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सीएचसी दुदही : सुबह पहुंच गए मरीज, डॉक्टरों का पता नहीं
Wed, 26 Feb 2025 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 26 Feb 2025 12:22 AM IST
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दुदही। सीएचसी पर आने वाले मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। मंगलवार को सुबह नौ बजे 30 से अधिक मरीज पहुंच गए थे, लेकिन ओपीडी में 10:12 बजे डॉक्टर पहुंचे तो इलाज शुरू हुआ। एक्सरे कक्ष, पैथालॉजी और दवा काउंटर पर ताला बंद मिला।
सीएचसी अधीक्षक भी ओपीडी में नहीं पहुंचे थे। मरीजों को जांच और दवा खरीदने के लिए बाहर जाना पड़ा। दुदही ब्लॉक की दो लाख से अधिक आबादी है। इलाज के लिए सीएचसी पर आने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सुबह 8 बजे भृगुनाथ, प्रभावती, राजू, रामश्रृंगार आदि लोग सीएचसी पर इलाज कराने के लिए पहुंचे, 10 बजे पर्ची काउंटर खुलने के बाद पर्ची बननी शुरू हुई।
10:12 बजे डॉ. अनुज कुमार और डॉ. नितिन कुमार पहुंचे और मरीजों का इलाज शुरू किया, जबकि पैथालॉजी, एक्सरे और दवा वितरण काउंटर पर ताला बंद था। डॉक्टर के आने के बाद एक स्वास्थ्यकर्मी पहुंचा और एक्सरे, पैथालॉजी का ताला खोला। कुछ देर बाद दवा वितरण काउंटर पर स्वास्थ्यकर्मी पहुंंचा। मरीजों को डॉक्टर जो दवा लिख रहे थे, उसमें एक से दो ही दवा अंदर से मिल रही थी, बाकी बाहरी दवाएं लिखी जा रही थी। सीएचसी प्रभारी और डॉ. अरविंद कुमार 10 बजे तक अस्पताल में नहीं पहुंंचे थे।
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आवास में कुर्सी उठा ले गए कर्मचारी : मरीजों का कहना था कि इस अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ और प्रसूती रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। मरीजों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं थी। वहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि मीटिंग हाॅल में कुर्सियां थी जो कर्मचारी अपने आवास पर उठा ले गए हैं।
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सीएचसी अधीक्षक भी ओपीडी में नहीं पहुंचे थे। मरीजों को जांच और दवा खरीदने के लिए बाहर जाना पड़ा। दुदही ब्लॉक की दो लाख से अधिक आबादी है। इलाज के लिए सीएचसी पर आने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सुबह 8 बजे भृगुनाथ, प्रभावती, राजू, रामश्रृंगार आदि लोग सीएचसी पर इलाज कराने के लिए पहुंचे, 10 बजे पर्ची काउंटर खुलने के बाद पर्ची बननी शुरू हुई।
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10:12 बजे डॉ. अनुज कुमार और डॉ. नितिन कुमार पहुंचे और मरीजों का इलाज शुरू किया, जबकि पैथालॉजी, एक्सरे और दवा वितरण काउंटर पर ताला बंद था। डॉक्टर के आने के बाद एक स्वास्थ्यकर्मी पहुंचा और एक्सरे, पैथालॉजी का ताला खोला। कुछ देर बाद दवा वितरण काउंटर पर स्वास्थ्यकर्मी पहुंंचा। मरीजों को डॉक्टर जो दवा लिख रहे थे, उसमें एक से दो ही दवा अंदर से मिल रही थी, बाकी बाहरी दवाएं लिखी जा रही थी। सीएचसी प्रभारी और डॉ. अरविंद कुमार 10 बजे तक अस्पताल में नहीं पहुंंचे थे।
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आवास में कुर्सी उठा ले गए कर्मचारी : मरीजों का कहना था कि इस अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ और प्रसूती रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। मरीजों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं थी। वहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि मीटिंग हाॅल में कुर्सियां थी जो कर्मचारी अपने आवास पर उठा ले गए हैं।