कुशीनगर: हनुमानगंज थाने में दिवाली की सफाई के दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आया सिपाही, करंट लगने से मौत
हनुमानगंज थाने में दिवाली की सफाई के दौरान शनिवार सुबह हाईटेंशन तार की चपेट में आने से 2025 बैच के सिपाही दीपक गुप्ता (25) की मौत हो गई। बैरक की छत पर झाड़ू लगाते समय वह ऊपर से गुजर रहे तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे हनुमानगंज थाने में दिवाली की साफ-सफाई चल रही थी। थाना परिसर स्थित बैरक की छत पर दीपक झाड़ू लगा रहे थे। इसी दौरान वह ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तार की चपेट में आ गए। करंट लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना से थाने में अफरा-तफरी मच गई और दिवाली की खुशियां मातम में बदल गईं।
थानाध्यक्ष दिग्विजय नारायण राय भी पुलिसकर्मियों के साथ अस्पताल पहुंचे। दीपक मूल रूप से अंबेडकरनगर जिले के टांडा थाना क्षेत्र के करमपुर बरसावा गांव के निवासी थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद हनुमानगंज थाने में उनकी पहली तैनाती हुई थी।
घटना की जानकारी मिलने पर विधायक विवेकानंद पांडेय अस्पताल पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। एएसपी सिद्धार्थ वर्मा और सीओ अजय श्रीवास्तव ने थाने पहुंचकर घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजन को घटना की सूचना दे दी गई है।
दिवाली के मद्देनजर थाने की बैरक में साफ-सफाई की जा रही थी। इसी दौरान करंट लगने से सिपाही की मौत हो गई। परिजन को सूचना दे दी गई है। कुशीनगर समाचार, सिपाही की मौत, हनुमानगंज थाना, हाईटेंशन तार, करंट लगने से मौत, दीपक गुप्ता, यूपी पुलिस, दिवाली सफाई हादसा, पुलिसकर्मी की मौत, बिजली हादसा
दिवाली पर घर का चिराग बुझा, बेटे की मौत से मां बदहवास
दिवाली पर जिस घर में बेटे के आने और खुशियां मनाने की उम्मीद थी, वहां अब मातम पसरा है। हनुमानगंज थाने में करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले सिपाही दीपक गुप्ता दो बहनों के इकलौते भाई थे। करीब तीन वर्ष पहले पिता के निधन के बाद वह मां के बुढ़ापे का सहारा और परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद बन गए थे। जवान बेटे की मौत से मां पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
विभाग से सूचना मिलने के बाद शव लेने पहुंचे दीपक के चाचा शिवमूरत ने बताया कि दीपक के पिता राममूर्ति गुप्ता सेना से सेवानिवृत्त थे। करीब तीन वर्ष पहले उनके निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी दीपक के कंधों पर आ गई थी। उनकी दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। ऐसे में मां के साथ परिवार में दीपक ही थे, जिनसे आगे की जिंदगी की उम्मीदें जुड़ी थीं।
पुलिस की वर्दी पहनने का सपना पूरा होने के बाद दीपक की पहली तैनाती हनुमानगंज थाने में हुई थी। बेटे को वर्दी में देखकर मां ने उसके भविष्य को लेकर कई सपने संजोए थे। परिवार को उम्मीद थी कि अब हालात बदलेंगे और जीवन में खुशियां लौटेंगी, लेकिन दीपावली की सफाई के दौरान हुए हादसे ने सब कुछ छीन लिया।
जिस बेटे के सहारे मां बुढ़ापे की जिंदगी गुजारने की उम्मीद लगाए बैठी थीं, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। त्योहार पर घर को रोशन करने की तैयारियों के बीच परिवार का दीपक हमेशा के लिए बुझ गया।