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Kushinagar News: तिब्बत पर चीन की दमनकारी नीति बंद होनी चाहिए

Thu, 11 Dec 2025 12:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 11 Dec 2025 12:52 AM IST
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China's repressive policy on Tibet must end
कुशीनगर स्थित तिब्बती मंदिर सभागार में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते बुद्ध पीजी कॉलेज के प्रा
पकवा इनार। कुशीनगर स्थित तिब्बत मंदिर के सभागार में बुधवार को भारत तिब्बत संवाद मंच की तरफ से साझा विरासत एवं साझा भविष्य पर संगोष्ठी हुई। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा के नोबेल शांति पुरस्कार के 36 वर्ष पूरा होने के अवसर पर होने वाले इस कार्यक्रम का खास महत्व है। इस दौरान जय भारत, जय तिब्बत और जय जगत का जयघोष गूंजा। दोनों देशों ने अपने राष्ट्र गान प्रस्तुत किए।
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भारत तिब्बत समन्वय केंद्र की समन्वयक ताशी दीकी ने कहा कि 10 दिसंबर 1989 में आध्यात्मिक नेता व तिब्बती धर्म गुरु 14वें दलाई लामा को शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। उनका 90 वां जन्मदिन मना रहे हैं। कहा कि तिब्बत को दुनिया का छत भी कहा जाता है। चीन में कम्युनिज्म आने के बाद तिब्बत को कब्जा कर लिया। चीन के दमनकारी नीतियों से परेशान होकर दलाई लामा ने अनुयायियों के साथ भारत में शरण ली थी। मौजूदा समय में तिब्बत में चीन के दमनकारी नीति से तिब्बती लोग आत्महत्या कर रहे हैं।
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प्राकृतिक संसाधनों का चीन अब दोहन कर रहा है। तिब्बती समाज, संस्कृति, धर्म व सभ्यता को नष्ट कर रहा है। बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में रखकर उन्हें कम्यूनिज्म को बढ़ा रहे हैं। विश्व मानवाधिकार दिवस भी तिब्बत नहीं मना पा रहा है। तिब्बत के लोग सदैव मध्यम मार्ग अपनाया है। शांति और अहिंसा के मार्ग को तिब्बत अपना रहा है। तिब्बत जब स्वतंत्र था, उस समय भारत की सुरक्षा थी। अब भारत चीन के बीच सीमा पर असहज वातावरण कायम है। कहा कि बच्चे तिब्बत के बारे में न सोच सके, इसके लिए चीन दमनकारी नीति से काम में जुटा हुआ है। बच्चों को जबरन बोर्डिंग स्कूल बंद कर उन्हें चीनी संस्कृति से ब्रेन वाश किया जा रहा है।
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प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्र ने कहा तिब्बत और भारत के संबंध हमेशा प्रगाढ़ रहा है। भारत की सुरक्षा में तिब्बत मुकुट रहा है। वर्ष 1954 में भारत और चीन के बीच पंचशील का समझौता हुआ। दोनों देशों ने पंचशील के सिद्धांत को अनुपालन करने का काम किए। भारत सभी राष्ट्रों की संप्रभुता व संबंधों को प्रगाढ़ करने का पक्षधर रहा है।

अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि भारत और चीन के बीच तिब्बत है। चीन की ताकत व दमनकारी नीति ने तिब्बत में तबाही मचाई है। भारत तिब्बत के साथ खड़ा है। भारत अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेगा।

इसके पूर्व भारत-तिब्बत संवाद मंच के क्षेत्र सचिव प्रस्ताविकी डा. शुभलाल ने प्रस्तुत किए। संचालन दिवाकर मणि त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर डाॅ. वैद्यनाथ गुप्ता, सुरेश गुप्त, डाॅ. निगम मौर्य, डाॅ. पारसनाथ, भाजपा महामंत्री संतोष दत्त राय, अरुण दूबे, राम बाहुबली दास, डाॅ. वीना गुप्ता, सभासद केशव सिंह, प्रभुनाथ सिंह, कैप्टन वेदप्रकाश मिश्र, डाॅ. सीबी सिंह, देवेंद्र राय, डाॅ. अभय राय, तपेश्वर, सचिन मौजूद थे।


प्रोजेक्टर से भारत-तिब्बत की ऐतिहासिकता से परिचित कराए

भारत तिब्बत समन्वय केंद्र दिल्ली की तरफ से तिब्बती सभागार में प्रोजेक्टर के माध्यम से दोनों देशों के बीच साझी संस्कृति व संबंधों को दर्शाया गया, जिसमें यह सामने आया कि देवनागरी लिपि भी तिब्बत में भारत से ही पहुंची। चीन के दमनकारी नीति से आजिज होकर तिब्बती बुद्ध दर्शन साहित्य को गठरी में बांधकर भारत लाया गया था। तिब्बत की मुद्रा, राष्ट्रीय ध्वज, तिब्बती पासपोर्ट की तस्वीरें दिखाकर स्वतंत्र राष्ट्र होने की पुष्टि की। मौजूदा स्थिति तिब्बत के लोगों की डीएनए संग्रह, दलाई लामा के तस्वीर पर प्रतिबंध आदि को भी दिखाया गया। नदियां, कैलाश मानसरोवर यात्रा सहित अन्य छवियां दिखाई गईं।
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