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Kushinagar News: आसान कमाई का झांसा...साइबर अपराध में फंसे युवक ने दी जान
Wed, 22 Apr 2026 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 22 Apr 2026 01:01 AM IST
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दुबौली निवासी मृतक विवेक की फाइल फोटो।
- फोटो : 1
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तमकुहीरोड(कुशीनगर)। सेवरही थाना क्षेत्र के दुबौली गांव के विवेक श्रीवास्तव खुदकुशी मामले में पुलिस ने उसके कमरे से पांच पन्ने का सुसाइड नोट बरामद किया है। साथ ही विवेक ने मोबाइल में 16 मिनट के ऑडियो में चारों जालसाजों का नाम और पूरी कहानी का जिक्र किया है। अब तक की जांच में पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि ई-काॅमर्स से कम दिनों में अच्छी कमाई का लालच देकर जालसाजों ने पड़ोसी की मदद से विवेक को झांसे में लिया था। एचडीएफसी बैंक का खाता फ्रीज होने पर उसे साइबर अपराध में फंसने का अहसास हुआ। आरोपियों ने इस कदर प्रताड़ित किया विवेक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने चार आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस पकड़े गए आरोपी के सहारे बाकी आरोेपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
दुबौली गांव निवासी 28 वर्षीय विवेक तीन बहनों में इकलौता भाई था। बताया जाता है कि पड़ोस के संदीप सिंह ने उसे कम दिनों में अधिक रुपये कमाने का लालच देकर गोरखपुर के अपने दोस्त अंकित कुशवाहा, अभिषेक कुशवाहा और सोनू के पास भेजा। तीनों जालसाजों ने ई-काॅमर्स के जरिए कमाई का लालच दिया। झांसे में आने पर विवेक का तीन बैंंकों में अकाउंट खुलवाकर जालसाजों ने पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास रख लिए। जालसाजों ने बताया था खाते में अंकित का बड़ा भाई रुपये भेजेगा और निकाल कर तुम देना। इस पैसे से दिल्ली और मुंबई से कपड़े लाएंगे और बेचकर कमाई करेंगे।
उसके बैंक खातों से अवैध लेन-देन का खेल चलता रहा। विश्वास में आकर उसने अपना सभी दस्तावेज भी आरोपियों को दे दिया था। एचडीएफसी बैंक का खाता जब फ्रिज हुआ और बैंक से फोन आया तो विवेक को जालसाजी और साइबर अपराध में फंसने की जानकारी हुई। इसका विवेक ने विरोध किया तो चारों जालसाजों ने मिलकर उसे मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसके पास मौत को गले लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
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विवेक के परिजनों के अनुसार, जालसाजों ने फरवरी व मार्च में तीनों बैंक में अकाउंट खुलवाया था। खाता खुलने के करीब बीस दिन बाद ही एचडीएफसी बैंक का खाता फ्रिज हो गया। पडरौना कोतवाली की बांसी चौकी पुलिस ने उन आरोपियों को पकड़ा भी था लेकिन फिर छोड़ दिया था। उसके बाद आरोपियों ने विवेक को फोन पर धमकाया भी था। विवेक ने इस मामले में सेवरही थाने के एक पुलिसकर्मी का जिक्र किया है। उसकी शिकायत के बावजूद पुलिसकर्मी ने आरोपियों के खिलाफ कुछ नहीं किया।
विवेक की खुदकुशी के बाद परिजनों की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। माता-पिता ने बताया कि बेटा गुमसुम रहता था, पूछने पर कुछ बताता नहीं था। पड़ोसी संदीप के पास वह बार-बार जाता था। जालसाजों ने ऐसा किया कि घर का चिराग बुझ गया और बुढ़ापे की लाठी छिन गई। थानाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आत्महत्या के लिए उकसाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है। विवेचना के क्रम में जो साक्ष्य मिलेंगे, उसके अनुसार धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
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पुलिस सक्रिय हुई होती तो बच जाती विवेक की जान
पुलिस ने आरोपी संदीप सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। विवेक के सुसाइड नोट और ऑडियो के आधार पर पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह कोई संगठित गिरोह तो नहीं है। पुलिस की पूछताछ में संदीप ने कई अहम जानकारियां पुलिस को दी हैं। उसके मोबाइल से पुलिस कई संदिग्ध नंबरों की जांच कर रही है। विवेक के पिता चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि यदि पुलिस उसी समय मेरे लड़के का प्रार्थनापत्र लेकर जांच कर आरोपियों की तलाश कर ली होती तो आज मेरा बेटा मौत को गले नहीं लगाया होता और सभी आरोपी पुलिस के गिरफ्त में होते।
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दुबौली गांव निवासी 28 वर्षीय विवेक तीन बहनों में इकलौता भाई था। बताया जाता है कि पड़ोस के संदीप सिंह ने उसे कम दिनों में अधिक रुपये कमाने का लालच देकर गोरखपुर के अपने दोस्त अंकित कुशवाहा, अभिषेक कुशवाहा और सोनू के पास भेजा। तीनों जालसाजों ने ई-काॅमर्स के जरिए कमाई का लालच दिया। झांसे में आने पर विवेक का तीन बैंंकों में अकाउंट खुलवाकर जालसाजों ने पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास रख लिए। जालसाजों ने बताया था खाते में अंकित का बड़ा भाई रुपये भेजेगा और निकाल कर तुम देना। इस पैसे से दिल्ली और मुंबई से कपड़े लाएंगे और बेचकर कमाई करेंगे।
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उसके बैंक खातों से अवैध लेन-देन का खेल चलता रहा। विश्वास में आकर उसने अपना सभी दस्तावेज भी आरोपियों को दे दिया था। एचडीएफसी बैंक का खाता जब फ्रिज हुआ और बैंक से फोन आया तो विवेक को जालसाजी और साइबर अपराध में फंसने की जानकारी हुई। इसका विवेक ने विरोध किया तो चारों जालसाजों ने मिलकर उसे मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसके पास मौत को गले लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
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विवेक के परिजनों के अनुसार, जालसाजों ने फरवरी व मार्च में तीनों बैंक में अकाउंट खुलवाया था। खाता खुलने के करीब बीस दिन बाद ही एचडीएफसी बैंक का खाता फ्रिज हो गया। पडरौना कोतवाली की बांसी चौकी पुलिस ने उन आरोपियों को पकड़ा भी था लेकिन फिर छोड़ दिया था। उसके बाद आरोपियों ने विवेक को फोन पर धमकाया भी था। विवेक ने इस मामले में सेवरही थाने के एक पुलिसकर्मी का जिक्र किया है। उसकी शिकायत के बावजूद पुलिसकर्मी ने आरोपियों के खिलाफ कुछ नहीं किया।
विवेक की खुदकुशी के बाद परिजनों की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। माता-पिता ने बताया कि बेटा गुमसुम रहता था, पूछने पर कुछ बताता नहीं था। पड़ोसी संदीप के पास वह बार-बार जाता था। जालसाजों ने ऐसा किया कि घर का चिराग बुझ गया और बुढ़ापे की लाठी छिन गई। थानाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आत्महत्या के लिए उकसाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है। विवेचना के क्रम में जो साक्ष्य मिलेंगे, उसके अनुसार धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
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पुलिस सक्रिय हुई होती तो बच जाती विवेक की जान
पुलिस ने आरोपी संदीप सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। विवेक के सुसाइड नोट और ऑडियो के आधार पर पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह कोई संगठित गिरोह तो नहीं है। पुलिस की पूछताछ में संदीप ने कई अहम जानकारियां पुलिस को दी हैं। उसके मोबाइल से पुलिस कई संदिग्ध नंबरों की जांच कर रही है। विवेक के पिता चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि यदि पुलिस उसी समय मेरे लड़के का प्रार्थनापत्र लेकर जांच कर आरोपियों की तलाश कर ली होती तो आज मेरा बेटा मौत को गले नहीं लगाया होता और सभी आरोपी पुलिस के गिरफ्त में होते।

दुबौली निवासी मृतक विवेक की फाइल फोटो।- फोटो : 1