हैं। स्कूल बंद कराने और शह देकर खुलवाने का खेल पिछले साल से चल रहा है। इसकी आड़ में बीईओ से लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय तक के बाबुओं की संलिप्तता है।।