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Kushinagar News: पिता की राह देखते भूखे सो गए बच्चे, अनाज की जगह आई मौत की खबर

Sun, 28 Jun 2026 01:29 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:29 AM IST
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Children fell asleep hungry while waiting for their father; instead of grain, news of death arrived.
छोटेलाल की मौत के सूचना पर रोते बिलखते परिजन ।स्रोत-सोशल मीडिया - फोटो : Samvad
- मछली बेचकर अनाज लाने वाले थे छोटेलाल, घर में नहीं जला चूल्हा
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दुदही। बांसगांव बिंद टोली में शुक्रवार की रात छोटेलाल निषाद के घर में चूल्हा नहीं जला। पत्नी इंद्रावती और चारों बच्चे इस इंतजार में बैठे रहे कि छोटेलाल मछली बेचकर लौटेंगे तो अनाज आएगा और भोजन पकेगा। इंतजार करते पूरा परिवार भूखे पेट सो गया। भूख से बेहाल पत्नी-बच्चों की शनिवार की सुबह नींद टूटी तो छोटेलाल की मौत की खबर मिली। कफन और शव लाने के लिए गाड़ी के भाड़े का इंतजाम गांव के लोगों ने मिलकर किया।
विशुनपुरा क्षेत्र के बांसगांव बिंद टोली में रहने वाले छोटेलाल निषाद (45) भूमिहीन थे। नदी-नाले से मछलियां पकड़ते और मछलियां बेचकर ही पत्नी व चार बच्चों का पालन-पोषण करते थे। परिवार में दो बेटियां ज्ञानंती (25), किरन (23), दिलीप (20) और 18 वर्षीय सतेंद्र हैं। किरन और सतेंद्र जन्म से ही दिव्यांग हैं। करीब 14 दिन पहले बांसी नदी के धोकरहा घाट पर मगरमच्छ के हमले में एक 13 वर्षीय किशोर की मौत के बाद लोगों ने नदी में जाना बंद कर दिया था। गांव के अन्य लोगों ने तो जिंदगी की सलामती के लिहाज से नदी में जाने से परहेज कर लिया लेकिन छोटेलाल निषाद के परिवार के लिए जिंदगी बसर करना मुश्किल हो गया।
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भूखे बच्चों की बेबसी देखते हुए छोटेलाल कब तक खतरे की परवाह करते। शुक्रवार को वह घर से करीब तीन किलोमीटर दूर धोकरहा कतरा स्थित झरही नाले में मछली पकड़ने निकल पड़े। पत्नी-बच्चे इस उम्मीद में खुश हुए कि छोटेलाल मछली बेचकर अनाज लेकर लौटेंगे। देर रात तक इंतजार करते थककर पूरा परिवार भूखे पेट सो गया। शनिवार की सुबह झरही नाले में छोटेलाल का शव मिलने की खबर गांव में फैली तो परिवार का इंतजार अंतहीन हो गया।
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दो-दो दिव्यांग संतानें, फिर भी पेंशन मिली न आवास
छोटेलाल निषाद की मौत के बाद सरकारी व्यवस्था की लापरवाही भी सामने आ गई है। छोटेलाल की बेटी किरन और बेटा सतेंद्र जन्म से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद दोनों को दिव्यांग पेंशन का लाभ नहीं मिला है। परिवार को आवास योजना का लाभ भी नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सहायता के नाम पर परिवार को केवल शौचालय मिला है। सतेंद्र चलने-फिरने में असमर्थ है। उसे करीब 12 वर्ष पहले स्कूल से ट्राइसाइकिल मिली थी। नई ट्राइसाइकिल के लिए कई बार प्रयास किया गया, लेकिन नहीं मिल सकी। परिवार को आवासीय पट्टा भी नहीं मिला है।

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सरकारी योजनाओं से अगर परिवार वंचित हैं तो उनको लाभ दिलवाया जाएगा। इसके लिए सचिव को तत्काल बोलता हूं। दो दिन के अंदर परिवार से कागजात लेकर नियमानुसार योजना का लाभ दिलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। -प्रहलाद सिंह, बीडीओ, दुदही

छोटेलाल की मौत के सूचना पर रोते बिलखते परिजन ।स्रोत-सोशल मीडिया

छोटेलाल की मौत के सूचना पर रोते बिलखते परिजन ।स्रोत-सोशल मीडिया- फोटो : Samvad

छोटेलाल की मौत के सूचना पर रोते बिलखते परिजन ।स्रोत-सोशल मीडिया

छोटेलाल की मौत के सूचना पर रोते बिलखते परिजन ।स्रोत-सोशल मीडिया- फोटो : Samvad

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