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Kushinagar News: देवरिया से चाक वाला पनीर और गोरखपुर से पहुंच रहा खोआ
Thu, 26 Feb 2026 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 26 Feb 2026 02:20 AM IST
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बिक्री के लिए पनीर बनाता दुकानदार।संवाद
पडरौना। होली को देखते हुए मिलावटखोरों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। जिले में देवरिया से चाक वाला पनीर और गोरखपुर से खोआ की खेप पहुंच रही है। बाजार में खोआ तीन रेट का बिक रहा है। जो दुकानदार खुद खोआ बनाकर दे रहे हैं, उसका रेट 500 रुपये किग्रा है, जबकि गोरखपुर व कानपुर से आने वाला खोआ 300-350 रुपये किलोग्राम है। कुछ दुकानदार शहर के दरबार रोड, छुछिया गेट, सुभाष चौक, तिलक चौक और ओंकार वाटिका में बनावटी दूध से पनीर तैयार करा रहे हैं। इस पर रोक लगाने में खाद्य एवं औषधि प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। नाम न छापने की शर्त पर शहर के तीन दुकानदारों ने बताया कि जरूरत से अधिक ऑर्डर मिलने पर पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, देवरिया और बस्ती से भी मिलावटी पनीर और खोआ की खेप मंगाई जा रही है।
जिले में सामान्य दिनों में भी दूध की खपत उत्पादन से अधिक है। त्योहार और शादियों,त्योहारों का दौर आते ही पनीर और दूध से बनी मिठाइयों की मांग सामान्य दिनों के अलावा दस गुना बढ़ जाती है।मांग के अनुसार मुताबिक देवरिया, बस्ती, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज जिले के मिलावटखोरों से आर्डर लगा देते हैं। 400 रुपये की कीमत वाला शुद्ध पनीर थोक में 260-270 रुपये किग्रा मिल जाता है। मिठाई दुकानदारों के अनुसार, एक किग्रा दूध की कीमत ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरों तक 60-70 रुपये तक है। इसमें खोआ और पनीर 200-250 ग्राम निकलता है और मेहनताना, रसोई गैस की कीमत जोड़ने के बाद प्रति किग्रा दाम 350 से 400 हो जाता है। वहीं, शुद्ध खोआ 500 रुपये किग्रा मिल रहाहै। जबकि मिलावटी खोआ 300 से 350 रुपये किग्रा बेचा जा रहा है।
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मिलाए जाते हैं कई हानिकारक पदार्थ
-जानकार बताते हैं कि सिंथेटिक दूध बनाने में यूरिया, डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, शैंपू आदि प्रयोग किए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। इसकी पुष्टि खाद्य विभाग की जांच में हो चुकी है। दूध में चिकनाई दिखाने के लिए रिफाइंड का प्रयोग भी किया जाता है। इन चीजों के लगातार पेट में पहुंचने से तमाम प्रकार के रोग पैदा होने लगते है।यदि इनका सेवन ज्यादा हो जाए तो कैंसर की भी संभावना बन जाती है।
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प्रशासन के पास नहीं है कोई निगरानी तंत्र
शहर में से मिठाइयां, पनीर की सप्लाई रोकने के लिए खाद्य औषधि प्रशासन के पास कोई निगरानी तंत्र नहीं है।इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पास भी ऐसा कोई मुखबिर तंत्र तैयार नहीं है जिससे सूचनाएं मिल सकें कि कब और कहां से मिलावटी दूध और पनीर की सप्लाई हो रही है।यही कारण है कि पनीर की सप्लाई बड़े महानगरों से जिले के शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के स्थानों पर हो रही है।साथ ही यहां से पनीर दूसरे जिलों और राज्य में भेजा जा रहा है।पडरौना और दुदही में मिलावट का कारोबार जोरों पर होता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करती है सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं, उनकी जांच रिपोर्ट जबतक पहुंचती है तब तक कारोबारी मालामाल हो जाते हैं।
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ऐसे करें खोेआ की पहचान
-खोआ में आयोडीन टिंचर की दो-तीन बूंद डालें। असली खोआ पर रंग लाल हो जाएगा। खोआ का रंग काला होता है तो समझ जाएं कि वह मिलावटी है। शुद्ध खोआ रगड़ने में चिकनाहट छोड़ता है, जबकि मिलावटी खोया बिखर जाता है। इसी तरह खोआ में डिटर्जेंट की पहचान के लिए नींबू डालकर बुलबुले का इंतजार करें। अगर नकली खोआ है तो दूध की ही तरह उसमें भी बुलबुले उठेंगे।
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ऐसे जांचें दूध
-पानी की मिलावट की पहचान के लिए दूध को काली सतह पर छोड़ें। अगर दूध के पीछे एक सफेद लकीर छूटे तो वह असली है। इसके साथ ही स्टॉर्च और यूरिया की पहचान के लिए दूध में दो बूंद टिंचर आयोडीन डालकर एक मिनट तक छोड़ दें। अगर दूध का रंग नीला हो जाए तो उसमें मिलावट है। दूध में डिटर्जेंट की पहचान के लिए उसमें नींबू मिलाएं। अगर बुलबुला उठता है तो दूध नकली है।
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ऐसे तैयार होता है मिलावटी खोया
-मिलावटी खोवा तैयार करने में रिफाइंड तेल का इस्तेमाल होता है। सस्ता दूध पाउडर मिलाकर इसे बनाया जाता है। बाद में इसे असली दूध में मिला दिया जता है। यूरिया, सोडा, पोस्टर कलर, कैल्शियम कार्बोनेट, फार्मोलीन केमिकल आदि मिलाकर इसे मिलावटी खोए का रूप दिया जाता है। इसके अलावा आलू और मैदा मिलाकर भी मिलावटी खोवा तैयार जाता है।
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-जांच रिपोर्ट में देरी से कमजोर पड़ जाती है कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा महकमे की लापरवाही और संसाधनों के कमी से समय से जांच रिपोर्ट नहीं आ पाती। इससे भी मिलावटखोरों के हौसले बढ़ गए हैं। अक्सर होता है कि जब तक जांच रिपोर्ट आती है संबंधित दुकानों से वह उत्पाद ही बिक जाता है। ऐसे में जानकारी होने के बाद भी मिलावटी खाद्य सामग्री के कुप्रभाव से किसी को नहीं बचाया जा सकता। अमूमन तीन महीने के भीतर किसी भी नमूने की जांच रिपोर्ट लैब से नहीं आ पाती, जबकि महकमे के मुताबिक इसे 15 दिन में आ जाना चाहिए।
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-होली पर्व को देखते हुए दूध, खोवा और मिठाइयों का नमूना लिया जा रहा है। दुकानदारों को भी अलर्ट किया जा रहा है कि मिलावटी खाद्य सामग्री न बेचें। जांच में मिलावट की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार विभागीय स्तर पर कार्रवाई होती है। जिले में मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के लिए चार टीम बनाई गई है। -प्रदीप कुमार राय,सहायक आयुक्त खाद्य, द्वितीय,खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग कुशीनगर
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-कोई भी मिलावट खाद्य पदार्थ सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। इसका असर लिवर पर पड़ता है इससे लोगों को अनेक तरह की बीमारियां हो सकती है। इससे लोगों को बचना चाहिए। -डा. प्रवीण कुमार राव, डीएम गैस्ट्रो
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जिले में सामान्य दिनों में भी दूध की खपत उत्पादन से अधिक है। त्योहार और शादियों,त्योहारों का दौर आते ही पनीर और दूध से बनी मिठाइयों की मांग सामान्य दिनों के अलावा दस गुना बढ़ जाती है।मांग के अनुसार मुताबिक देवरिया, बस्ती, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज जिले के मिलावटखोरों से आर्डर लगा देते हैं। 400 रुपये की कीमत वाला शुद्ध पनीर थोक में 260-270 रुपये किग्रा मिल जाता है। मिठाई दुकानदारों के अनुसार, एक किग्रा दूध की कीमत ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरों तक 60-70 रुपये तक है। इसमें खोआ और पनीर 200-250 ग्राम निकलता है और मेहनताना, रसोई गैस की कीमत जोड़ने के बाद प्रति किग्रा दाम 350 से 400 हो जाता है। वहीं, शुद्ध खोआ 500 रुपये किग्रा मिल रहाहै। जबकि मिलावटी खोआ 300 से 350 रुपये किग्रा बेचा जा रहा है।
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मिलाए जाते हैं कई हानिकारक पदार्थ
-जानकार बताते हैं कि सिंथेटिक दूध बनाने में यूरिया, डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, शैंपू आदि प्रयोग किए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। इसकी पुष्टि खाद्य विभाग की जांच में हो चुकी है। दूध में चिकनाई दिखाने के लिए रिफाइंड का प्रयोग भी किया जाता है। इन चीजों के लगातार पेट में पहुंचने से तमाम प्रकार के रोग पैदा होने लगते है।यदि इनका सेवन ज्यादा हो जाए तो कैंसर की भी संभावना बन जाती है।
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प्रशासन के पास नहीं है कोई निगरानी तंत्र
शहर में से मिठाइयां, पनीर की सप्लाई रोकने के लिए खाद्य औषधि प्रशासन के पास कोई निगरानी तंत्र नहीं है।इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पास भी ऐसा कोई मुखबिर तंत्र तैयार नहीं है जिससे सूचनाएं मिल सकें कि कब और कहां से मिलावटी दूध और पनीर की सप्लाई हो रही है।यही कारण है कि पनीर की सप्लाई बड़े महानगरों से जिले के शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के स्थानों पर हो रही है।साथ ही यहां से पनीर दूसरे जिलों और राज्य में भेजा जा रहा है।पडरौना और दुदही में मिलावट का कारोबार जोरों पर होता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करती है सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं, उनकी जांच रिपोर्ट जबतक पहुंचती है तब तक कारोबारी मालामाल हो जाते हैं।
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ऐसे करें खोेआ की पहचान
-खोआ में आयोडीन टिंचर की दो-तीन बूंद डालें। असली खोआ पर रंग लाल हो जाएगा। खोआ का रंग काला होता है तो समझ जाएं कि वह मिलावटी है। शुद्ध खोआ रगड़ने में चिकनाहट छोड़ता है, जबकि मिलावटी खोया बिखर जाता है। इसी तरह खोआ में डिटर्जेंट की पहचान के लिए नींबू डालकर बुलबुले का इंतजार करें। अगर नकली खोआ है तो दूध की ही तरह उसमें भी बुलबुले उठेंगे।
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ऐसे जांचें दूध
-पानी की मिलावट की पहचान के लिए दूध को काली सतह पर छोड़ें। अगर दूध के पीछे एक सफेद लकीर छूटे तो वह असली है। इसके साथ ही स्टॉर्च और यूरिया की पहचान के लिए दूध में दो बूंद टिंचर आयोडीन डालकर एक मिनट तक छोड़ दें। अगर दूध का रंग नीला हो जाए तो उसमें मिलावट है। दूध में डिटर्जेंट की पहचान के लिए उसमें नींबू मिलाएं। अगर बुलबुला उठता है तो दूध नकली है।
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ऐसे तैयार होता है मिलावटी खोया
-मिलावटी खोवा तैयार करने में रिफाइंड तेल का इस्तेमाल होता है। सस्ता दूध पाउडर मिलाकर इसे बनाया जाता है। बाद में इसे असली दूध में मिला दिया जता है। यूरिया, सोडा, पोस्टर कलर, कैल्शियम कार्बोनेट, फार्मोलीन केमिकल आदि मिलाकर इसे मिलावटी खोए का रूप दिया जाता है। इसके अलावा आलू और मैदा मिलाकर भी मिलावटी खोवा तैयार जाता है।
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-जांच रिपोर्ट में देरी से कमजोर पड़ जाती है कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा महकमे की लापरवाही और संसाधनों के कमी से समय से जांच रिपोर्ट नहीं आ पाती। इससे भी मिलावटखोरों के हौसले बढ़ गए हैं। अक्सर होता है कि जब तक जांच रिपोर्ट आती है संबंधित दुकानों से वह उत्पाद ही बिक जाता है। ऐसे में जानकारी होने के बाद भी मिलावटी खाद्य सामग्री के कुप्रभाव से किसी को नहीं बचाया जा सकता। अमूमन तीन महीने के भीतर किसी भी नमूने की जांच रिपोर्ट लैब से नहीं आ पाती, जबकि महकमे के मुताबिक इसे 15 दिन में आ जाना चाहिए।
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-होली पर्व को देखते हुए दूध, खोवा और मिठाइयों का नमूना लिया जा रहा है। दुकानदारों को भी अलर्ट किया जा रहा है कि मिलावटी खाद्य सामग्री न बेचें। जांच में मिलावट की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार विभागीय स्तर पर कार्रवाई होती है। जिले में मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के लिए चार टीम बनाई गई है। -प्रदीप कुमार राय,सहायक आयुक्त खाद्य, द्वितीय,खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग कुशीनगर
-कोई भी मिलावट खाद्य पदार्थ सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। इसका असर लिवर पर पड़ता है इससे लोगों को अनेक तरह की बीमारियां हो सकती है। इससे लोगों को बचना चाहिए। -डा. प्रवीण कुमार राव, डीएम गैस्ट्रो

बिक्री के लिए पनीर बनाता दुकानदार।संवाद