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छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ
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‘राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर हैं प्राचीन सिक्के’
कसया (कुशीनगर)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर की तरफ से ‘सिक्कों की कहानी छायाचित्रों की जुबानी’ विषय पर मंगलवार को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। यह प्रदर्शनी दस अगस्त तक चलेगी। इस दौरान संग्रहालय के अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने कहा कि प्राचीन सिक्के राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर हैं। भावी पीढ़ी के लिए इन्हें संरक्षित रखना लोगों का दायित्व है।
प्राचीन सिक्कों की प्रदर्शनी के दौरान संग्रहालय के अध्यक्ष ने प्राचीन सिक्कों की महत्ता पर प्रकाश डाला। राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए उन्होंने भावी पीढ़ी के लिए इन्हें संरक्षित रखने पर जोर दिया। बच्चों में धरोहरों के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करना प्रमुख कार्य है। प्रदर्शनी में सिक्कों की उत्पत्ति, उनके निर्माण के विविध तरीकों जैसे टूल-डाई तकनीक, स्क्रू प्रेस तकनीक, भाप-चलित मशीनों से निर्माण व आधुनिक टकसालों में निर्माण की तकनीकों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इस प्रदर्शनी में प्रारंभ से लेकर वर्तमान तक सिक्कों को ढालने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
सिक्कों का उत्पादन, भारत के प्राचीनतम आहत सिक्के, भारतीय यवन सिक्के, कुषाण एवं गुप्त राजाओं के सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्कों के अतिरिक्त सात वाहनों के सिक्के, मध्यकालीन सिक्के, आधुनिक सिक्कों की श्रृंखला में आना, नया पैसा के अतिरिक्त मेडल आदि का अवलोकन प्रदर्शनी में किया जा सकता है। प्रदर्शनी 10 अगस्त तक रहेगी। इस मौके पर तेज प्रताप शुक्ला, गोविंद, मीरचंद, वेग, रवि यादव, अवकाश आदि उपस्थित थे।
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कसया (कुशीनगर)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर की तरफ से ‘सिक्कों की कहानी छायाचित्रों की जुबानी’ विषय पर मंगलवार को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। यह प्रदर्शनी दस अगस्त तक चलेगी। इस दौरान संग्रहालय के अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने कहा कि प्राचीन सिक्के राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर हैं। भावी पीढ़ी के लिए इन्हें संरक्षित रखना लोगों का दायित्व है।
प्राचीन सिक्कों की प्रदर्शनी के दौरान संग्रहालय के अध्यक्ष ने प्राचीन सिक्कों की महत्ता पर प्रकाश डाला। राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए उन्होंने भावी पीढ़ी के लिए इन्हें संरक्षित रखने पर जोर दिया। बच्चों में धरोहरों के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करना प्रमुख कार्य है। प्रदर्शनी में सिक्कों की उत्पत्ति, उनके निर्माण के विविध तरीकों जैसे टूल-डाई तकनीक, स्क्रू प्रेस तकनीक, भाप-चलित मशीनों से निर्माण व आधुनिक टकसालों में निर्माण की तकनीकों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इस प्रदर्शनी में प्रारंभ से लेकर वर्तमान तक सिक्कों को ढालने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
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सिक्कों का उत्पादन, भारत के प्राचीनतम आहत सिक्के, भारतीय यवन सिक्के, कुषाण एवं गुप्त राजाओं के सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्कों के अतिरिक्त सात वाहनों के सिक्के, मध्यकालीन सिक्के, आधुनिक सिक्कों की श्रृंखला में आना, नया पैसा के अतिरिक्त मेडल आदि का अवलोकन प्रदर्शनी में किया जा सकता है। प्रदर्शनी 10 अगस्त तक रहेगी। इस मौके पर तेज प्रताप शुक्ला, गोविंद, मीरचंद, वेग, रवि यादव, अवकाश आदि उपस्थित थे।
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