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छितौनी बांध की मरम्मत में मनमानी

Thu, 19 Jan 2017 11:33 PM IST
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 19 Jan 2017 11:33 PM IST
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Chituni arbitrary dam repair
छितौनी बांध के स्पर सी पर बांध के पास से मिट्टी खोदकर बोरी में भरी जा रही है। - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र से होकर गुजरने वाली बड़ी गंडक के छितौनी  बांध के किनारे बसे गैनही जंगल, मदनपुर सुकरौली, सिसवा गोपाल, भेड़ीहारी सहित कई गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए बंधे की मरम्मत हर साल होती है। लेकिन इसके रख-रखाव में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों के इस्तेमाल में इस साल काफी मनमानी की जा रही है।       लगभग चौदह किलोमीटर लंबाई में बना छितौनी बांध महराजगंज जनपद के चंदागुलरभार के पास मुख्य पश्चिमी गंडक नहर से सटकर निकला हैं। इस बांध से गैनही जंगल, मदनपुर सुकरौली, सिसवा गोपाल, भेड़ीहारी, भैसहां, पकड़ी बृजलाल, हनुमानगंज, लक्ष्मीपुर पड़रहवा, माघी, भगवानपुर,आदि तहसील क्षेत्र के गांव व खड्डा नगरपंचायत, चीनी मिल, रेल लाइन की बाढ़ से सुरक्षा होती है। हर साल करोड़ों रुपये मरम्मत के नाम पर जिम्मेदार खर्च करते हैं लेकिन जब बाढ़ आती है तो लोग परेशान रहते हैं कि बांध टूट न जाए।
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कुछ साल पहले मदनपुर गांव के पास तटबंध तोड़ते हुए नदी मुख्य पश्चिमी गंडक नहर में समा गई थी। सैकड़ों लोगों के जिंदगी पर खतरा उत्पन्न हो गया था, जिस पर काफी मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका था। इसके बाद भी विभागीय लोग मरम्मत के नाम पर सरकारी धन का बंदर बाट करने से बाज नहीं आ रहे है। इस वर्ष भी मरम्मत के लिए भारी भरकम धन एलाट है। इसके लिए बड़ी तादाद में पत्थर मंगाए जा रहे हैं। इसमें भी नियमों की अनदेखी कर बिना चट्टा लगाए ही सप्लाई दिखाई जा रही है। विभागीय जानकारों  के अनुसार पत्थर का साइज व क्वालिटी भी निम्न है। ट्रक से उतरने के बाद पत्थर को चट्टा लगाकर उसका माप दूसरे डिवीजन के अधिकारी करके सही होने की रिपोर्ट देते हैं, लेकिन इसका भी पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ साल पहले खड्डा में तैनात रहे एसडीओ एमके सिंह की ऐसे ही मामले में गोलीमार कर हत्या कर दी गई थी। विभागीय  सूत्र बताते हैं कि विना कार्य कराए ही कई चहेते ठेकेदारों के नाम बड़ी रकम का चेक काटकर धन का बंटवारा किए जाने की चर्चा है। मौजूद मुंशी ने बताया कि सोमवार को जेई ने लगभग एक बजे कार्य शुरू कराया। उन्होंने बगल से मिट्टी खोदने और बोरी में भरने को कहा है। जबकि नदी से दो किलोमीटर दूर से मिट्टी लाकर बोरे में भरकर नदी में डालना है।
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भैंसहां गांव निवासी आरपी सिंह, मुन्ना यादव, मदनपुर निवासी केपी सिंह, हनुमानगंज निवासी हरिशंकर सिंह सहित कई लोगों का कहना है कि बाढ़खंड के लोग मरम्मत के नाम पर धन का गोलमाल कर रहे हैं। जितना धन मरम्मत पर खर्च होता है, उतना में तो लोहे की दीवार बन जाती।
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इस संबंध में अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि सही तरीके से वर्क चल रहा है। कुछ ठेकेदारों का तीन चार साल से बकाया था, उन्हें पेमेंट के लिए चेक काटा गया है। अब चट्टा लग रहा है।
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